BYD Success story : जानिए BYD की प्रेरणादायक सफलता कहानी। कैसे वांग चुआनफ़ू ने भाई से उधार लेकर कंपनी शुरू की और आज BYD टेस्ला को टक्कर दे रही है। भारत में 6 लाख EV बनाने की तैयारी।
चीन की कंपनी BYD (BUILD YOUR dreams) इंडियन मार्केट में कार लॉन्च की है साथ ही कंपनी हैदराबाद में अपना ही भी प्लांट भी लगाएगी । BYD की यह कार टेस्ला की इलेक्ट्रॉनिक कार को टक्कर देगी। कंपनी ने इस कार को सुपर ई प्लेटफार्म नाम दिया।
यह कार 5 मिनट में चार्ज होने पर 400 किलोमीटर तक चलेगी । रिचार्जेबल बैटरीयो का प्रोडक्शन करने वाली कंपनी BYD ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक कार के लिए दुनिया भर में मशहूर है । उधार लेकर शुरू हुई कंपनी का रेवेन्यू आज 7.9 लाख करोड रुपए हैं।
BYD Success story : BYD की शुरुआत साल 1995 में चीन के शेनझेन शहर में हुई थी । चीन के इंजीनियर और एंटरप्रेन्योर वांग चुआनफ़ू ने कंपनी की नींव रखी थी । शुरुआत में यह कंपनी रिचार्जेबल बैटरी बनाती थी । खासतौर पर मोबाइल फोन और कैमरे के लिए। वांग चुआनफ़ू का जन्म एक गरीब किसान परिवार में हुआ था ।
उन्होंने मिडिल स्कूल के दौरान ही अपने माता-पिता को खो दिया था । वांग ने केमिकल इंजीनियर के बाद बीजिंग नॉनफेरस मेटल रिसर्च इंस्टिट्यूट से मास्टर्स किया था। 1990 की बात है चीन में बैटरियों की भारी डिमांड थी ।
खासकर मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए । जापान और कोरिया की फैक्ट्री चीन की कंपनियों को महंगी बैटरी बेच रही थी। वांग को लगा कि अगर चीन में सस्ती और अच्छी बैटरी बनाई जाए तो देश में टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को जबरदस्त बढ़ावा मिल सकता है।
वांग बैटरियों और एनर्जी स्टोरेज तकनीक में एक्सपर्ट थे । वांग ने अपनी कंपनी बनाने के बारे में सोचा । लेकिन उनके पास फंड नहीं था। वांग ने अपनी सेविंग्स के अलावा चेहरे भाई से करीब 3.52 लाख डॉलर रुपए उधार लिए थे। उस वक्त चीन सरकार टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा दे रही थी। BYD को भी सरकारी स्कीम और सब्सिडी से फायदा मिला ।
साल 1995 में 20 लोगों की छोटी टीम के साथ कंपनी शुरू हुई। कंपनी के नाम के बारे के बारे में वांग बताते है कि शुरू में यह नाम केवल चीनी अक्षरों बी या दी था। बाद में इसे मोटिवेशनल अर्थ के साथ जोड़ा गया। BYD (BUILD YOUR DREAMS) अपने सपने बनाओ । साल 2000 में BYD ने मोटोरोला को बैटरी सप्लाई करने के बारे में सोचा। वांग की इंग्लिश अच्छी नहीं थी। लेकिन मोटरोला के अधिकारियों से उन्हें इंग्लिश में ही बात करनी पड़ी थी यह डील वांग के लिए काफी मुश्किल थी। क्योंकि उस वक्त मार्केट में मोटरोला के मोबाइल का दबदबा था ।
इसलिए वांग किसी भी कीमत पर ये डील करना चाहते थे । वह लगातार कोशिश करते रहे आखिरकार कीमत कम होने की वजह से मोटोरोला ने BYD की बैटरियों को टेस्ट करने का फैसला किया। और कंपनी के साथ एक बड़ी डील की । इसके बाद BYD की ग्रोथ तेजी से हुई ।
BYD Success story : फरवरी 2003 में BYD ने ऑटो सेक्टर में कदम रखा। इसमें चीन की एक छोटी कार कंपनी Qinchuan automobile को खरीद खरीद और फिर अपने खुद के नाम से इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कार बनानी शुरू की ।
