दो भाइयों के झगड़े से बिजनेस की शुरुआत
Oreo success story 1890 में शुरू होती है, जब अमेरिका में जेकब लूज और जोसेफ लूज नाम के दो भाई थे । दोनों ने अमेरिका में एक बिस्कुट बनाने बाली बेकरी ‘ सहसाईन बेकरी ‘ खोली । जेकब ने इस बेकरी को कंपनी की सकल दी ओर उसके हेड बन गए ।ओर जोसेफ बोर्ड मेंबर में शामिल हो गए ।
इसी बीच जेकब की तबियत खराब रहने लगी ।उनकी गैर हाजिरी में जोसेफ ने कंपनी को संभाला। और समय के साथ कंपनी बड़ी हुई, लेकिन रणनीति को लेकर दोनों भाइयों में मतभेद हो गए।जोसेफ कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी कंपनियों के साथ विलय चाहता था । जबकि लुईस इसके खिलाफ था। यही मतभेद आगे चलकर झगड़े में बदल गया और दोनों भाइयों के रास्ते ओर काम भी अलग हो गए।
जोसेफ ने कंपनी के बोले को आगे बढ़ाया । 1912 में जोसेफ ने कई बेकरी कंपनियों को मिलाकर National Biscuit Company (Nabisco) बनाई। वहीं जेकब ने अपनी अलग कंपनी शुरू की, जो बाद में Sunshine Biscuit Company के नाम से जानी गई।इस कंपनी की हाइड्रोक्स कुकीज मार्केट हे हिट थी। यहीं से Oreo और उसके सबसे बड़े कॉम्पिटिटर Hydrox के बीच मुकाबला शुरू हुआ।मार्केट में कंपटीशन को बनाए रखने के लिए दोनों ही कंपनी ने कुकीज की पैकेजिंग एक सी रखी।
Oreo की पहली असफलता
जब Oreo पहली बार लॉन्च हुआ, तो लोगों को यह खास पसंद नहीं आया। उस समय Hydrox कुकी ज्यादा पॉपुलर थी । क्योंकि वह दूध में डुबाने पर जल्दी खुल जाती थी और स्वाद भी लोगों को ज्यादा पसंद आता था। Oreo को शुरुआती दौर में मार्केट से अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला। इसके बाद कंपनी ने oreo की मार्केट में जगह बनाने के लिए अलग अलग स्ट्रेजी बनानी शुरू कर दी ।
Oreo को सफल बनाने के लिए कंपनी ने समय-समय पर इसके नाम और डिजाइन में बदलाव किए। 1921 में प्रोडक्ट का नाम बदला कर oreo Sandwich कर दिया गया। 1937 में इसका नाम फिर से बदलकर Oreo Creme Sandwich किया गया।1950 में ओरियो ने मार्केटिंग पर दुगना खर्च शुरू कर दिया । बही नबिस्को ने आइसक्रीम में oreo को इस्तेमाल करने का लाइसेंस देना शुरू कर दिया । 1974 मैं इस ओरियो चॉकलेट सैंडविच कुकी के नाम से पहचाना जाने लगा । पॉपुलरिटी बढ़ाने के लिए इसकी डिजाइन समय समय पर बदलती रही। अंत में 1952 में एक फूड साइंटिस्ट William A. Turnier ने Oreo का नया डिजाइन तैयार किया । जो आज भी लगभग वैसा ही है
नेगेटिव ब्रांडिंग ने बदली किस्मत
इतनी प्रयास के बाबजूद भी ओरियो मार्केट में जगह नहीं बना पा रहा था । तब कंपनी ने पॉपुलरिटी बढ़ाने के लिए अपने कॉम्पिटिटर Hydrox के खिलाफ नेगेटिव ब्रांडिंग शुरू की। कंपनी ने हाइड्रोक्स को रियल प्रोडक्ट नहीं बताया और कहा कि इसमें मिलावट है।Hydrox को सस्ता, नकली और खराब प्रोडक्ट बताकर उसकी तुलना टॉयलेट क्लीनर हार्पिक के साथ करना शुरू की । इस रणनीति का फायदा Oreo को मिला और लोगों की नजर में Oreo एक प्रीमियम ब्रांड बन गया।Nestle Success Story in Hindi : 1886 नेस्ले की सफलता की कहानी ।
जबकि हाइड्रोक्स सस्ता और बेकार प्रोडक्ट बन गया ।1950 के बाद Oreo की लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी।मार्केटिंग और लाइसेंसिंग का कमाल1950 के बाद Oreo ने मार्केटिंग पर दोगुना खर्च किया।आइसक्रीम और डेज़र्ट कंपनियों को Oreo इस्तेमाल करने का लाइसेंस दिया। कंपनी ने अलग-अलग देशों के लिए अलग फ्लेवर लॉन्च किए ।जैसे ग्रीन टी ओरियो – सिर्फ चीन और जापान में बिकती है।
कई सालों तक ओरियो का स्वामित्व क्राफ्ट नामक फूड कंपनी के पास रहा । 2012 में अमेरिकी फूड कंपनी Mondelez International ने Oreo को खरीद लिया। आज Oreo की बिक्री 100 से ज्यादा देशों में होती है। अमेरिका और चीन के बाद भारत Oreo का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट है। मांडलेज इंटरनेशनल ओरियो के अलावा cadbary deyri milk, फाइब स्टार, बॉर्नविटा,टाइगर टैंग,जैसे प्रोडक्ट भी बनाती है
भारत में Oreo की एंट्री
2011 में Oreo को भारत में’ Cadbury Oreo ‘ के नाम से लॉन्च किया गया। Cadbury पहले से ही भारत में एक भरोसेमंद ब्रांड था। जिससे Oreo को तेजी से पहचान मिली।एल्बरेज एंड मार्शल कंपनी के मुताबिक, भारत में बिस्कुट मार्केट लगभग 45,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें कुकीज का मार्केट शेयर 35–40%है । जबकि सामान्य बिस्किट का 25% ओर क्रीम बिस्कुट और क्रैकर्स का 15% है ।
Oreo से जुड़ी कुछ रोचक बातें ओर फैक्ट्स
एक Oreo कुकी बनाने में लगभग 2 घंटे लगते हैं।
Oreo के नाम से अमेरिका में नेशनल डे मनाया जाता है।
लिमिटेड एडिशन में Star Wars थीम Oreo भी लॉन्च किए गए।
18 देशों में oreo की फैक्ट्री है ।कुछ Oreo दो अलग-अलग क्रीम फ्लेवर के साथ आते हैं।
हर साल दुनियाभर में 4 हजार करोड Oreo कुकीज बनती है।
2012 में कुकी ब्रांड को 100 साल पूरे हुए।
Oreo Success Story से क्या सीखें?
Oreo की कहानी हमें सिखाती है कि:असफलता के बाद भी सही रणनीति से सफलता मिल सकती है।ब्रांडिंग और मार्केटिंग बिजनेस की दिशा बदल सकती है।कॉम्पिटिशन से डरने के बजाय उसे समझदारी से हैंडल करना चाहिए।
Oreo Success Story , यह साबित करती है कि एक साधारण कुकी भी सही सोच से दुनिया का सबसे बड़ा ब्रांड बन सकती है।
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