Repido success story in  hindi : कैसे एक जीरो स्टार्टअप बना इंडिया का बाइक टैक्सी किंग 

Repido success story in  hindi : कैसे एक जीरो स्टार्टअप बना इंडिया का बाइक टैक्सी किंग 

Repido success story in hindi: 2026 का बाइक टैक्सी किंग

Repido success story in hindi में जानिए कैसे  रेपिडो के फाउंडर्स ने एक छोटे से बिज़नस आइडिया को 2026 का सबसे बड़ा बाइक टैक्सी ब्रांड बना दिया । पढ़िए स्ट्रगल की पूरी कहानी।

Repido जो कम कीमत पर बाइक्स टैक्सी सर्विस देती है । यह देश की पहली बाइक टैक्सी  है । जिसे  मार्केट में आने के बाद मोटर एक्ट फॉलो  न करने की वजह से नेगेटिव पब्लिसिटी मिली थी।  2019 में तमिलनाडु में कंपनी की व्हीकल जब्त की गई थी।  दिल्ली और महाराष्ट्र में दोनों राज्य में Repido  सर्विस को बैन किया गया था । लेकिन आज रेपिडो का मार्केट कैप 2 अरब डॉलर से भी ज्यादा है ।

रेपिडो फाउंडर्स की कहानी

Repido success story in hindi: ट्रैफिक जाम से परेशान होकर शुरू किया था Repido, सात बार फेल हुआ स्टार्टअप आठवीं बार में खड़ी हुई 9000 करोड़ की कंपनी ।

पवन गुंटीपल्ली : पवन गुटिपल्ली का जन्म तेलंगाना में हुआ था । वे एक किसान  परिवार से आते थे ।  उसके  बाद भी  पवन ने बचपन में कंप्यूटर प्रोग्राम में सीख ली।  उनके पिता खेती के साथ-साथ बिजनेस में किया करते थे। वे अक्सर पिता को काम करते देखते थे ।  पवन के पिता उनसे कहते थे कि अक्सर अगर सक्सेस  चाहिए तो  बेटा सिर्फ दूसरों की  भलाई करना । इसी को इंस्पिरेशन बनाकर उन्होंने आगे का सफर तय किया । उन्होंने IIT खड़कपुर से इंजीनियरिंग की ।

S.R. ऋषिकेश: ऋषिकेश ने PES विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की । उन्होंने कई स्टार्टअप के साथ मिलकर काम किया । वहां उन्होंने प्रोडक्ट मैनेजमेंट और यूज़र एक्सपीरियंस का अनुभव लिया। बाद ने ऋषिकेश ने एक वॉलेट‑बेस्ड सर्विस “IMPStant” भी शुरू की, जो ज़्यादा सफल नहीं हुई ओर उसे बंद कर दिया ।

अरविंद शंका: अरविंद ने  IIT भुवनेश्वर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की । उन्होंने  शुरुआत में टाटा अरविंद सांका , पवन गुंटूपल्ली और S.R. ऋषिकेश ने मिलकर बेगलुरु से 2015 में रैपीडो की शुरुआत की थी।
आईआईटी खड़कपुर से पढ़ाई करने के बाद पवन  की जॉब सैमसंग कंपनी में लग गई।  सैमसंग में पवन ने सॉफ्टवेयर डेवलपर का काम किया।  इसके बाद पवन जॉब करने साउथ कोरिया चले गए । वही  काम के दौरान उन्होंने खुद का बिजनेस करने का आइडिया आया में इंटर्नशिप की, बाद में फ्लिपकार्ट में फाइनेंस बिजनेस पार्टनर के रूप में भी काम किया,

रेपिडो की शुरुआत 

रेपिडो फाउंडर्स: अरविंद शंका,पवन गुंटीपल्ली,S.R. ऋषिकेश
रेपिडो फाउंडर्स: अरविंद शंका,पवन गुंटीपल्ली,S.R. ऋषिकेश

 