साल 2005 में BYD ने BYD F3 नाम से पहली कार लॉन्च की । यह कार चीन में काफी पॉपुलर हुई। इसकी वजह से ऑटो सेक्टर में BYD को पहचान मिली । इसके बाद कंपनी ने पेट्रोल गाडियां के साथ-साथ प्लग इन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का प्रोडक्शन शुरू किया । साल 2008 में दुनिया की पहली प्लग इन हाइब्रिड कार BYD F3 DM लांच की। उस समय यह क्रांतिकारी कदम था। जबकि बाकी कंपनी अभी EVs पर हो सोच रही थी ।
साल 2008 में दुनियाभर में बड़े-बड़े बिजनेस में इन्वेस्ट करने वाली कंपनी वर्क शायर हैथवे ने BYD में इन्वेस्ट करने का फैसला किया।दरअसल वॉरेन बफेट की कंपनी वर्क शायर हैथवे के निवेश सलाहकार डेविड सिकोन चीन गए थे। उन्होंने BYD के संस्थापक वांग चुआनफ़ू से मुलाकात की ।
वांग के विजन और EV टेक्नोलॉजी से सिकोल इतना प्रभावित हुए ओर उन्होंने बफे को कहा वांग थॉमस एडिसन, जैक वेल्ज ,बिल गेट्स का कंबीनेशन है। हमें इसकी कंपनी में इन्वेस्ट करना चाहिए ।
तब वर्क शायर हैथवे ने कंपनी 20% हिस्सेदारी खरीद ली । इसके लिए उन्होंन BYD को 968 करोड रुपए जाने 230 मिलियन डॉलर दिए। BYD के लिए यह टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। कुछ इस सालों में BYD शेयर 10 गुना तक बढ़ गए। इसके बाद 2009 में BYD ने पहली इलेक्ट्रिक कार e6 लॉन्च की । ओर 16 सालों में BYD एक ग्लोबल ब्रांड बन गया।
वांग का मानना था कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों का भविष्य बैटरी टेक्नोलॉजी पर निर्भर होगा । उन्होंने कहा था कि अगर आप बैटरी टेक्नोलॉजी में महारथ हासिल कर लेते हैं तो आप EV इंडस्ट्री में अपनी जगह बना सकते हैं। एक रिसर्च कंपनी रोडियम ग्रुप के मुताबिक साल 2015 से 2020 के बीच BYD को सरकार से 36800 करोड रुपए (4.3 बिलियन डॉलर) का सहयोग मिला ।
साल 2020 में BYD ने बैटरी लॉन्च की । यह बैटरी अपनी सेफ्टी लास्टिंग और इफेक्टिव कास्ट के लिए मशहूर है। इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में कंपनी की अलग पहचान बनी । ये बैटरी टेस्ला सहित दूसरी कार बनाने वाली कंपनी भी यूज़ कर रही थी ।
यह खास तौर पर लिथियम आईरन फास्फेट(LFP ) बैटरी है। उस समय बाकी कंपनियां इसे कम एनर्जी स्टोरेज होने की वजह से इस्तेमाल नहीं कर रही थी। लेकिन BYD ने इस टेक्नोलॉजी में सुधार किया
ब्लूम बर्ग की रिपोर्ट के अनुसार इन सुधारो के बाद ये बैटरी लंबी दूरी की गाड़ियों के लिए उपयुक्त हो गई । इसी साल BYD की कारों की बिक्री में तेजी आई । 2020 में कंपनी ने 1लाख 30 हजार इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेची ।
कोविद-19 के दौरान दुनिया भर में मास्क की कमी हो रही थी। उस समय वांग ने अपने प्रोडक्शन प्लांट का इस्तेमाल मास्क बनाने के लिए किया । कंपनी ने सिर्फ तीन दिनों में मास्क बनाने की प्लानिंग कर ली। और 7 दिनों के भीतर मशीन तैयार हुई। 10 दिनों के अंदर पहले ऑर्डर तैयार कर लिया गया ।
मात्र 24 दिन में BYD ने दुनिया का सबसे बड़ा मास्क प्लांट बनाकर मास्क बनाना शुरू किया । कंपनी ने प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ N95 मास्क बनाए। कुछ ही हफ्तों में BYD दुनिया की सबसे बड़ी मास्क बनाने कंपनी बन गई ।
कंपनी को जापान की सॉफ्ट बैंक ग्रुप और अमेरिका के कैलिफोर्निया से मास्क बनाने के बड़े ऑर्डर मिले । इसके बाद BYD को 8560 करोड रुपए से ज्यादा का मुनाफा हुआ। BYD द्वारा बनाए मॉस्क 80 से ज्यादा देशों में भेजे जाने लगे थे । पिछले कुछ सालों में BYD ने चीन के बाहर भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है । CNBC की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिणी पूर्व एशिया ,इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार में BYD की 43% हिस्सेदारी है । यही वजह है कि आज BYD टेस्ला जैसी बड़ी कंपनी को टक्कर दे रही है।
