10 महीने जेल में रहे थे Navjot singh sidhu । स्कूल में छुट्टी शब्द तक नहीं बोल पाते थे लेकिन आज रियलिटी शो के मशहूर जज ओर कॉमेंटेटर है ।
क्रिकेट की पिच पर जुनून ,राजनीति की गलियों में संघर्ष और टीवी की दुनिया में गूंज। नवजोत सिंह सिद्धू की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक बल्लेबाज ,नेता, टीवी स्टार और प्यार में डूबा जीवनसाथी ।
सिद्धू ने हर मोड़ पर अपनी अलग पहचान बनाई लेकिन एक समय ऐसा भी था ,जब उनके अंदर संवाद की कमजोरी थी । बे लोगो से बातचीत में थोड़े शर्मीले थे, यहां तक के स्कूल में छुट्टी शब्द तक नहीं बोल पाते थे। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सिद्धू ने कमेंट्री की ओर रुक किया।
उनकी कमेंट्री बेहद जोशीली ओर मनोरंजन होती है । जिसके कारण वे कमेंट्री बॉक्स में सिक्सर सिद्धू और कमेंट्री बॉक्स के सरदार के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनकी प्रेरक बातें और बन लाइनर लोगों के दिलों तक पहुंचने लगी । जिससे उनका व्यक्तित्व और प्रभाव पड़ा।
Navjot Singh Sidhu का जन्म 20 अक्टूबर 1963 को पटियाला ,पंजाब में हुआ था। उनको बचपन से ही क्रिकेट के प्रति जुनून था । उनके पिता भगवंत सिंह खुद एक मशहूर क्रिकेटर थे। जिनसे सिद्धू ने क्रिकेट का पहला पाठ सिखा था। सिद्धू ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटियाला के यादवेंद्र स्कूल में से की थी।
पढ़ाई के साथ-साथ उनका मन हमेशा क्रिकेट के मैदान में रहता था। कॉलेज पहुंचने तक सिद्धू की पहचान एक होनहार बल्लेबाज के रूप में हो चुकी थी । आगे चलकर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाकर देश का नाम रोशन किया।
सिद्धू की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है कॉलेज के दिनों में नवजोत कौर से पहली नजर में प्यार करने लगे थे । वे घंटों कॉलेज के बाहर धूप में सिर्फ उन्हें देखने के लिए खड़े रहते थे।
नवजोत कौर उस समय MBBS की पढ़ाई कर रही थी। दोनों के बीच धीरे धीरे दोस्ती हुई और वक्त के साथ रिश्ता गहरा चला गया। लंबे इंतजार और समर्पण के बाद से सिद्धू ने उन्हें प्रपोज किया । शादी से पहले से दोनों ने जन्मपत्री मिलवाई ओर जब 36 में से पूरी 36 गुण मिले तो उन्होंने शादी कर ली।
शादी के बाद सिद्धू ओर नवजोत कौर दो बच्चे बेटे करण और बेटी राबिया के माता-पिता बने । नवजोत कौर राजनीति और समाज सेवा में सक्रिय रही। अमृतसर में विधायक बनकर उन्हें जनता की सेवा की। लेकिन जीवन में एक ऐसा वक्त आया जब नवजोत को कैंसर ने घेर लिया।
उस कठिन समय में सिद्धू ने हर पल उनका साथ निभाया। साल 2023 में नवजोत कौन ने कैंसर को मात दी । इस दौरान से सिद्धू ने सोशल मीडिया अपनी पत्नी के लिए भावुक संदेश लिखें -” तुम्हारे बिना जीना नहीं आता नोनी ” यह संदेश उनके प्रेम और साथ निभाने के वादे की मिसाल बन गया।
1983 वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय टेस्ट टीम से शुरुआत करने वाले सिद्धू का कैरियर कहीं उतार चढ़ाव से गुजरा। शुरू में उन्हें तकनीकी कमजोरी के लिए आलोचना मिली, लेकिन 1987 में विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने लगातार छक्के मार कर” सिक्सर सिद्धू” का दर्जा पा लिया। इसके नाम 51 टेस्ट और 136 वनडे हैं जिसमें कहीं यादगार पारी शामिल है । 1999 अचानक क्रिकेट संन्यास लेने के बाद उन्होंने कई बार टीम के चयनकर्ताओं और मैनेजमेंट से मतभेद का खुलासा किया । यह चुनौतियां उन्हें राजनीति और टीवी के सफर पर ले गई।