Repido success story in Hindi: अरविंद सांका , पवन गुंटूपल्ली और S.R. ऋषिकेश ने मिलकर बेगलुरु से 2015 में Repido की शुरुआत की थी। आईआईटी खड़कपुर से पढ़ाई करने के बाद पवन  की जॉब सैमसंग कंपनी में लग गई।  सैमसंग में पवन ने सॉफ्टवेयर डेवलपर का काम किया।  इसके बाद पवन जॉब करने साउथ कोरिया चले गए । वही  काम के दौरान उन्होंने खुद का बिजनेस करने का आइडिया आया

फिर  पवन जॉब  छोड़कर वापस इंडिया आ गए ओर वह स्टार्टअप के नए आइडिया तलाशने लगे और एक्सपेरिमेंट करते रहे । इसी दौरान उन्होंने अपने स्कूल के दोस्त अरविंद शंका के साथ मिलकर “द करियर”( the carrier ) नाम से स्टार्टअप की शुरुआत की। इस  स्टार्टअप में  मिनी ट्रक से इंटरसिटी लॉजिस्टिक सर्विस देते थे। हालांकि उनका यह स्टार्टअप जल्दी फ़ैल हो गया  क्योंकि मिनी  ट्रक चलाने के लिए ज्यादा पैसे भी जरूरत थी इस वजह से स्टार्ट अप बंद करना पड़ा ।

Repido से पहले 7 स्टार्टअप हुए फेल।

रेपिडो  पवन का आठवां स्टार्टअप था।  इससे पहले उन्हें सात स्टार्टअप फेल हो चुके।  जब पवन साउथ कोरिया से जॉब छोड़कर भारत लौटे तो उन्हें लोगो के तानों का सामना करना पड़ा । एक इंटरव्यू ने बताया कि बार बार फेल हो रहे  स्टार्टअप के बाद रिश्तेदार ओर  पड़ोसी कहते थे ,कि तुम इंडिया में कुछ नहीं कर पाओगे । विदेश की अच्छी खासी नौकरी छोड़ना बेवकूफी के सिवाय कुछ भी नहीं है । बिना जॉब के मुश्किल आने लगी सेविंग खत्म हो रही थी ,स्टार्टअप लगातार फेल हो रहे थे।

ट्रैफिक जाम को देखकर आया रेपिडो का आइडिया

पवन के लिए बेगलुरु जैसे शहर में स्टार्टअप के सिलसिले में बार-बार एक जगह से दूसरी जगह जाना बहुत खर्चीला हो गया।  ऐसी स्थिति में पवन को कम किराया और सड़क जाम करने से बचने के लिए कोई उपाय चाहिए था।  कुछ कंपनी उस समय भी टैक्सी  सर्विसेज की फील्ड में काम कर रही थी।  हालांकि मुंबई दिल्ली तक सीमित थी । और उनका किराया भी  ज्यादा था।

यहीं से उन्हें छोटे शहरों के लिए कम किराए में राइड सर्विस शुरू करने का आइडिया आया था । 2015 में पवन ने ऋषिकेश और अरविंद शंका के साथ मिलकर  रेपिडो की शुरुआत की । रैपीडो को सबसे पहले 2015 बेंगलुरु में लॉन्च किया गया था।  इसकी टैग लाइन  रखी थी राइड सोलो ।

तीनों फाउंडर खुद कप्तान बनकर देते थे राइट्स ।

कंपनी शुरू करने के बाद पहले 3 महीने फाउंडर्स  अरविंद शंका,पवन गुंटूपल्ली,ओर S.R.  ऋषिकेश खुद ही कप्तान बनकर राइड देते थे।  इसके बाद प्रयोग के तौर पर 15 से 20 ऐसे लोगों के कप्तान बनकर कमाने का मौका दिया जिसके पास खुद की बाइक थी।  यह प्रयोग काम कर गया । लोगों को Repido की सर्विस पसंद आई । कई लोगों को भी रोजगार ओर एक्स्ट्रा कमाई करने का ऑप्शन मिला।  बाद में कस्टमर डिमांड के चलते कंपनी ऑटो रिक्शा की सुविधा देनी भी शुरू की ।

