राजपाल यादव पिछले लगभग तीन दशकों से हिंदी सिनेमा में कॉमेडी का बड़ा चेहरा रहे हैं। अपनी छोटी कद-काठी और शानदार टाइमिंग से उन्होंने बॉलीवुड में अलग पहचान बनाई।
लेकिन यह सफलता उन्हें यूं ही नहीं मिली — इसके पीछे गरीबी, संघर्ष, असफलता और आत्मविश्वास की लंबी कहानी है।
राजपाल यादव का जन्म 16 मार्च 1971 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से 50 किलोमीटर दूर कुंद्रा गांव में हुआ था । उनका पूरा नाम राजपाल नौरंग यादव है । उनके पिता एक किसान थे । खेती से ही परिवार का पालन पोषण होता था ।
उस समय गांव में एक भी पक्का घर नहीं था । राजपाल यादव दोस्तों के साथ गड्ढे में भरे गंदे पानी में खेलते थे । एक बार होमवर्क करके स्कूल नहीं गए तो मास्टर जी ने लकड़ी से राजपाल की पिटाई की। कुछ दिन बाद पिता स्कूल पहुंचे ओर प्रिंसिपल से कहा कि अगर राजपाल अपनी मेहनत से एग्जाम में पास होता तो ठीक है नहीं तो इसे पास नहीं करना । अगर यह पढ़ना चाहते तो ठीक है नहीं तो हम मजदूरी करके इस तरह अपनी कमाई बर्बाद नहीं कर सकते ।
राजपाल यादव ने 5 वीं तक की पढ़ाई कुंद्रा से ही की । इसके बाद एक दो स्कूल और बदले फिर पिता ने राजपाल का एडमिशन शहर के सरदार पटेल स्कूल में करवा दिया। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद उनके पिता राजपाल को पढ़ा लिखा कर बड़ा इंसान बनाना चाहते थे ।
जब राजपाल यादव स्कूल के किसी कंपटीशन में पार्टिसिपेट करते थे तो उनके स्टेज पर जाते ही पैर कांपने लगते थे। ऐसे में एक्टर बनने का कभी ख्याल आया ही नहीं।
राजपाल यादव के स्कूल के टीचर चाहते थे कि वह डॉक्टर बने उनके कहने पर राजपाल ने मन बना लिया था कि आगे चलकर डॉक्टर बनूंगा । लेकिन दसवीं के बाद समझ गए कि मैं डॉक्टर की पढ़ाई नहीं कर पाऊंगा । उन्होंने डॉक्टर बनने के सपने को छोड़ दिया। फिर ऑर्डिनेंस क्लॉथ फैक्ट्री में टेलरिंग अप्रेंटिसेज का कोर्स किया।
परिवार की माली हालत देख राजपाल ने इस कोर्स को करने का फैसला किया था । यह फैक्ट्री रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आती है। यहां पर सैनिकों के लिए कपड़े बनाए जाते थे। हर साल इसमें 30 लोगों का सिलेक्शन होता है। राजपाल यहां के 30 बे बैच के पास आउट छात्र थे ।
अगर एक्टर नहीं बनते तो शायद आज देश के जवानों के लिए कपड़े सिलते । एक तरीके से वो देश की ही सेवा करते ।
उस वक्त ऑर्डिनेंस क्लॉथ फैक्ट्री में रामलीला होती थी इसमें पार्टिसिपेट करने लगे । उनकी एक्टिंग देख लोग इंप्रेस होते। बाद में उनको भी नाटक में काम करने में मजा आने लगा । उनको लगने लगा था कि इस फील्ड में वो बेहतर काम कर पाएंगे ।
इसी सपने को पूरा करने के लिए वो लखनऊ चले गए । यहां उन्होंने भारतेंदु नाट्य एकेडमी में एडमिशन लिया। उसे वक्त उनको श और स बोलने में बड़ी दिक्कत होती थी । वो शाम को साम बोलते थे उन्होंने छोटी-छोटी चीजों पर बहुत मेहनत की ,वे रोज प्रैक्टिस करते थे । अब वे श और स के अंतर को भी जानते है । गलती से भी गलती नहीं करते ।
भारतेंदु नाट्य एकेडमी में पढ़ाई पूरी होने के बाद भी उनको लगा था कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है । सीखने की चाहत में उन्होंने NSD में एडमिशन ले लिया । यहां 3 साल के लिए उनको स्कॉलरशिप भी मिली ओर 1991 यहां से पास हो गए ।
