Britannia Success Story in Hindi: ब्रिटानिया बिस्किट कंपनी भारत की पहली बिस्कुट ब्रांड है। 1892 में 295 रुपये से शुरू होकर आज 1.4 लाख करोड़ मार्केट कैप वाली कंपनी बन गई है।
भारत देश में बिस्किट का मार्केट करीब 40000 करोड रुपए का है। जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ब्रिटानिया की है। आज भी ब्रिटानिया कंपनी सेल्स वैल्यू के हिसाब से बिस्किट कैटेगरी में मार्केट लीडर बानी हुई है ।
Britannia Success Story in Hindi: साल 1892 में ब्रिटिश व्यवसायियों के एक ग्रुप ने कलकत्ता में केवल 295 रुपए की लागत से बिस्किट बनाने का एक छोटा सा काम शुरू किया। उस बजट घर के एक कमरे में बिस्किट बनते थे। 1897 में गुप्ता ब्रदर्स ने इस एंटरप्राइज को खरीद लिया । जिनमें नलिन चंद्र गुप्ता प्रमुख थे । वह इसे बीएस ब्रदर के नाम से चलने लगे।
जब 1910 में जब इलेक्ट्रिसिटी आई तो कंपनी ने मशीन से बिस्कुट बनाने शुरू किए । कंपनी की पहुंच बड़ी तो 1918 में सीएच होम्स नाम के अंग्रेज इसमें पार्टनर बन गए और पहली बार कंपनी को नाम दिया “ब्रिटानिया बिस्किट कंपनी लिमिटेड”।
Britannia Success Story in Hindi: वक्त के साथ इस कंपनी के कई मालिक बदले लेकिन इस बदलाब से बिस्किट प्रोडक्शन पर कोई नकारात्मक असर नहीं हुआ। मौजूदा समय में ब्रिटानिया कंपनी की कमान बढ़िया ग्रुप के पास है । नुस्ली वाडिया इसके अध्यक्ष है।
आज के समय में ब्रिटानिया की बागडोर नुस्ली वाडिया ओर वाडिया ग्रुप के पास है । नुस्ली वाडिया मोहब्बत अली जिन्ना के नाती है । क्योंकि नुस्ली वाडिया के पिताजी नेविल वाडिया ने मोहब्बत अली जिन्ना की बेटी दीना जिन्ना से शादी की थी ।
जिन्ना अपनी बेटी दीना जिन्ना के इस फैसले के सख्त खिलाफ थे। वह नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी किसी गैर मुस्लिम से शादी करें । लेकिन दीना जिन्ना अपने फैसले पर अड़ी रही । जिन्ना की पत्नी रतनबाई भी पारसी थी उन्होंने भी धर्म बदलकर जिन्ना से निकाह किया था।
ब्रिटानिया के कारोबार ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद रफ्तार पकड़ी थी । ब्रिटानिया ने प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए 1921 में इंडस्ट्रियल गैस ओवेंस का आयात करना शुरू किया । इसके बाद 1924 में मुंबई में पहली फैक्ट्री सेटअप हुई । सब सही चल रहा था तभी इस बीच दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया । इस दौरान कई कंपनी बंद हो गई । वही कुछ कंपनियों को फायदा भी हुआ ,ब्रिटानिया उनमें में से एक थी ।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटानिया को उस वक्त का सबसे बड़ा ऑर्डर मिला। इस आर्डर ने कंपनी की सालाना बिक्री को 1.36 करोड़ पर पहुंचा दिया । इसके बाद कंपनी ने कहीं नए प्रयोग किए । 1994 में ब्रिटानिया ने भारत में हाई क्वालिटी वाली स्लाइड और रेपिड ब्रेड पेश की । यह ब्रिटानिया की मजबूत पहचान बनी ।
