BSNL success story hindi : कभी बीएसएनएल के पास सैलरी के लिए पैसे नहीं थे । FY2025 में 17 साल बाद पहली बार 262 करोड़ के मुनाफे में आई । 2025 में कंपनी का रेवेन्यू 32427 करोड़ रुपए है ।
BSNL Success story hindi । 2019 में फरवरी के महीने में भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के करीब 1.76 लाख कर्मचारियों को अपनी सैलरी का इंतजार था। आम तौर पर महीने की पहली तारीख को सैलरी मिल जाती थी । लेकिन एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी उनके अकाउंट में पैसा नहीं आए । सरकारी कंपनी बीएसएनएल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था । क्योंकि 2018 में BSNL को 8000 करोड रुपए का घाटा हुआ था।
अनूप श्रीवास्तव जो उस वक्त बीएसएनएल के सीएमडी यानी चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर थे । बे बहुत परेशान थे। एक मीडिया रिपोर्ट में बताते हैं कि उस वक्त कंपनी ki कर्ज में डूब रही थी । हमारे पास नगदी भी कम थी। हम कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए पैसा जुटा रहे थे। इधर अखबारों में खबरें छपने लगी कि कर्मचारियों को 15 दिन बीत जाने के बाद भी सैलरी नहीं मिल रही है ।
उनको डर था कि ये सिलसिला लंबा चलता तो बैंक से कर्ज लेना भी मुश्किल हो जाता। सालों से घाटे में रहने वाली बीएसएनएल 17 साल बाद 2024 – 25 में 262 करोड रुपए का फायदा हुआ। फिलहाल बीएसएनल का रेवेन्यू 32918 करोड़ है। 2026 में भारत में इसके 7 करोड से ज्यादा कस्टमर है।
BSNL success story hindi : भारत में कम्युनिकेशन नेटवर्क की नींव अंग्रेजों ने 19 वीं सदी में रखी थी। 1851 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने टेलीग्राम लाइन की शुरुआत। यह टेलीग्राम लाइन कोलकाता को मुंबई से जोड़ती है । 3 साल बाद यानी 1854 में ब्रिटिश सरकार ने टेलीग्राम को टेकओवर कर लिया। 1881 में इंडियन टेलीग्राम एक्ट बना और अगले साल यानी 1882 में टेलीफोन नेटवर्क की शुरुआत हुई। तब यह केवल कोलकाता ,मुंबई ओर मद्रास यानी चेन्नई जैसे शहरों के लिए था।
1947 में आजादी के बाद टेली कम्युनिकेशन सर्विसेज भारत सरकार के पास आ गई। 1951 में डिपार्टमेंट पोस्ट्स एंड टेलीग्राम की शुरुआत हुई। यानी डाक और टेलीफोन दोनों सर्विस एक ही डिपार्टमेंट देखा था। 1986 में टेलीकम्युनिकेशन को एक अलग डिपार्टमेंट बना दिया गया ।
BSNL की शुरुआत 1 अक्टूबर 2000 में अटल बिहारी बाजपेई ने की थी । यह एक सरकारी कंपनी है । उस वक्त देश में एनडीए की सरकार थी । अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री थे । सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट को एक सरकारी कंपनी के रूप में बदलने का फैसला किया । नाम रखा गया भारत संचार नगर लिमिटेड ( BSNL) इसमें सरकार की हिस्सेदारी 100% रखी गई।
यह वह समय था जब देश में कुछ प्राइवेट कंपनी मोबाइल सर्विसेज शुरू कर चुकी थी । लेकिन इनका इस्तेमाल गिने चुने लोग ही कर पा रहे थे। तब आउटगोइंग कॉल्स के लिए प्रति मिनट 16 रुपए और इनकमिंग कॉल्स के लिए हर मिनट 8 रुपए देने पड़ते थे।
2002 में बीएसएनएल ने मोबाइल सर्विस लांच किया। आउटगोइंग कॉल्स के लिए 1.5 रुपए प्रति मिनट ओर इनकमिंग कॉल्स फ्री की । प्राइवेट कंपनियों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं था। लोगों में बीएसएनएल सिम खरीदने के लिए होड़ लग गई । बीएसएनल सिम के लिए सिफारिश की जरूरत करनी पड़ी थी। लेकिन फिर वह वह दौर आया जब यह सरकारी कंपनी घाटे में जाने लगी ।
सरकार पर घोटाले के आरोप। प्राइवेट रेट पर शेयर खरीद घाटे में आई कंपनी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2006 में भारत में करीब 24 करोड़ मोबाइल कनेक्शन बीएसएनएल के थे और मार्केट शेयर 22% था । कंपनी ने 93 मिलियन लाइंस क्षमता बढ़ाने के लिए टेंडर निकाला ,लेकिन किसी न किसी कारण से उसे अमल में लाने में महीना लग गए। इसी बीच सरकार पर 2G घोटाले जैसे भ्रष्टाचार के आरोप लगे। कंपनी के मार्केट शेयर में गिरावट आई ओर प्राइवेट कंपनी आगे निकल गई।
