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Roshan ved success story in hindi : 3 लाख से 500 करोड़ तक

Roshan ved success story in hindi:  3 लाख से 500 करोड़ तक 

Roshan ved success story in hindi : 10 सिलाई मशीन और ₹3 लाख से शुरू हुआ सफर कैसे बना 500 करोड़ का Sportswear बिजनेस? जानिए एल्सिस  ब्रांड के Founder “Roshan Ved ” की  Success Story हिंदी में।

Safltakikahani में आज हम बात करेंगे स्पोर्ट्स वियर ओर एल्सिस कंपनी ओर इसके फाउंडर रोशन वैद के बारे में ,

रोशन वैद : शुरुआत ओर संघर्ष

Roshan ved success story in hindi. 1995 की बात है  जब रोशन वैद बेंगलुरु में जॉब कर रहे थे । उस वक्त उनकी  सैलरी केवल 7500 रुपए महीने थी । लेकिन पारिवारिक समस्याओं की वजह से रोशन को 1997 में दिल्ली लौटना पड़ा । घर वालों को कहना था कि दिल्ली में ही काम करो।  कई महीनो तक जॉब ढूंढी लेकिन मन  के लायक कोई काम नहीं मिला ।

यहां – वहां भटकता रहा ,मेरे जेब में उतने पैसे भी नहीं थे कि कोई बड़ा बिजनेस शुरू कर  सकू ।  दिल्ली के तुगलकाबाद में जो उसे वक्त सबसे सस्ता इलाका था सिर्फ 10 सिलाई मशीन लगाकर 13 लोगों के साथ गारमेंट्स बनाने का काम शुरू किया । दूसरी कंपनियों के लिए थोक में गारमेंट्स बना कर सप्लाई करने लगा ।

आज हमारी  दो कंपनियां है जिनका  500 करोड़ का सालाना टर्नओवर है। ओर यहां 5000 से ज्यादा लोग काम करते हैं।  आज कंपनी में 2000 से ज्यादा सिलाई  मशीन के साथ आज हर रोज करीब 50 हजार टी शर्ट  ओर ट्रैक पेंट तैयार किए जाते हैं ।

आज नेशनल इंटरनेशनल क्रिकेट आईपीएल कॉमनवेल्थ गेम्स में हमारी कंपनी के बने कपड़े प्लेयर्स पहनते हैं। आज रोशन की दो कंपनियां है।

पैरागन अपैरल की शुरुआत  आज से करीब 24 साल पहले 1998 में की थी ।  यह कंपनी देशी – विदेशी कंपनियों को स्पोर्ट्स वियर बनाकर सप्लाई करती है बही दूसरी कंपनी  “एल्सिस” ब्रांड से स्पोर्ट  वियर बनाकर मार्केट में बेचते है ।

उनका दावा है  एल्सिस  विदेशी कंपनी एडीडास ,रीबॉक , नाइकी जैसी स्पोर्ट्स वियर बनाने  वाली विदेशी कंपनी  को  टक्कर दे रही है । यह इंडिया की पहली स्पोर्ट्स  बियर कंपनी है।

रोशन  वैद: IIT सपना टूटा लेकिन हौसला नहीं

Roshan ved success story in hindi ,रोशन वैद मूल रूप से असम के तेजपुर के रहने वाले हैं । उस वक्त गांव में अच्छी पढ़ाई लिखाई नहीं होती थी।  घर वालों ने पहले राजस्थान के अजमेर भेजा और फिर कॉलेज के लिए दिल्ली आ गया। आईआईटी करना चाहता था।  2 साल लगातार इंट्रेस दिया ,लेकिन क्रैक नहीं कर पाया।  जिसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में एडमिशन लेना पड़ा ।

रोशन अपनी कहानी में आगे बताते हैं कि आईआईटी क्रैक नहीं करने से निराशा  तो जरूर हुई थी । लेकिन ग्रेजुएशन के बाद फैशन इंडस्ट्री में इंटरेस्ट आने लगा ।  दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ  फैशन टेक्नोलॉजी से एमबीए इन मार्केटिंग एंड मर्चेंडाइजिंग कोर्स किया।  और बेंगलुरु की एक गवर्नमेंट कंपनी में बतौर  इंटर्न काम करने लगा।  बाद में जॉब भी  मिल गई।