2004 में बीजेपी के टिकट से अमृतसर से सांसद बने । संसद में शेरो शायरी और भाषण से उनको अलग पहचान मिली। 2016 में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए । 2017 में पंजाब सरकार में मंत्री बने । पार्टी के भीतर मतभेदों ने भी कई बार सुर्खियां बटोरी ।
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद टीवी पर कमेंटेटर के तौर पर नई पारी शुरू हुई । उनके वन लाइनर्स, जोश और हिंदी शायरी दर्शकों को भाग गई। द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज ओर कॉमेडी नाइट विद कपिल शर्मा में उनकी मौजूदगी ने शो को एक अलग पहचान दिलाई। कपिल शर्मा शो में उनकी शायरी लोगों की लोकप्रिय थी।
कपिल शर्मा शो से निकाले गए थे
2019 में पुलवामा हमले के बाद सिद्धू के बयान को लेकर विवाद हुआ। जनता के दबाव में उन्होंने शो से निकालना पड़ा । उनकी कुर्सी पर अर्चना पूरन सिंह आई । जिन्होंने सिद्धू की जगह ली और आज तक शो की जज बनी हुई है। सिद्धू के लिए यह बड़ा झटका था । टेलीविजन की दुनिया में वापसी में सिद्धू ने जज के रूप में ” इंडिया गॉट टैलेंट “से की थी। शो के दौरान उन्हें संघर्ष को याद करते हुए कहा था कि “गिरना जरूरी है तभी उठना आता है ।
कमेंट्री का सबसे बड़ा सुरूर यह है कि अगर मुझे एक घंटा बोलना हो तो मैं 1 मिनट भी तैयारी नहीं करता ,लेकिन आधे घंटे के लिए 10 मिनट और 3 मिनट के लिए पूरा 1 घंटा तैयारी करता हूं । सही शब्द चुनना और कम शब्दों में बात को साफ कहना ही कमेंट्री की ताकत है । कई बार एक लाइन पूरी कहानी बयां कर देती है ।
यह हुनर किताबों से नहीं आता ,यह तब आता है जब आप खुद को समझते हैं। जैसे सागर मंथन से अमृत निकलता है ,वैसे ही ध्यान और अभ्यास से भीतर की शक्ति जागती है। जो कुछ ब्रह्मांड में है वह हमारे भीतर भी है । लोग बाहर भटकते हैं ,जबकि असली जवाब भीतर छुपा हुआ है – कैसे कस्तूरी मृग अपनी नाभि की खुशबू के लिए जंगल में फिरता है।
36 साल क्रिकेट खेलने के बाद मैने अपने खान-पान को अनुशासित किया ,मन को गुलाम बनाने वाली आदतों को चैनलाइज किया और जोगी बन गया। इंद्रिय बहुत प्रबल है लोग दिखावे में खोए रहते हैं ,लेकिन मैं भीतर उतरता हूं । असली ताकत हर इंसान के भीतर है बस ढूंढनी पड़ती है । पहले मन उलझन और नकारात्मक सोच से फंसा था।
स्वामी विवेकानंद को पढ़कर समझ आया की असली सुख भीतर है। वही लड़का जो स्कूल के सामने छुट्टी तब तक नहीं बोल पाता था ,आज लाखों लोगों के सामने बोलता है। मन शांत हो तो जिंदगी सुंदर दिखती है । झील का पानी स्थिर हो तो चांद की परछाई साफ दिखती है । वही हाल मन है जिंदगी जल्दबाजी से नहीं मिलती, शांति में देनी पड़ती है।
सिद्धू का मानना है कि असली Navjot Singh Sidhu को बहुत कम लोग जानते हैं लोग बाहर से मुझे वन लाइनर शायरी और एंटरटेनमेंट के लिए पहचानते है ,लेकिन भीतर की शांति और गहराई को बहुत कम लोग देखते हैं । योगी अंदर से जागरूक ओर संतुलित होता है ।
3 महीने नाड़ी शोधन करे तो शरीर हल्का हो जाता है ,चेहरा चमकने लगेगा और मन शांत रहेगा । सबसे बड़ी मेरी सबसे बड़ी ताकत है संगत ,संगत का असर सबसे गहरा होता है जैसे लकड़ी में लोहे की कील डाल दो तो लंबे समय तक तैरेगी वैसे ही सही संगत जीवन को ऊंचा उठाती है।
दुनिया में सबसे बड़ा डर सफलता का है। डर दूर करना है तो पल में जीना सीखो । कल का पछतावा और कल की चिंता आज का मौका छीन लेते हैं। राहुल द्रविड़ ने कहा था” एक गेंद पर ध्यान दो पूरी पारी पर नहीं”
Navjot Singh Sidhu को 1988 में एक विवादित रोड रेंज कैसे में सुप्रीम कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई थी । इस गंभीर मामले में 27 दिसंबर 1988 को पटियाला में उनकी कार पार्किंग को लेकर 65 वर्षीय गुरनाम सिंह से कहां- सुनी हुई थी । जो बाद में हाथापाई पर बदल गई। सिद्धू ने गुरनाम सिंह को घुटना मार कर गिरा दिया। गुरनाम सिंह को अस्पताल में ले जाया गया ,जहां उनकी मौत हो गई ।
रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी मौत दिल का दौरा पढ़ने से हुई थी । इस घटना को लेकर सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह सिद्धू के खिलाफ गैर इरादात हत्या का मामला दर्ज हुआ । मामला कोर्ट के कहीं स्तरों से गुजरा। शुरू में सेशन कोर्ट ने सिद्धू को बरी कर दिया, लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने उन्हें 6 साल की सजा सुनाई और जुर्माना लगाया । इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई ।
सुप्रीम कोर्ट ने कई बार इस केश की सुनवाई की ओर 2018 में हत्या के आरोप में सिद्धू को बरी कर दिया। लेकिन चोट पहुंचाने के मामले दोषी ठहराया गया और 1000 का जुर्माना लगाया गया । इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में 1 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई।
सजा सुनने के बाद Navjot singh Sidhu ने अदालत में आत्म समर्पण किया ओर पटियाला केंद्रीय जेल में बंद रहे । हालांकि उनके अच्छे व्यवहार के चलते उन्हें निर्धारित 1 साल की सजा से पहले करीब 10 महीने बाद जेल से रिहा कर दिया । जेल से बाहर निकलते ही उन्होंने सरकार पर लोकतंत्र की स्थितियों को लेकर तीखा हमला बोला।
Navjot singh sidhu : जो अपने मन को बस में कर ले, वही सबसे बड़ा है। सिकंदर ने डर से लोगों को दबाया ,लेकिन असली विजेता वह है जो मन जीत ले।
Navjot Singh Sidhu: मोटिवेशनल क्विट्ज
मुश्किल बच्चों की तरह होती है ,जितना पालोगे उतनी ही बड़ी होती जाएगी।
सफलता के रास्ते पर कोई बिना एक -दो पंचर के नहीं चलता।
जब आप एक राक्षस के साथ डिनर कर रहे हैं ,तो आपके पास लंबा चम्मच होना चाहिए ।
आंकड़े मिनि स्कर्ट की तरह होते हैं जितना भी ढाकले कुछ छिपता नहीं है ।
विकेट पत्नियों की तरह होते हैं आप कभी नहीं जानते कि उनसे क्या उम्मीद की जाए।
जो नंगा आदमी अपनी शर्ट दे उससे खबरदार रहना।
एक पिच पत्नी की तरह होती है ,आप कभी नहीं जानते कि इसका क्या परिणाम होगा । LG Success story in hindi: क्रीम, टूथपेस्ट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का सफर ।
Navjot Singh Sidhu की प्रेरणादायक कहानी – क्रिकेट, राजनीति, जेल, पत्नी का कैंसर और टीवी करियर तक का सफर। जानिए कैसे एक शर्मीला लड़का बना भारत का मशहूर कमेंटेटर और नेता।
2007 में इंडियन द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज जज बने थे। 2012 में बिग बॉस 6 के प्रतिभागी।
2013 से 2016 में कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में परमानेंट गेस्ट ।
2004 में मुझसे शादी करोगी( क्रिकेट मैच के दौरान कमेंटेटर के रूप में )
2008 में ( मेरा पिंड :माय होम( मुख्य भूमिका )
2009 में विक्ट्री( स्वयं के रूप में )
2015 में एबीसीडी 2 ( कैमियो रोल)
सिद्धू ने मार्च 2026 में अपने घरों का बटवारा किया ,जिसमें अमृतसर वाला घर बेटी राविया को ओर पटियाला वाला पुस्तैनी मकान बेटे करण को दिया ।https://hi.wikipedia.org/wiki/
Navjot Singh Sidhu की कहानी बताती है कि कैसे एक शर्मीला व्यक्ति विभिन्न क्षेत्र में अपनी प्रतिभा ओर मेहनत से चमकता हुआ मशहूर टीवी कमेंटेटर, रियलिटी शो का जज और मोटिवेशनल स्पीकर बन सकता है। उन्होंने अपने जीवन में आए उतर चढ़ाव को अपने अनुभव के रूप में लिया और अपने व्यक्तित्व को नए रूप में खड़ा कर दिया।
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