एक इंटरव्यू में वो बताते है कि NSD में हमारे फेयरवेल का समय था इसी में मंजू सिंह आई थी। जो आज भी बड़ी बहन की तरह है। मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि वो एक टीवी शो बना रही है। उन्होंने कहा कि जब भी मुंबई जाऊं तो उनसे जरूर मिलूं ।
फेयरवेल के कुछ दिन बाद पांच दोस्त मुंबई पहुंचे और मंजू सिंह से मिलने चले गए । वो उन दिनों स्वराज सीरियल पर काम कर रही थी ।यह पहली बार था जब उन्होंने कैमरा पेश किया । इससे उनको एक छोटा सा रोल दिया गया । इसके बाद उनको मुंगेरी के भाई नौरंगीलाल शो में काम करने का मौका मिला ।
एक वक्त के बाद उनका मन टीवी शो से भर गया था। उनको बड़े ब्रेक की तलाश थी। इसके लिए बड़े-बड़े डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे । हालात ऐसे हो गए थे कि ऑफिस के वॉचमेन भी राजपाल को पह यूचानने लगे थे । पैसों की कमी थी इसी कारण लंबा सफर भी पैदा ही जाना करना पड़ता था । वे रोज 5-6 लोगों के साथ पृथ्वी थिएटर में बैठते थे ।
उनकी नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अनुराग कश्यप से मुलाकात होती रहती थी । उस समय उनका सीरियल मुंगेरी के भाई नौरंगीलाल सिर्फ डीडी नेटवर्क पर टेलीकास्ट हो रहा था । बहुत लोगों को पता नहीं था कि वो इस शो में काम कर रहे है
उस वक्त रामगोपाल वर्मा के साथ मिलकर अनुराग कश्यप शूल फिल्म की कहानी लिख रहे थे। उस वक्त सत्या फीमेल भी रिलीज हुई थी । जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया । यही कारण था कि वो काम की उम्मीद में रामू जी के ऑफिस के चक्कर काटते थे । यह वह दौर था जब राम गोपाल वर्मा महेश भट्ट जैसे डायरेक्टर न्यू कॉमर्स को अपनी फिल्मों में कास्ट कर रहे थे ।
अनुराग कश्यप ने उनसे कहा कि रामू जी नई फिल्म शूल प्रोड्यूस कर रहे हैं । जिसमें मनोज बाजपेई लीड रोल में दिखेंगे । तुमको भी काम मिल सकता है उसके लिए अपनी फोटो उनके ऑफिस में छोड़ आओ । उनके कहने ओर राजपाल और उनके दोस्त ने अपनी फोटो रामू जी के ऑफिस छोड़ दी ।
अनुराग का आइडिया काम कर गया । शूल में उनको कुली का रोल मिला नवाजुद्दीन सिद्धकी को वेटर का रोल मिला । और बाकी लोगों को भी एक एक लाइन का सीन मिला । इसमें राजपाल के एक सीन से 13 सीन हो गए ।
फिल्म जंगल के डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा थे। उन्होंने फिल्म शुरू में राजपाल का काम देखा था । एक दिन उनके ऑफिस में श्री प्रबल पांडे का कॉल आया ओर उन्होंने रामू से मिलने को कहा । राजपाल ने पूजा की क्यों मिलना है तो वो बोले फिल्म जंगल के लिए मिलना चाहते है यह सुनते ही राजपाल ने मना कर दिया। क्योंकि उन्हें लगता था कि वो इस फिल्म के लिए फिट नहीं है। क्योंकि वो जंगली नहीं दिखते न ही उनकी लंबाई अच्छी है। इसलिए उन्होंने सोचा कि 6 फुट के एक आदमी की जरूरत होगी ।
फिर भी राजपाल मिलने के लिए उनके ऑफिस गए । ओर उसके बाद फिल्म जंगल में उन्हें सिप्पा का रोल मिला । उन्हें इस रोल के लिए बेस्ट एक्टर एन नेगेटिव रोल का अवार्ड मिला । इससे पहले फिल्म शूल के बाद कोई उनको फिल्म ऑर्डर भी नहीं करता था । लेकिन फिल्म जंगल के बाद उन्होंने 1 महीने में 16 फिल्में साइन की ।
राजपाल बताते है कि एक समय ऐसा था जब मैं एक प्रोजेक्ट करने के तुरंत दूसरे प्रोजेक्ट के लिए तैयार हो जाता था। घर जाने तक का वक्त नहीं मिलता था। एयरपोर्ट में पत्नी घर से नए कपड़े भेज दिया करती थी। एक बार वो एक फिल्म की शूटिंग लखनऊ के पास एक गांव में कर रहे थे तो वहां उन्हें टूटे-फूटे घर में रहना पड़ा । जो धूल से भरा हुआ था। जब वो सुबह उठते तो उनकी नाक मे रेत होती थी ।