पैरागन अपैरल की शुरुआत

Roshan ved success story in hindi ,परागण अप्रैल कंपनी की शुरुआत को लेकर रोशन अपना किस्सा बताते है कि मैं  जब बेंगलुरु से  दिल्ली  आ गया । दिल्ली में कई महीने भटकने के बाद भी मन के लायक कोई जॉब नहीं मिला , तो अपना काम शुरू करने के बारे में सोचा ।

मैने तुगलकाबाद में सबसे सस्ती जगह रेंट पर ली ओर 10 सिलाई मशीन ओर 13 लोगों के साथ कम शुरू कर दिया । कुछ साल तक दूसरी कंपनियों के लिए गारमेंट्स बनाकर सप्लाई करता था । ऑर्डर मिलने में दिक्कत आने पर स्पोर्ट्स वियर बनाने लगा । सबसे पहले रिबॉक को स्पोर्ट्स वियर सप्लाई किया ओर वहां से अच्छा रिस्पांस आया ।

रोशन को अपनी जिंदगी में बहुत  स्ट्रगल करना पड़ा वे कहते हैं  कि कभी ऑर्डर मिलने तो कभी नहीं।  क्लाइंट के पास इधर-उधर भागता फिरता ।   दो-तीन साल तक ऐसा ही लगा कि मैने अपना काम क्यों शुरू किया सारे फ्रेंड्स जॉब कर रहे थे।  मुझे भी फिर से  जॉब करने का ख्याल आने लगा।  घर वालों ने  भी यही बोला ।

Reebok से मिला टर्निंग पॉइंट

Roshan ved success story in hindi ,एक रोज मैं अपने दोस्त से मिलने गया वहां इंटरनेशनल कंपनी रीबॉक इंडिया डायरेक्ट था । यह मेरी कंपनी ओर लाइफ के लिए टर्निंग प्वाइंट रहा । मैने उनसे बात की तो उन्होंने  कहा कि यदि मैं पॉलिएस्टर से बने स्पोर्ट्स वियर बनाऊं,तो वो मेरा सारा प्रोडक्ट खरीद लेंगे।

रोशन कहते है कि मुझे तो पता भी नहीं था कि स्पोर्ट्स वियर  बनाया कैसे जाता है । दोस्त ने ताइवान जाने को कहा।  फ्लाइट की टिकट खुद के पैसे की बुक की।  बाकी का खर्च भी  उसने दिया । उन्होंने ताइवान  जाकर स्पोर्ट वियर के मेकिंग प्रोसेस ओर क्वालिटी को समझा । फिर ताइवान से पोलिएस्टर क्लॉथ को इंपोर्ट कर स्पोर्ट्स वियर बनाकर सप्लाई करने लगा।

NIFT से स्टडी की थी तो गारमेंट्स की टेक्नोलॉजी ओर इस इंडस्ट्री को पहले से जानता था । दोस्त रिबॉक इंडिया में डायरेक्टर था ,जिसने सबसे जायदा मदद की ओर पूरे मॉडल को समझाया। टेक्नोलॉजी की मदद से टी शर्ट,ट्रैक पेंट को अलग अलग केटेगिरी में बनाना शुरू किया । पसीना सोखने से लेकर धूप से बचाने के वाले स्पोर्ट्स वियर बनाए ।

उस समय तुगलकाबाद के जिस इलाके में यूनिट थी , वहां खरीददार नहीं आना चाहते थे लोकेशन अच्छा नहीं था । फिर साल 2001 में नोएडा में पापा के दोस्त से 6- 7 लाख कर्ज लेकर प्लॉट खरीदा ओर फैक्टी शिफ्ट कर ली। ओर कही सालों तक प्रॉफिट को ही कंपनी में इन्वेस्ट करता रहा ।

10 साल के भीतर 1000 से ज्यादा मशीनों का सेटअप लग  चुका था।  एडीडास, रिबॉक , नाइकी जैसी  इंटरनेशनल कंपनियों से ऑर्डर मिलने लगे । रोशन वैद शुरुआती दिनों  में गारमेंट्स बनाकर कंपनियों को सप्लाई करते थे । फिर स्पोर्ट्स वियर  बनाना शुरू किया।  इसके लिए रोशन लुधियाना के अलावा विदेशों से क्लॉथ इंपोर्ट कर  प्रोडक्ट बनाते थे।

