Dettol success story in hindi : 1 लाख करोड़ रेवेन्यू

Dettol success story in hindi , मौत से बचने के लिए बना डिटॉल आज कंपनी का रेवेन्यू एक लाख करोड़ ।।
क्या आप जानते है कि आज भारत के लगभग हर घर में रखा हुआ डिटॉल एक ऐसी क्रांति का प्रतीक है । जिसने लाखों लोगों की जान बचाई थी । डिटॉल की सफलता की कहानी सिर्फ एक प्रोडक्ट की कहानी नहीं है , बल्कि यह साइंस ,धैर्य ,ओर भारतीय बाजार की समझ की कहानी है ।
Safltakikahani में आज हम बात करेंगे dettol कंपनी के बारे में जिसने लोगों को मौत से बचाने के लिए एक प्रोडक्ट बनाया, जो आज दुनियाभर में प्रसिद्ध है ।
डिटॉल की शुरुआत –
डिटॉल भारत को अंग्रेजों की देंन है। यह एक ब्रिटिश कंपनी है ” “,RECKITT ” जिसकी नींव 1840 में रखी गई थी । इस कंपनी ने 1930 में डिटॉल बनाना शुरू किया ।
नई मांओं एवं नवजात को बचाने के लिए बना डिटॉल(1840- 1930)
Dettol success story in hindi, की शुरुआत लंदन से हुई थी । जब आइजैक रैकेट ने लंदन में स्टार्च बनने की फैक्ट्री शुरू की । आइजक के चार बेटे थे जॉर्ज ,फेड्रिक,फ्रेसिल,और जेम्स । जॉर्ज एंड फेड्रिक दोनों ही फैमिली बिजनेस से मदद करते थे । फेड्रिक पेशे से साइंटिस्ट थे । कंपनी ने 1849 में “अरारोट पाउडर “ के रूप में पहला हेल्थ प्रोडक्ट लॉन्च किया। जो नवजात बच्चों के लिए था ।
डिटॉल बनाने का कारण –
Dettol success story in hindi । आज से लगभग 100 साल पहले सेप्सिस इन्फेक्शन दुनिया भर में फैला था ।इसकी वजह से बच्चों को जन्म देते वक्त महिलाओं की मौत हो जाती थी । कई केस में नवजात भी मर जाते थे। दरअसल उस समय मेडिकल साइंस में दवा एवं हाइजीन दोनों की कमी थी ।इस वजह से इन्फेक्शन होने से बॉडी अपनी ही टिशु सेल्स को डैमेज करने लगती थी ।भारत में इसी वायरस की वजह से मांओं एवं बच्चों की मौत हो रही थी ।Cello success story in hindi :- 13000 करोड़ का रेवेन्यू
लोग इस तरह की मौत की खबर सुनकर सुनकर परेशान हो जाते थे।
आइजैक इस परेशानी का कुछ हल निकालना चाहते थे । ऐसे में आइजक अपने बेटों की मदद से इसके बचाव के लिए 1933 में ब्रिटेन के अस्पतालों में एक केमिकल टेस्ट किया। यह बही केमिकल था ,जिसका इस्तेमाल डॉक्टर एवं और हेल्थ प्रोफेशनल डिलीवरी से पहले औजार साफ करने के लिए करते थे । अच्छी बात यह थी कि 2 साल बाद रिपोर्ट से पता चला की सेप्सिस केस में 50% तक की कमी हो गई है ।
डेटॉल का पहले का नाम –
कंपनी ने इसका नाम PCMXL (पेश क्लोरो मेटा एक्सेलोन) रखा। इसमें क्लोरोक्सिलोन नमक कैमिकल होता है जो सर्जिकल ओर स्किन इंफेक्शन को रोकता था।
यह नाम मार्केट में ज्यादा पॉपुलर नहीं हुआ। जिसके बाद इसका नाम बदलकर पहले डिटॉक्स और फिर डिटॉल” DETTOL “रख दिया ।
डिटॉल की भारत में नींव –
Dettol success story in hindi, 1940 तक भारत के अस्पताल में डिटॉल का इस्तेमाल होने लगा था। इसके बावजूद भारत भारत के घरों में डिटॉल अपनी जगह नहीं बन पा रहा था। इसकी वजह से कंपनी ने तलाश करनी शुरू की तो पता चला कि भारतीय घरों में चोट लगने पर हल्दी जैसे घरेलू नुस्खे को पसंद करते हैं ।
कंपनी ने इसे पॉपुलर करने के लिए भारतीय डॉक्टर से संपर्क बनाया
जब डॉक्टर मरीज की पर्ची पर इसका नाम लिखने लगे तब आम भारतीय घरों में ऐसे लेकर विश्वास बड़ा । इसके बाद रैकेट कंपनी ने 1945 में भारत में डिटॉल कंपनी की नींव रखी ।
इससे पहले ब्रिटेन से इंपोर्ट किया जा रहा था। डिटॉल ने समय के साथ बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को हमेशा अपडेट रखा कंपनी ने समय पर दूसरे प्रोडक्ट को शामिल किया। 1979 में कंपनी ने साबुन ,स्प्रे और हैंडवाश बनाना शुरू किया।
1990 में कम्पनी ने लिक्विड हैंडवाश ओर फ्लोर क्लीनर भी बनाए । आज कंपनी के 200 से ज्यादा प्रोडक्ट है, और इसका रेवेन्यू 1 लाख करोड़ से भी ऊपर है।
डिटॉल कंपनी अकेले भारत में लगभग हर वर्ष हजारों करोड़ का बिजनेस करती है ।https://en.wikipedia.org/wiki/Dettol
Dettol success story in hindi , हमे सिखाती है कि अगर हम लोगों की प्रॉब्लम को समझे ओर सही दिशा में अपना काम करे तो हम भी करोड़ों की कंपनी बना सकते है ।
ऐसी ही सफलता की कहानी के लिए जुड़े रहे SaflataKiKahani.com के साथ । Thanks…
FAQs : डिटॉल के बारे में सवाल
Question – डिटॉल की शुरुआत कब हुई ?
Ans – डिटॉल की शुरुआत 1930 में आइजैक रेकिट ने की थी ।
Question – डिटॉल का रेवेन्यू कितना है?
Ans – डिटॉल का रेवेन्यू करीब 1 लाख करोड़ से भी ऊपर है।
Question – डिटॉल भारत में कब आया ?
Ans – डिटॉल 1940 तक भारत में अस्पतालों में बिकने लगा था ।
Question – डिटॉल के कितने प्रोडक्ट है?
Ans – आज डिटॉल के 200 से ज्यादा प्रोडक्ट मार्केट में उपलब्ध है ।
00 से ज्यादा प्रोडक्ट मार्केट में उपलब्ध है ।
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