Success story

Patanjali success story:  पतंजलि की सफलता ओर विवादों की कहानी 

Patanjali success story:  पतंजलि की सफलता ओर विवादों की कहानी   

Patanjali success story:  भारत में जब भी आयुर्वेदिक और हर्बल प्रोडक्ट्स की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है पतंजलि का। एक समय था जब मार्केट पूरी तरह मल्टीनेशनल कंपनियों के कब्जे में था, लेकिन एक योग गुरु  और उनके सहयोगी ने इस खेल को पूरी तरह बदल दिया।

आयुर्वैदिक दिव्य फार्मेसी की शुरुआत ।

Patanjali success story: पतंजलि की शुरुआत एक योग गुरु और उनके सहयोगी ने की थी। 1990 के दशक में बाबा रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण हरिद्वार में लोगों को योग सिखाते थे । उस समय उनका उद्देश्य लोगों को स्वस्थ बनाना था ,न कि बिजनेस करना । लेकिन धीरे धीरे उन्होंने देखा कि अधिकतर लोग हमेशा बीमार रहते हैं। इसलिए उन्होंने आयुर्वेद के बारे में सोचा।

बाबा रामदेव ओर आचार्य बालकृष्ण

5 साल बाद 1995 दोनों ने  हरिद्वार में ही दिव्य फार्मेसी  खोला । इसे बाबा रामदेव ने  गुरु स्वामी शंकर देव के आश्रम में खोला था । वे इसके जरिए आयुर्वैदिक हर्बल दवाइयां बनाते और उन्हें बेचते थे । धीरे-धीरे लोकल लेवल पर उनकी दवाइयां फेमस होने लगी थी। दूर-दूर से दवाओ की मांग होने लगी थी।  ऐसे में दिव्य फार्मेसी का दायरा बढ़ाने की बात होने लगी।  हालांकि उनको लेकर एक दिक्कत थी कि अभी तक यह एक ट्रस्ट के रूप में दर्ज था ।

बाबा रामदेव के पॉपुलर होने पर NRI से मदद मिलने लगी

2000 के दशक में रामदेव टीवी पर आने लगे ।  हर सुबह आस्था टीवी पर रामदेव योग सिखाते थे। उनका योग सिखाने का तरीका अलग था । वे बीच-बीच में हंसाते ओर किस योग में क्या फायदा  क्या नुकसान  होगा  सब बताते थे ।

योग के जरिए बाबा रामदेव भारत के साथ ही विदेशों में मशहूर होने लगे थे । देश के बाहर भी उनके योग शिविर लगने लगे । उन्होंने विदेशों में रहने वाले भारतीयों से आर्थिक मदद की मदद भी मिलने लगी थी।

इसके बाद 2006 में रामदेव उनके साथी बालकृष्ण ने  पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड  कंपनी शुरुआत की।  इसमें  एक NRI कपल की  भी  भूमिका थी। इसमें उन्होंने एक टैग लाइन भी रखी की “स्वदेशी अपनाओ, आयुर्वेद अपनाओ”।

रोज इस्तेमाल होने वाले सेगमेंट से पतंजलि ने मल्टी नेशनल कंपनियों को टक्कर दी।

फूड ओर  पर्सनल केयर सेक्टर  मल्टीनेशनल  कंपनियों से भरा पड़ा है।  कंपनी के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती थी । पतंजलि अपने कुछ यूनीक सेलिंग पॉइंट्स के साथ बाजार में उतरी। उन्होंने अपनी  ब्रांड पोजिशनिंग आयुर्वेदिक ओर हर्बल  प्रोडक्ट के रूप में की थी ।

पतंजलि की दवाओ  से लोगो को फायदा मिला।  इस वजह से प्रोडक्ट की मांग बढ़ती गई । यही पतंजलि के  एक ब्रांड के रूप में उभरने की बड़ी वजह बनी।  दूसरी वजह थी  इसकी पूजा प्रोडक्ट ।

Patanjali success story,पतंजलि से पहले मार्केट में पूजा के लिए प्रोडक्ट में रेगुलर धूप अगरबत्ती जैसे सामान आते थे।  पतंजलि ने एक पूरा रेंज लांच किया इसमें हवन सामग्री से लेकर पूजा के समय जलाए जाने वाले एयर फ्रेशनर  भी  शामिल थे।  मार्केट में पैर जमाने के बाद पतंजलि के लिए लोगों की डिमांड के अनुसार प्रोडक्ट सप्लाई करना भी एक बड़ी चुनौती थी ।उसके पास मार्केटिंग का बड़ा चैन नहीं था । कोविड  के दौरान उसे और ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा ।

उस वक्त लोगों के लिए डिपार्टमेंट स्टोर या ब्रांच तक सामान खरीदने के लिए जाना मुश्किल था।  ऐसे में ऑनलाइन  मार्केटिंग करने वाली कंपनी को फायदा हुआ।  लेकिन पतंजलि की रफ्तार घट गई उसके पास ऑनलाइन आउटलेट नहीं थे ।  इसके बाद पतंजलि ने ऑनलाइन मार्केटिंग में हाथ आजमाना  शुरू किया ।  पतंजलि ने बिग बॉस्केट और नेटवर्क्स जैसे 8 ऑनलाइन नेटवर्क से पार्टनरशिप की है ।