75 इन्वेस्टर ने किया रिजेक्ट

एक इंटरव्यू ने बताया कि रेपिडो  ने मार्केट में अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश की तो कंपनी को बड़े इन्वेस्टर नहीं मिल रहे थे।  इन्वेस्टर्स का मानना था कि ओला उबर की कैब  सर्विस के सामने बाइक सर्विस नहीं टिक पाएगी।  अप्रैल 2016 में हीरो मोटोकॉर्प के सीईओ पवन मुंजाल ने Repido में इन्वेस्ट किया।  उन्होंने इसे भारत के कल्चर के हिसाब से बनाने का  सुझाव दिया ।

हीरो मोटोकार्प के सीईओ पवन मुंजाल ने किया इन्वेस्ट
हीरो मोटोकार्प के सीईओ पवन मुंजाल ने किया इन्वेस्ट

 

कंपनी  ने टियर 2 और टियर 3 शहरों पर अपना फोकस किया । ऐसा करने पर कंपनी के वैल्यूएशन में इजाफा हुआ।  आज देश के कोने-कोने के लगभग 55 बाइक टैक्सी कंपनियों में Repido पहले स्थान पर है।  बेंगलुरु शहर से शुरू होकर  आज रेपिडो 15,0000 बाइक टैक्सियों के साथ दिल्ली ,मुंबई ,हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता सहित देश के 100 से ज्यादा शहरों  में सर्विस दे रही है ।

8 प्रतिशत से अधिक महिला कैप्टन

पवन गुंटूपल्ली एक इंटरव्यू में बताते है  कि कोविड के दौर में उन्हें एक महिला की चिट्ठी  आई । कोबिड में उनके  पति की मौत हो गई, तब घर चलाने के लिए वह रेपिडो  से जुड़ी । रेपिडो से जुड़ने वाली पहली महिला कैप्टन का नाम के . स्नेहा था । बह  अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 5 साल  पहले बेंगलुरु आई थी।  बेंगलुरु आने के बाद उनके  एक दोस्त ने उन्हें रेपिडो एप के बारे में बताया था । आज साउथ इंडिया के बाद असम में महिला कैप्टन की संख्या जायदा है ।

Repido का बिजनेस मॉडल 

Repido का बिजनेस मॉडल बिजनेस टू कस्टमर मॉडल है ।  इसका मतलब है कंपनी खुद एक बिजनेस यूनिट के रूप में अपने कस्टमर को सीधे  सर्विस देती  हैं।  Repido का  बिजनेस मॉडल कमीशन बेस्ट है । कंपनी कप्तान और कस्टमर के बीच पुल का काम करके पैसे कमाती है।  कंपनी कुल किराए का 20% कमीशन के तौर पर लेती है । T-Series :  फ्लॉप से youtube किंग तक 

कंपनी ने साल 2024 में जुलाई में अपने आखिरी ई फंडिंग राउंड में बेस्ट   कैपिटल में लगभग 1000 करोड रुपए जुटाए। इसी  के साथ रेपिडो  यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई।  पोर्टर लॉजिस्टिक्स सर्विस देने वाली कंपनी और Perfios बेगलुरु स्थित फिनटेक के साथ Repido 2024 में यूनिकॉर्न बनने वाली तीसरी कंपनी  थी।

रेपिडो ने लड़ाई  कानून की लड़ाई।

Repido का सफर आसान नहीं रहा।  इसे खुद को मार्केट में बनाए रखने की लंबी कानूनी  लड़ाई लड़नी पड़ी । कंपनी की मार्केट में आने के बाद मोटर एक्ट का सबसे  बड़ा संकट खड़ा हुआ । नियम के मुताबिक सफेद प्लेट वाले वाहनों का  इस्तेमाल कमर्शियल वाहन के तौर पर नहीं किया जा सकता।

मोटर एक्ट का पालन न  होने पर 2019 में तमिलनाडु में कंपनी के वाहनों को जप्त किया जाने लगा।  इसके लिए कंपनी ने कानूनी लड़ाई लड़ी । 2024 के शुरुआत तमिलनाडु की सरकार ने एपल इंडिया और गूगल को पत्र लिखकर अपने प्ले स्टोर से रैपीडो को हटाने की मांग की थी।  दिल्ली और महाराष्ट्र दोनों राज्य में बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध लगाया गया । दिल्ली ने इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी को मंजूरी दी ।