2010 में 3G स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई । सरकारी कंपनी होने के चलते बीएसएनएल ने हिस्सा नहीं लिया । जिस दाम पर निजी कंपनियों ने नीलामी में स्पेक्ट्रम खरीदे। बीएसएनल से कहा गया था कि वह भी दाम दे । बीएसएनल ने इस नीलामी में करीब 18000 करोड रुपए खर्च किए थे। जिससे उसका खजाना खाली हो गया ।
इसका फायदा प्राइवेट कंपनी को मिला। एयरटेल ने भारत में बाजार के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। वोडाफोन और आइडिया जैसी कंपनी ने अपनी धाक जमानी शुरू कर दी। वायर लाइन सर्विस ,वाई-फाई ,2G, 3G ओर 4G की सर्विस के साथ प्राइवेट कंपनियों बीएसएनएल से काफी आगे निकल गई। 2017 में 13 करोड़ यूजर के साथ जियो भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई। 2018-19 में बीएसएनल को करीब 14000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। कंपनी को पिछले साल के मुकाबले करीब 19000 करोड़ कम रेवेन्यू मिला था ।
साल 2000 में बीएसएनएल के अधिकारी निजी ऑपरेटरों को चुनौती देने के लिए जल्द से जल्द मोबाइल सर्विस शुरू करना चाहते थे । लेकिन उन्हें जरूरी सरकारी सहमति नहीं मिली।
2006 -12 के बीच में जहां बीएसएनएल की क्षमता में मामूली मुनाफा हुआ, वही प्राइवेट ऑपरेटर कहीं ज्यादा आगे निकल गए । लोगों ने नेटवर्क कनेक्शन और समस्या के कारण बीएसएनल छोड़ प्राइवेट कंपनियों की ओर रुख किया ।
साल 2010 में जब 3G स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई तो सरकारी कंपनी होने के कारण बीएसएनल ने हिस्सा भी लिया। बाद में बीएसएनल को उसी दाम पर स्पेक्ट्रम मिले जिस स्थान पर निजी कंपनियों को मिले थे ।Repido success story in hindi : कैसे एक जीरो स्टार्टअप बना इंडिया का बाइक टैक्सी किंग
बीएसएनल को बाय मैक्स तकनीक पर आधारित ब्रांड बैंड वायरलेस एक्सेस यानी BWA स्पेक्ट्रम के लिए भी भारी रकम देनी पड़ी । इसका सीधा असर BSNL की आर्थिक स्थिति पर पड़ा ।
देश में मोबाइल क्रांति जोर पकड़ने के साथी लैंडलाइन कनेक्शन में तेजी से गिरावट हुई । 2006 07 में बीएसएनएल के 3. 8 करोड़ लैंडलाइन ग्राहक थे ।जो 2014-15 में घटकर 1.6 करोड़ रह गए।
4G स्पेक्ट्रम की नीलामी से भी बीएसएनल को बाहर रखा गया। इस देरी के कारण प्राइवेट कंपनियां 5G रोलआउट कर चुकी है। लेकिन बीएसएनएल 4G पर ही अटक कर रह गईं।https://en.wikipedia.org/wiki/BSNL
देशभर में आज जिओ के कस्टमर्स की संख्या सबसे जायदा है जिनमें जिओ – 40 % शेयर मार्केट के साथ टॉप लीडर है । वही एयरटेल 33.40 % ,वोडाफोन – 18.9% ,BSNL- 7.17% शेयर के साथ मार्केट में मौजूद है ।
आज BSNL स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके देश भर में अपना 4G नेटवर्क फैला रहा है। 5G सेवाओं की टेस्टिंग भी शुरू हो चुकी है और जल्द ही 5G सर्विस लॉन्च करने की तैयारी में है ।
BSNL अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए देश भर में लगभग 60,000 नए मोबाइल टावर लगा रही है। इसके साथ ही कंपनी ने अक्टूबर 2024 में अपनी नई पहचान के साथ नया लोगो ओर स्लोगन भी जारी किया था । आज भी BSNL दूसरी कंपनियों के बजाय सबसे सस्ता प्लान दे रही रही है।
सबसे सस्ता प्लान BSNL का
Airtel – 199- 28 दिन,1 GB/दिन ।
239 – 28 दिन,1.5GB/दिन
299- 28 दिन,
719 – 84 दिन
Jio – 209- 28 दिन,1GB/दिन
239-28 दिन,1.5GB/दिन
299- 28 दिन 2GB/दिन
666- 84 दिन 1.5GB/दिन
Vodafone – 199- 28 दिन 1GB/दिन
239-28 दिन,1.5GB/दिन
299-28 दिन 2GB/दिन
719-84 दिन1.5GB/दिन
BSNL -147 – 30 din,10 GB/day
199- 30 दिन,2GB/day
397- 150 दिन 2GB/ day
666 – 105 दिन 2G/ day
BSNL Success story hindi हमें सिखाती है कि कोई भी बड़ी कंपनी फेल हो सकती है। इसलिए सही समय पर फैसले बहुत जरूरी होते हैं। आज टेक्नोलॉजी की दुनिया में पीछे रहन बड़ा नुकसान दे सकता है ।
BSNL: “अगर इरादा मजबूत हो तो सबसे खराब हालात से भी वापसी की जा सकती है।”कभी सैलरी देने के लिए पैसे नहीं थे,लेकिन आज BSNL फिर से भारतीय टेलीकॉम में अपनी पहचान बना रहा है।
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