भारत में ई-कॉमर्स की दुनिया में आज कई बड़े नाम मौजूद हैं, जैसे Amazon और Flipkart। लेकिन इन दिग्गज कंपनियों के बीच एक भारतीय स्टार्टअप ने अपनी अलग पहचान बनाई जिनका नाम है Meesho ।
कभी जिस कंपनी का मज़ाक उड़ाया जाता था, आज वही कंपनी आज भारत की पहली मुनाफा कमाने वाली हॉरिज़ॉन्टल ई-कॉमर्स कंपनी बन चुकी है।
आज मीशो के 50 करोड़ से ज्यादा ऐप डाउनलोड, 11 लाख से अधिक सेलर्स और 5000 करोड़ रुपये से अधिक का रेवेन्यू है
जब 2017 में सबसे सस्ता सामान बेचने का दावा करने वाली मीशो पर मीम्स बन रहे थे। सबसे सस्ता होने की वजह से कई बार मजाक भी उड़ाया गया। लेकिन इसी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके मीशो ने सबसे सस्ते को अपना यूएसपी बना लिया । आज मीशो देश की टॉप होरिजेंटल ई कॉमर्स कंपनियों में शामिल है । हालांकि 48 % हिस्सेदारी के साथ फ्लिपकार्ट मार्केट लीडर है। लेकिन देश की हिरोजोंटन ई-कॉमर्स कंपनी ने मुनाफा कमाने वाली मीशो पहली कंपनी है ।
2021 में 1 अरब डॉलर की वैल्यूएशन हासिल करने यह कंपनी यूनिकॉर्न बनी ।
मीशो की शुरुआत 2015 में विदित आत्रे और संजीव बरनवाल ने की थी। Meesho के को फाउंडर विदित मात्रे आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद आईटीसी में अच्छे पैकेज पर नौकरी लग गए।जॉब के दौरान उन्होंने खुद का बिजनेस करने का फैसला किया। उन्होंने अपने दोस्त संजीव बरनवाल के साथ मिलकर कंपनी बनाने की प्लानिंग की ।
विदित आत्रे और संजीव बरनवाल ने नौकरी छोड़कर 2015 में फैशनियर एप बनाया । शुरुआती दौर में इसका ट्रायल बेंगलुरु में किया था। इस ऐप की मदद से लोग नजदीकी दुकानों से खरीदारी कर सकते थे।
साल 2015 में अक्टूबर के महीने में विदित आत्रे ओर संजीव बरनवाल एक कपड़े की दुकान के बाहर खड़े थे । जैसे ही एक कस्टमर उस दुकान में दाखिल होने लगा उन्होंने उसे रोककर कहा प्लीज यहां मत आइए। दोनों ने अपनी जेब से पर्ची निकाली और कस्टमर को देते हुए कहा यहां से सामान मत खरीदिए आप हमारे ऐप पर जाइए वहां पर आपको यह दुकान भी मिल जाएगी। साथ ही आप दूसरे फैशन प्रोडक्ट भी खरीद सकते हैं । इस तरह से प्रचार करने के बावजूद भी उनके फैशनियर एप पर यूजर्स नहीं आ रहे थे ।
फैशनियर के ट्रायल के दौरान ही उन्होंने गौर किया कि दुकानदार ओर यहां तक की गृहणियां भी सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप ओर फेसबुक के जरिए बिजनेस कर रही है। विदित और संजीव को इससे आइडिया आया उन्होंने मीशो यानी माय शॉप की नए सिरे से शुरुआत की।
पहले यह महज रीसेलर्स प्लेटफार्म या सोशल ई-कॉमर्स की तरह बिजनेस करता था । मतलब लोग अपने सोशल मीडिया अकाउंट से मीशो के प्रोडक्ट बेचते थे । उसके बदले उन्हें कुछ कमीशन मिलता था । यहां कंपनी ने मार्केट गैप को समझा ।
2015 में जब बिजनेस शुरू किया तब अमेजॉन को भारत आए केवल दो साल हुए थे, जबकि फ्लिपकार्ट लंबे समय से बिजनेस कर रही थी। लेकिन दोनों कंपनियों का फोकस इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले देश की शहरी आबादी थी । मीशो को को एक गैर ओर मौका नजर आया।
ने सोशल मीडिया पर मौजूद लेकिन इंटरनेट पर खरीदारी से डरने वाले लोग छोटे शहर की आबादी को ऑफलाइन से ऑनलाइन शॉपिंग के लिए मोटिवेट किया। कंपनी का मेन टारगेट छोटे शहर की महिला उद्यमियों को बढ़ावा देना था। यहीं से Meesho की सफलता की शुरुआत हुई ।
एक रिपोर्ट के मुताबिक यूजर बेस में meesho ने देश की बाकी ई कॉमर्स कंपनी को पीछे छोड़ दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2023 में जब फ्लिपकार्ट का यूजर बेस 21% बढ़ा । जबकि meeaho का यूज़रबेस में 32% का हिज़ाफा हुआ जबकि अमेजॉन पर 13% की बढ़ोतरी हुई।