BYD की नई गाड़ी टेस्ला के सुपर चार्जर से दोगुनी तेज
कंपनी के फाउंडर वांग चुआनफ़ू ने कंपनी के शेनजेन हेडक्वार्टर से लाइवस्ट्रीव में हुए एक भाषण के दौरान कहा था कि BYD की नई सुपर ई प्लेटफॉर्म कारे 15 मिनट में 80% से जायदा चार्जर हो सकती है जो टेस्ला के V3 सुपरचार्जर से लगभग दोगुनी स्पीड है ।
अपनी कार में BYD ने खुद की बनाई हुई ब्लेड ,बैटरी ओर सुपर डीसी चार्जिंग टेक का इस्तेमाल किया है। इनमें 800V आर्किटेक्चर इस्तेमाल हुआ है जो चार्जिंग को सुपर फास्ट बनता है ।
BYD केबल गाड़ियां ही नहीं बनाती है बल्कि एनर्जी स्टोरेज सोल्यूशन,इलेक्ट्रिक बसे ,कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे ipaid ओर iphone जैसे प्रोडक्शन में भी आगे है । 2025 में कंपनी ने 42 लाख 68 हजार गाड़ियां बेची । जो 2022 की तुलना में लगभग 10 गुना ज्यादा है ।
BYD ने 2007 में चेन्नई में अपना पहला प्लांट स्थापित कर भारतीय बाजार में प्रवेश किया। शुरुआत में यह केवल मोबाइल फोन के लिए बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बनाती थी। 2013 में कंपनी ने भारत की पहली इलेक्ट्रिक बस BYD K9 पेश की।
2021 में कंपनी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार MPV BYD e6 लॉन्च की, जो शुरुआत में केवल B2B (कॉर्पोरेट और फ्लीट) ग्राहकों के लिए थी।
BYD ने अपनी पकड़ मजबूत के लिए हैदराबाद में प्लांट खोला । जिसमें हर साल 6 लाख कारों का प्रोडक्शन संभव होगा । इसके अलावा कंपनी यूरोप ,ब्रिटेन और दक्षिणी पूर्व एशिया में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। आज कंपनी के प्लांट चीन में सबसे ज्यादा है लेकिन कंपनी ने कहीं दूसरे देशों में भी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स ओर असेंबली प्लांट्स लगाए है। चीन के शेनसन और सात शहर में BYD के प्लांट है ।
कंपनी में करीब 9लाख 68 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं । इसके अलावा भारत में चेन्नई के पास श्री पैरबंदूर में BYD का प्लांट है जहां पर इलेक्ट्रिक बसे बन रही है । आगे इस प्लांट में EV कारों का भी प्रोडक्शन होगा।
अमेरिका में कैलिफोर्निया में EV बस प्लांट है ब्राजील में बैटरी और EV असेंबली प्लांट है। थाईलैंड में भी प्रोडक्शन प्लांट है । इसके अलावा कई देशों में प्लांट शुरू करने की प्लानिंग चल रही है । BYD की कारें अब 70 से अधिक देशों में बिक रही है । एशिया में भारत ,चीन ,जापान ,सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, दक्षिणी कोरिया,फिलीपींस ओर 6 महाद्वीपों में बिक रही है ।Starbuks success story hindi : गरीबी से ग्लोवल ब्रांड तक
BYD, का रेवेन्यू 2020 में 1.7 लाख करोड़ था , 2021 में 2.5 लाख करोड़ 2022 में 5. 15 लाख करोड़ ।2023 में 7.1 करोड़। 2024 में 7.9 लाख करोड़ 2025 में 8.7 लाख करोड़ ,वर्तमान में कंपनी का रेवेन्यू 107 बिलियन डॉलर है ।https://en.wikipedia.org/wiki/BYD_Company
BYD success story हमें सिखाती है कि गरीबी बाधा नहीं, सोच छोटी होना बाधा है। सही समय पर लिया गया रिस्क जिंदगी बदल सकता है।Next story
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