Wipro success story in hindi ,में आज हम बात करेंगे देश की तीसरी सबसे बड़ी it कंपनी wipro और it बिजनेस कहे जाने वाले अजीम प्रेमजी के बारे में ,
Wipro success story in hindi में हम जानेंगे कि कैसे एक 21 वर्षीय लड़का जो अपने पिता की मौत की वजह से भारत आया , और उसने अपने पिता की डूबती हुई कंपनी को संभाला और कैसे उसे आसमान के चमकते हुए सितारों के बीच स्थापित कर दिया। कैसे उसे एक आधुनिक बिजनेस ने भारत के टॉप रईसों में शामिल कर
Wipro success story in hindi ,अजीम प्रेमजी का जन्म 1945 को वर्मा में हुआ उनके पिताजी हुसैन हाशिम प्रेमजी का चावल का बिजनेस था । वर्मा में लोग उन्हें राइस किंग के नाम से पुकारते थे ।लेकिन उन्हें अंग्रेजों की हुकूमत के कारण यह बिजनेस बंद करना पड़ा । हाशिम प्रेमजी नए बिजनेस की तलाश में मुंबई से 350 किलोमीटर दूर अमलनेर पहुंचे वहां पर उन्होंने वनस्पति तेल की छोटी से मील मालिक को कर्ज दिया था ।उसे वापस लेने के लिए गए तो मिल मालिक कर्ज चुकाने में असमर्थ था उन्हें हसीन प्रेम जी को कर्ज के बदले में मिल को खरीदने के लिए कहा ।Jonsan end jonsan success story
हाशिम प्रेमजी मिल खरीदने के बाद वनस्पति तेल के कारोबार में उतर गए।तेल की कंपनी की शुरुआत वे किसानों से मूंगफली खरीदते और बाद में उसे प्रोसेस करके ग्राहकों को बेचते थे ।25 दिसंबर 1945 को उन्होंने कंपनी का नाम “वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट लिमिटेड ” रखा । यह कंपनी मात्र 2 सालों में फरवरी 1946 तक मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हो गई थी ।कंपनी चलने के साथ में ही उन्हें 1950 को कंपनी में पहला घाटा हुआ।
Wipro success story in hindi 11 अगस्त 1966 को हाशिम प्रेमजी की मृत्यु हो गई, पिता की मृत्यु के समय अजीम प्रेमजी अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे । जब उनकी उम्र केवल 21 साल की थी पिता की मृत्यु की खबर सुनते ही पढ़ाई छोड़कर भारत आ गए थे, और उन्होंने पिता की डूबती कंपनी को संभाला बाद में प्रेम जी अपनी कंपनी का विस्तार करने के लिए मन बना चुके थे वह वनस्पति तेल साबुन बनाने के कारोबार में आगे बढ़ना चाहते थे।
1975 में कंपनी ने अपना पहला विस्तार किया उन्होंने हाइड्रोलिक कॉम्पोनेंट्स बनाने के बिजनेस के में कदम रखा ।बाद में इसका नाम रखा ” फ्लूइड पावर ” इस कारोबार में उन्हें बड़ी सफलता हासिल लगी ।उन्होंने बाद में आईटी कंपनी में जाने का मन बनाया लेकीन उस वक्त भारत में एक आईटी कंपनी थी जिसका नाम था IBM था ।लेकिन 1975 में नई सरकार के बनने के बाद आईबीएम को भारत छोड़कर जाना पड़ा उसके बाद अजीम प्रेमजी ने इस कारोबार का फायदा उठाया और कंप्यूटर क्षेत्र में उतरने के लिए लाइसेंस के लिए अप्लाई कर दिया।
Wipro success story in hindi, साल 1979 में प्रेम जी को इसका लाइसेंस मिल गया था ,और पर कंपनी कंप्यूटर बनाने के बिजनेस में उतर गई, इसके बाद उन्होंने “वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल लिमिटेड “का नाम बदलकर विप्रो (WIPRO) कर दिया ।साल 1965 में जिस कंपनी की कीमत मात्र 7 करोड़ थी ,1980 तक 16 करोड़ पहुंच गई ।और आज विपो 2.18 लाख करोड़ के मार्केट कैप वाली कंपनी बन चुकी है । 53 साल के बाद अजीम प्रेमजी ने चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया और अपने बेटे रिशद प्रेमजी जी को कंपनी का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया ।आज विप्रो का कारोबार दुनिया के 66 देशों में है।
उन्होंने साल 2000 में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन खोला गया। वर्तमान में उन्होंने अपना सारा कारोबार अपने बेटों को सौंफ दिया । 2019 को प्रेम जी ने 52750 करोड रुपए के अपने शेयर फाउंडेशन में दान कर दिए आज अजीम जी देश के सबसे बड़े दानदाताओं में से एक है https://en.wikipedia.org/wiki/Wipro
Wipro success story in hindi ,हमे बताती है कि बड़ा बही बनता है जो बार बार फैल होने पर भी आगे बढ़ते रहे।”धन्यवाद”
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