2013-14 में हिमाचल में कपड़ा बनाने की फैक्ट्री सेटअप कि।  यहां सब्सिडी मिल रही थी और जमीन सस्ती थी अब हम  सिर्फ धागा यानी यार्न खरीदते थे ।

2018 में शुरू हुआ एल्सिस ब्रांड

मैं 20 साल से  दूसरी कंपनियों के लिए गारमेंट्स बना रहा था ।तब मैने  अपना खुद का ब्रांड बनाने  की सोची । क्योंकि  2016 तक मेरी कंपनी 100 करोड़ की हो चुकी थी । सोचता था कि यदि इंडियन को स्पोर्ट्स वियर खरीदना होता है तो इंटरनेशनल कंपनियों को प्रोडक्ट ही खरीदते है ।  वही  प्रोडक्ट में इन कंपनियों को उनके ब्रांड टेक के साथ सप्लाई करता हूं उनके लिए गारमेंट्स बनाता हूं।

लेकिन कोई इंडियन स्पोर्ट्स वियर का ब्रांड नहीं है ,जो इंटरनेशनल कंपनियों को टक्कर दे सके । 2017-18 में एल्सिस स्पोर्ट्स वियर की शुरुआत की।  मैने क्रिकेटर शिखर धवन की विज्ञापन के लिए साइन किया । लोगो की पसंद को जानने के लिए टीम फील्ड में जाने लगा । ऑनलाइन वेबसाइट बनाकर भी रिटेल में  प्रोडक्ट को बेचना शुरू किया।Kapil sharma  success story: गरीबी से कॉमेडी किंग तक

आज  कॉमनवेल्थ गेम्स ,क्रिकेट फुटबॉल से लेकर स्पोर्ट्स  के हर सेक्टर में हमारी कंपनी के कपड़ों की डिमांड है।  विराट कोहली से लेकर महेंद्र सिंह धोनी ,रोहित शर्मा तक हमारी कंपनी के बने कपड़े पहनते हैं ।

रोशन वैद: धमकी ,ओर कंपनी को चुनौती

रोशन कहते हैं कि मैं आपको ब्रांड का नाम तो नहीं बताऊंगा लेकिन एक बड़ी इंटरनेशनल कंपनी ने धमकी देते हुए कहा कि या तो मैं अपना ब्रांड  बंद कर दूं या वो  मेरी मैन्युफैक्चरिंग बंद कर देंगे । इसकी वजह से ऑर्डर से करीब 60% की कमी आ गई  । लेकिन मैं लगातार मार्केट में लगातार  बना रहा ।

ग्लोबल बिजनेस मॉडल

देश के अलावा अमेरिका, यूरोप मिडल ईस्ट कंट्री में भी स्पोर्ट्स वियर की  सप्लाई  करता हु । अभी  स्पोर्ट्सवेयर बनाने की चार फैक्ट्री है । दूसरी देसी विदेशी कंपनियों को उनके ब्रांड नाम के साथ स्पोर्ट्स वियर बनाकर  सप्लाई करता हूं । एल्सिस ब्रांड से  स्पोर्ट्स वियर को अपने  स्टोर्स के अलावा  ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के जरिए बेचता  हूं । अभी तक 10 स्टोर है  जबकि अलग-अलग रिटेलर्स के जरिए हम पूरे देश में स्पोर्ट्स  बियर बेचते हैं।   2023 में कंपनी का  टर्नओवर करीब 500 करोड़ का था । 

रोशन वैद की सक्सेस स्टोरी हमे सिखाती है कि छोटी शुरुआत  से भी बड़ा साम्राज्य बनाया जा सकता है । Failure कभी अंत नहीं होता बल्कि सपने की शुरुआत होता है । अगर हमे Skill सीखने के लिए देश-विदेश जाना पड़े, तो जाओ ।https://en.wikipedia.org/wiki/Sportswear

नोट – यह कहानी  विभिन्न श्रोतों से ली गई है इसलिए समय के साथ कहानी में कुछ चेंज भी देखने को मिल सकते है ।

ऐसी ही नई – नई कहानियों के लिए सफलता की कहानी के साथ जुड़े रहे, थैंक्स ..

 

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