Cello success story in hindi: 13000 करोड़ का रेवेन्यू

Cello success story in hindi : प्लास्टिक की चूड़ियां और जूते बनाने से शुरू हुई कंपनी आज 13000 करोड़ का रेवेन्यू
Salftakijahani में आज हम बात करेंगे सेलों कंपनी की शुरुआत एवं उसकी सफलता की कहानी के बारे में
कंपनी की शुरुआत –
Cello success story in hindi में हम बात करेंगे कंपनी की शुरुआत के बारे में , कंपनी की शुरुआत घीसुलाल राठौड़ ने मुंबई के गोरेगांव से की थी उन्होंने 7 मशीनों के साथ अपना कारोबार शुरू किया तब कंपनी केवल प्लास्टिक की चूड़ियां और जूते बनाती थी | बाद में धीरे धीरे स्टेशनरी एवं किचन सैगमेंट प्रोडक्ट बनाने लगी ,आज कंपनी 1700 से ज्यादा प्रोडक्ट बनाती है और कंपनी की नेटवर्थ 13000 करोड़ रुपए है |
CELLO कंपनी की स्थापना –
Cello success story in hindi, ,जब घीसुलाल ने प्लास्टिक के कारोबार में कदम रखा था,तब प्लास्टिक का बहुत चलन था क्योंकि उस वक्त पीतल, ताबे ,स्टील के बर्तन काफी महंगे होते थे इसलिए घीसुलाल ने पलास्टिक के समानों पर ही ध्यान दिया।MDH success story: 1919 MDH वाले दादाजी की कहानी
1980 के दशक तक आते इसका बिजनेश चलने लगा था । उस वक्त बाजार में प्लास्टिक की डिमांड भी बढ़ने लगी थी,इस डिमांड के देखते हुए घीसुलाल ने सोचा कि दूसरी कंपनियों के लिए प्रोडक्ट बने के लिए खुद का ब्रांड बनाया जाए ।इसके बाद उन्होंने छोटी सी कंपनी खरीदी और नाम दिया” CELLO ” !
Cello कंपनी की कामयाबी का राज —
घीसुलाल एक बार बिजनेस के सिलसिले में अमेरिका गए थे ,तो उन्होंने बहा देखा कि वहां के लोग प्लास्टिक के कंटेनरों में खाना रखते है जो लंबे समय तक गरम रहता है,तब वहां उन्हें केसरोल के बारे में पता लगा । उन्होने भी वहां से आकर 1980 में में इसे भारत में लॉन्च किया ,इस प्रोडक्ट ने मार्केट में आते ही लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया ।
भारतीय किचन में सेलों के इस केसरोल ने अपनी एक अलग जगह बनाई,90 के दशक में कंपनी ने स्टील बेयर ,क्लिनिंग प्रोडक्ट लॉन्च किए ,कंपनी ने हमेशा ही ग्राहक को पसंद को ध्यान में रखते हुए प्रोडक्ट लॉन्च किए ,यही कंपनी की कामयाबी का राज है
1995 में बनाया पहला पेन-
Cello success story in hindi ,1995 में कंपनी ने पेन बनाने का फैसला किया ओए सेलों ग्रिपर लॉन्च किया,यह पेन स्टूडेंट को काफी पसंद आया ,शुरू में कंपनी ने क्वालिटी ओर इनोवेशन पर ध्यान दिया ओए आगे चलकर कंपनी देश की सबसे बड़ी पेन मेन्युफेक्चरिंग कंपनी बन गई।अब भी भारत में स्टेशनरी मार्केट में सेलों ने अपनी 37% हिस्सेदारी बनाई हुई ,हर रोज कंपनी 50 लाख पेन बनाती है,स्टूडेंट के लिए सेलों ने सेलों ग्रिपर ,सेलों मैक्सराइटर ,सेलों बटरफ्लों जैसे पेन बनाए।
नए प्रोडक्ट और इनोवेशन
1990 तक स्टील का चलन अधिकतर बंद हो गया लेकिन 2000 के दशक में फिर से स्टील चलन में आ गया,इस फोरम में कंपनी ने महसूस किया कि लोग वापस स्टील की और बढ़ रहे है।कंपनी ने स्टील और प्लास्टिक से बने बोतले और फ्लास्क बाज़ार में उतारे , ,सेलों को बनी हुई बोतल, जार ,केसरोल ओर लंच बॉक्स को लोगो ने हाथों हाथ लिया ,इनमें अन्दर स्टील लगा हुआ था और बाहर प्लास्टिक से बना हुआ था।
इसके बाद सेलों ने नॉन स्टिक बर्तन ,पेन ग्रिल टोस्टर,काफी मेकर ,ग्राइंडर,आदि प्रोडक्ट मार्केट में उतारे।
ऑनलाइन मार्केट में कदम (2017)
बाद में कंपनी ने ऑफलाइन के बाद ऑनलाइन मार्किट पर फोकस किया ओर 2017 में फ्लिपकार्ट और अमेजन के साथ मिलकर ऑनलाइन प्रोडक्ट बेचना शुरु किया जिससे कंपनी का रेबेन्यू 12 % तक बढ़ा।
आज कंपनी का रिवेन्यू 13000 करोड़ से ऊपर है वर्तमान में कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर घीसुलाल के बड़े बेटे प्रदीप घीसुलाल राठौड़ है।”

Cello success story in hindi , हमे सिखाती है कि इनोवेशन और ग्राहकों की जरूरत को समझना ही असली सफलता की कुंजी है। https://en.wikipedia.org/wiki/Cello
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