Repido सेफ्टी को लेकर भी  अक्सर विवादों में रहती  है कुछ Repido कैप्टन सुनसान रहने वाले रास्ते को चुनते हैं बेंगलुरु में एक लड़की  अथिरापल्ली रात को रेपिडो राइट लेती है रेपिडो कैप्टन ने बाइक सुनसान रास्ते की  ओर मोड़ ली ओर कैप्टन चलती बाइक पर मस्टरबेशन करने लगा। लड़की घबरा गई ओर अपनी लोकेशन से पहले उतर गई ।Physics wallah success story in hindi : 5000 से फिजिक्स वाला की शुरुआत आज कंपनी की नेटवर्क 9000 करोड़ । जिसकी कामयाबी पर वेब सीरीज बनी 

इसके बाद भी कैप्टन लड़की को व्हाट्सएप  मेसेज करता रहा।  इस तरह की  कई शिकायत रेपिडो कैप्टन को लेकर आती थी।  वही  कुछ कैप्टन राइट कैंसिल करके डायरेक्ट चलने का सुझाव भी देते हैं ।

तमाम विवादों के बाद भी  कंपनी 500 करोड रुपए की वैल्यूएशन साथ ग्रो कर रही थी । इसकी वजह शायद यह है कि पवन गुंटूपल्ली आज भी  दिन में  जम से कम  तीन राइड बुक करते हैं । कप्तान से अनजान बनकर बात करते हैं । और रेपिडो का रिव्यू लेते हैं ऐसा बह  कप्तान की समस्या समझने  की कोशिश करते हैं।  ताकि उन्हें सॉल्व कर  कंपनी की ग्रोथ बढ़ाई जा सके।

Repido का कारोबार

रेपिडो भारत के 100 से  ज्यादा देशों में मौजूद है । कंपनी के साथ 15 लाख से ज्यादा कैप्टन जुड़े हैं।  प्रत्येक राइड की र रीयल टाइम ट्रेकिंग होती है । 2024 – 25 में कंपनी  का रिवेन्यू 500करोड रुपए रहा।

अगस्त 2025 में कम्पनी ने ‘Ownly’ नाम से एक स्वतंत्र फूड डिलीवरी ऐप लॉन्च किया जिससे उसके रेवेन्यू में तेजी आई । बही सितंबर 2025 में स्विगी (Swiggy) ने Repido में अपनी लगभग 12% हिस्सेदारी ₹2,400 करोड़ में बेच दी, जिससे कंपनी के मार्केट की  कुल वैल्यूएशन लगभग 2.3 अरब डॉलर पहुंच गई । कंपनी ने 1 साल में 10 करोड़ से  ज्यादा राइट्स बुक पूरी की। प्ले स्टोर पर एक करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार किया

Repido का सफर

2015 में पवन गुंटूपल्ली ,ऋषिकेश S.R. और अरविंद सांका के साथ मिलकर रेपिडो की शुरुआत की ।

2016 में हीरो मोटर्स के सीईओ पवन मुंजाल ने कंपनी को पहली  फंडिंग मिली।

2018 में 10,000 दिल्ली राइट्स के साथ रेपिडो ने 28 महीनों में 50 लाख राइड्स पूरे किया।  2020 में बाइक राइड्स को मिले पॉजिटिव रिस्पांस को देखते हुए कंपनी ने  ऑटो सर्विस शुरू की।  2021 में Repido की पहली महिला कैप्टन के स्नेहा बनी  इससे  कंपनी के रेवेन्यू में 12.5 गुना की बढ़ोतरी हुई । 2024 में बेस्टब्रिज  से 1007 करोड़ की फंडिंग के साथ  रेपिडो यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई।https://en.wikipedia.org/wiki/Rapido_(company)

Repido success story in hindi हमे सिखाती है , कि अगर हम लोगों को प्रॉब्लम को सॉल्व करे तो एक छोटा सा स्टार्टअप भी यूनिकॉर्न बन सकता है ।

यह कहानी फाउंडर्स के दिए गए इंटरव्यू , न्यूजपेपर,पॉडकास्ट ओर गूगल से ली गई है । ऐसी ही कहानी के लिए आप safltakikahani को जरूर फॉलो करे। थैंक्स

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