कोविड की दवा बनाने के दावे को लेकर पतंजलि विवादों में घिरी

अच्छी ग्रोथ और मार्केट कैप के साथ पतंजलि ओर बाबा रामदेव विवाद से  भी घिरे रहे । कोरोना में रामदेव ने दावा किया कि उनके प्रोडक्ट कोरोनिल और स्वासरी से  कोरोना का इलाज किया जा सकता है।  इस दावे के  बाद कंपनी को आयुष मंत्रालय  ने फटकार लगाई और उसके  प्रमोशन पर तुरंत रोक लगाने को कहा । राजस्थान और महाराष्ट्र सरकार ने भी  कंपनी के इस  दावे पर आपत्ति जताई थी ।

2015 में कंपनी इंस्टेंट आटा नूडल्स लॉन्च करने से फूड सेफ्टी रेगुलेरिटी  अथॉरिटी ऑफ इंडिया(fssai) से लाइसेंस  नहीं लिया था।  इसके बाद पतंजलि को फूड सेफ्टी के नियम तोड़ने के लिए लीगल नोटिस का सामना करना पड़ा था ।

2015 में केंटीन स्टोर्स डिपार्मेंट ने पतंजलि के आंवला जूस को खाने के लिए अनफिट बताया था । इसके बाद सीएसडी ने अपने सारे स्टोर से आंवला जूस हटा दिया था।  2015 में हरिद्वार में लोगों ने पतंजलि घी में फंगस और अशुद्धियां मिलने की शिकायत की थी।

2018 में भी fssai ने पतंजलि को मेडिसिन प्रोडक्ट गिलोय घनवटी पर एक महीने आगे  की  मैन्युफैक्चरिंग डेट लिखने के लिए फटकार लगाई थी।  कोरोना के अलावा बाबा रामदेव कई बार योग और पतंजलि के प्रोडक्ट से कैंसर, एड्स और होमो सेक्सुअल तक ठीक करने के दावों को लेकर विवादों में रही।

FMCG की दुनिया में पतंजलि  आज एक ऐसा ब्रांड है जिसके प्रोडक्ट हर घर में मिलते है । बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में शुरू हुई यह कंपनी आज सस्ती ,घरेलू और आयुर्वेदिक उत्पादों के जरिए मल्टीनेशनल कंपनी को टक्कर  दे रही है । Telegram success story : रूस से भागकर शुरू की Telegram । आज 100 करोड़ से ज्यादा एक्टिव 

हरिद्वार से शुरू हुई कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट आज नोएडा ,नागपुर ओर इंदौर में है । वर्तमान में इसका मार्केट कैप 52900 करोड रुपए का है।  शुरुआत में कंपनी ने अच्छा बिजनेस किया । हालांकि 2016 के बाद उसे घाटा होने लगा । 2016 -17 में कंपनी का रेवेन्यू 10500 करोड़ था । 2024-25 के कंपनी का रेवेन्यू 34280 करोड़ रहा ।

पतंजलि के फेमस प्रोडक्ट ओर उनके लाभ

पतंजलि के फेमस प्रोडक्ट

 

पतंजलि आज दवाएं,फूड,घरेलू ,ब्यूटी और पर्सनल प्रोडक्ट बनाती है।

पतंजलि च्यवनप्राश: इम्युनिटी बढ़ने के लिए बेस्ट ।

आंवला रस: विटामिन सी ओर स्वास्थ के लिए उपयोगी।

आयुर्वेदिक औषधियां: डायबिटीज,जोड़ दर्द,अस्थमा,गैस पेट जैसी समस्याओं के लिए अलग अलग गोलियां ओर चूर्ण ।

गाय घी : इसकी बिक्री कंपनी की कुल आमदनी का 30 % हिस्सेदारी है ।

शहद : इम्युनिटी ओर कफ खासी वेक लिए उपयोगी ।

बच्चों ओर बड़ों के लिए मल्टी विटामिन आयुर्वेदिक गोलियां

इसके साथ पतंजलि टूथपेस्ट जैसे नीम ,हल्दी बबूल जैसे आयुर्वेदिक टूथपेस्ट  भी बनाती है।

फेश वाश : एलोवेरा ,तुलसी,नीम फेसवॉश जो ऑयली ओर मिक्सड त्वचा के लिए बना है ।https://en.wikipedia.org/wiki/Patanjali

Patanjali success story  हमे सिखाती है कि कोई भी इंसान अपने ज्ञान ओर विश्वास के दम पर कोई भी बिजनेस खड़ा कर सकते है ।  सफलता के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है और छोटी गलतियों का भी ध्यान रखना पड़ता है ।

पतंजलि सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि एक आंदोलन था जिसने भारत में स्वदेशी और आयुर्वेद को फिर से जीवित कर दिया।

safltakikhani@gmail.com

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