ब्रिटानिया की ब्रेड मार्केट में खूब चली । इसी की सफलता के बाद 1963 में ब्रिटानिया केक मार्केट में आया । ओर यह प्रोडक्ट भी मार्केट में छा गया । 3 अक्टूबर 1979 को कंपनी का नाम ब्रिटानिया बिस्कुट कंपनी लिमिटेड से बदलकर” ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड “हो गया। नाम बदलने के बाद कंपनी के प्रोडक्ट्स की खूब बिक्री हुई । साल 1983 में कंपनी ने 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर लिया । इसके बाद 1987 में ब्रिटानिया का फेमस “गुड डे ब्रांड “लॉन्च हुआ ।
ब्रिटानिया ने यूएन के वर्ल्ड प्रोग्राम के लिए साल 2000 की शुरुआत में ग्लूकोस बिस्किट बनाना शुरू किया। 11 साल में 32000 टन से ज्यादा बिस्किट की आपूर्ति की गई । इससे हर साल कंपनी की ग्रोथ बड़ी और साल 2000 मे फोर्ब्स ग्लोबल की 300 कंपनियों की लिस्ट में ब्रिटानिया को शामिल किया गया। जिससे 2004 में कंपनी को सुपर ब्रांड का दर्जा मिला।
2020 में देश में कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा इस दौरान ब्रिटानिया के MD वरुण बैरी बिक्री बढ़ाने के लिए 80:20 का नया फार्मूला लाए । कंपनी की 95% सेल्स बिस्किट,बेकरी ,ओर डेयरी प्रोडक्ट से आ रही थी ।
इसमें स्पष्ट था कि 20% सेल्स लाने वाले प्रोडक्ट जैसे गुड डे ,मिल्क बुकीज ,मेरी गोल्ड ,न्यूट्री चॉइस ,को प्राथमिकता दी जाए। इससे कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा । ओर नवंबर 2022 में ही ब्रिटानिया एक ट्रिलियन रुपए वाली कंपनी बन गई।
134 साल के इस सफर में ब्रिटानिया के स्वामित्व और नियंत्रण को लेकर काफी खींचातानी चलती रही । शुरुआती गुप्ता ब्रदर से हुई,लेकिन 1978 ब्रिटानिया का पब्लिश इश्यू आया । 1990 के दशक की शुरुआत में नुस्ली वाडिया की एंट्री हुई । उन्होंने धीरे-धीरे कंपनी में हिस्सेदारी लेना शुरू किया । 2009 में पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया ।
1892 में स्थापना
1987 में ब्रिटानिया का गुड डे ब्रांड लॉन्च हुआ ।
1993 में लिटिल हार्टेज और 50-50 बिस्किट आए।
1997 में डेयरी प्रॉडक्ट्स ने मार्केट में भी एंट्री ली ।
2000 में फोर्ब्स ग्लोबल की 300 कंपनियों की लिस्ट में शामिल हुई।
2004 में सुपर ब्रांड का दर्जा मिला । आज के समय में ब्रिटानिया के चेयरमैन नुस्ली वाडिया है। आज ब्रिटानिया का मार्केट 80 देशों तक फैला हुआ है। अकेले भारत में इसकी 13 फैक्ट्रियां हैं। 2025 में कंपनी ने कंपनी ने 17000 करोड़ का रिवेन किया है । आज इसका मार्केट कैप 1.4 लाख करोड रुपए से भी ऊपर है।https://en.wikipedia.org/wiki/Britannia_Industries
Britannia Success Story in Hindi: हमे सिखाती है शुरुआत हमेशा छोटे से ही करनी चाहिए । सही समय पर अपनी रणनीति बदलो । लंबे समय का बिजन रखो । एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।Sunil Grover : Biography hindi। 500 रुपए महीने कमाने बाला कैसे बना सुपरस्टार
एक छोटे कमरे से शुरू होकर आज यह कंपनी भारत ही नहीं बल्कि 80 देशों में अपनी पहचान बना चुकी है। ऐसी ही सक्सेस स्टोरी के लिए SafltakiKahani के साथ जुड़े रहे । थैंक्स..
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