उनके लिए वहां शूटिंग करना संघर्ष से भरा था। लेकिन उन्होंने कभी किसी बात की शिकायत नहीं कि न ही अपने परिवार को भी इसके बारे में कुछ नहीं बताया । बहुत कम उम्र में ही उन्होंने सिख लिया कि इंसान को हर पल उत्साह से भरा रहना चाहिए । वो अपने आप को बॉलीवुड का सबसे भाग्यशाली एक्टर मानते है । जो पिछले 3 दशकों से काम रहे है ।
उन्हें अपनी हाइट के बारे में कभी भी कमजोर महसूस नहीं किया । क्योंकि उन्हें लगता है कि ये पैदाइश से हो फिक्स होता है । हाइट बढ़ाना ओर कम करना किसी के हाथ में नहीं होता है । वो कम हाइट पर दुख जताना ब अपने समय की बर्बादी मानते है ।
उन्होंने हर जोन की फिल्म में काम किया । नेगेटिव रोल से शुरुआत करके कॉमेडियन बने । लीड एक्टर के तौर पर भी काम किया ।
27 साल के करियर में राजपाल यादव को सिर्फ जंगल के लिए स्क्रीन अवार्ड मिला था। 2006 में फिल्म वक्त के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड में नॉमिनेशन मिला था ।
राजपाल यादव की पहली शादी 1992 में करुणा से हुई थी । पहले बच्चे की जन्म के तुरंत बाद ही करुणा का निधन हो गया था । इसके बाद उन्होंने 2003 में राधा से शादी की। जिनकी दो बेटियां है।
साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्टस प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था ।उनकी ये फिल्म फ्लॉप हुई ओर उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा । समय रहते राजपाल कर्ज की रकम नहीं लौटा सके । लोन लेते समय कंपनी ने जो चेक कंपनी को दिए थे वो बाउंस हो गए । जिसके बाद राजपाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई । Britannia Success Story in Hindi: 25 रुपये से शुरू होकर 1.4 लाख करोड़ की कंपनी बनने तक का सफर
दोनों के बीच समझौते के बाबजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई । समय के साथ ब्याज जुड़ता गया ,जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया था ।
इसके चलते 2018 में दिल्ली की कोर्ट ने राजपाल को दोषी ठहराया ओर राजपाल को 6 महीने की सजा हुई । उसके बाद उन्होंने उच्च अदालत में अपील की ओर उन्हें कई बार राहत मिली । क्योंकि उन्हें समझौते ओर भुगतान का भरोसा दिया था ।
अभी हाल ही में 5 फरवरी 2026 को उसी चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव ने दिल्ली को तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था । सरेंडर से पहले राजपाल ने कहा कि उनके पास पैसे नहीं है ।
इसके बाद सोनू सूद ने इंड्रस्टी से एक जुट होकर राजपाल की मदद को लेकर अपील की । इसके बाद सलमान खान ,अजय देवगन , डेविड धवन जैसे कई लोगों ने राजपाल की आर्थिक मदद की । राजपाल को 16 फरवरी को बेल मिल गई ।
राजपाल यादव : हाइट नहीं, टैलेंट मायने रखता है । संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता है । छोटी शुरुआत ही बड़ी मंजिल तक पहुंचाती है । असफलता अंत नहीं बल्कि नया मोड़ होती है ।
राजपाल यादव की कहानी सिर्फ एक कॉमेडियन की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस इंसान की कहानी है जिसने गरीबी, असफलता और जेल तक का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी।https://en.wikipedia.org/wiki/Rajpal_Yadav
राजपाल की यह कहानी उनके द्वारा भिविन्न इंटरव्यू में दी गई जानकारी के आधार पर है।
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