डाटा एआई कंपनी के मुताबिक 2023 में 14.5 करोड़ डाउनलोड के साथ meesho देश का नंबर वन एप बन गया। फाइनेंशियल ईयर 2023 -24 की पहली छमाही में इसके 50 करोड़ ऐप डाउनलोड हुए । जिससे Meesho के ऑर्डर वैल्यू में भी 43% का इजाफा हुआ।
फ्लिपकार्ट अमेजॉन जैसी कंपनी सेलर्स के प्रोडक्ट के हिसाब से कमीशन लेती है। लेकिन Meesho ने शुरुआत से ही जीरो कमीशन की रणनीति अपनाई। इससे सेलर्स कम कीमत पर प्रोडक्ट बेच पाते थे । इस रणनीति से सेलर्स ओर कस्टमर के बीच meesho को पॉपुलर बनाया ।
मीशो 2023 में मुनाफा कमाने वाली देश की पहली हॉरिजॉन्टल ई कॉमर्स कंपनी बनी थी। इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी कमाई में कंपनी को 5 मिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ था। हालांकि लास्ट में कंपनी को घाटा भी हुआ था।
2016 से 2020 तक Meesho की ग्रोथ में रीसेलर्स का अच्छा खासा योगदान था। हालांकि 2020 के लास्ट यह मॉडल बंद कर दिया गया। अब meesho पूरी तरह से डायरेक्ट टू कंज्यूमर कंपनी बन गई है। कंपनी की कमाई का मेन सोर्स विज्ञापन है । इसमें सेलर्स अपने प्रोडक्ट को ऊपर फीचर करने के लिए meesho का एड देते थे ।
मीशो ने 2024 में 22 करोड़ रुपए की फंडिंग हासिल की । Meesho के नाम अब तक 1.36 अरब डॉलर (11000 करोड़) की फंडिंग हो चुकी है । इसके इन्वेस्टर्स में सॉफ्ट बैंक, एलिवेशन कैपिटल ओर एक्सवी पार्टनर है ।
10 दिसंबर 2025 को कंपनी का आईपीओ भी लॉन्च हुआ था ।
मीशो के सीईओ विदित मात्रे का मानना है कि टारगेट और बिजनेस के विज़न में ताल मेल होना चाहिए। बिजनेस पार्टनर ऐसा चुने जो आपके विजन को समझें और उसकी सराहना करें। आपकी बिजनेस जर्नी में सच्चा साथ देने और समझने वाला पार्टनर पेशेंस से ही मिलता है। मार्केट की डिमांड को समझकर कस्टमर से जुड़ाव रखकर और अपने काम को लगातार बेहतर बना कर भरोसा पैदा किया जा सकता है ।
आज 11 लाख से ज्यादा सेलर्स Meesho के साथ जुड़े हैं ।आज 700 से ज्यादा कैटिगरी के प्रोडक्ट meesho पर उपलब्ध है। 32 करोड रुपए कंपनी का वैल्यूएशन है । 2023 में 14.5 करोड़ एप डाउनलोड हुए थे ।
2015 में विदित आत्रे ओर संजीव बरनवाल ने अपना पहला स्टार्टअप फैशनियर एप फेल होने के बाद ऑफलाइन रिटेलर कंपनी Meesho की नींव रखी थी।
2016 में Meesho को बाई कांबिनेटर के समर प्रोग्राम के लिए चुना गया। जिससे कंपनी ने 1 करोड़ की फांदी जी हासिल की ।
2017 में कंपनी ने सेलर्स को लॉजिस्टिक पेमेंट और बिजनेस सेटअप करने के लिए अलग-अलग टूल्स का एक्सेस दिया।
2018 में कंपनी ने 18 करोड़ की फंडिंग हासिल की ।
2019 में फेसबुक से करीब 200 करोड रुपए की इन्वेस्टमेंट हासिल करने वाली देश की पहली स्टार्टअप कंपनी बनी।
2020 में Meesho ने वर्ल्ड की 50 मोस्ट इन्नोवेटिव कंपनी में जगह बनाई। कंपनी ने लॉकडाउन के समय डिलीवरी के लिए Meesho मंडी लॉन्च की।
2021 में कंपनी एक अरब डॉलर की वैल्यूएशन हासिल कर यूनिकॉर्न बनी।
2022 में Meesho ने 10 करोड़ मंथली ऑर्डर के आंकड़ों को पार किया ।
Meesho की कहानी सिर्फ एक कंपनी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की ताकत का उदाहरण है।राजपाल यादव : गांव की गलियों से बॉलीवुड तक का सफर
दो दोस्तों ने एक असफल स्टार्टअप से सीख लेकर एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जिसने लाखों लोगों को रोजगार और करोड़ों लोगों को सस्ती ऑनलाइन शॉपिंग का विकल्प दिया।https://en.wikipedia.org/wiki/Meesho
आज Meesho न सिर्फ भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक है, बल्कि यह साबित करता है कि सही रणनीति, धैर्य और ग्राहक की जरूरत समझकर कोई भी स्टार्टअप बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। Thanks
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