MDH success story, जब भी भारत में मसाले की बात होती है तो MDH का नाम सबसे पहले आता है । लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस ब्रांड के पीछे जिस व्यक्ति की मेहनत , इमानदारी और संघर्ष छुपा है । लोग उन्हें MDH वाले दादाजी के नाम से जानते है । जिनका असली नाम धर्मपाल गुलाटी है। आज mdh का टर्नओवर 2000 करोड़ से ऊपर है ।
लेकिन बहुत कम लोग जानते ही की धर्मपाल गुलाटी ने अपने जीवन की शुरुआत साबुन, तेल ओर आईना बेचने से की थी। लेकिन आज उनकी कंपनी का रेवेन्यू 2000 करोड़ से भी ज्यादा है।
Safltakikahani में आज हम बात करेंगे संघर्ष, धैर्य और कभी हर नहीं मानने वाले धर्मपाल गुलाटी और उनकी कंपनी MDH के बारे में …
MDH की शुरुआत
MDH success story, 1919 में चुन्नीलाल गुलाटी ने “महाशियां दी हट्टी “नाम की मसाले की दुकान सियालकोट (अब पाकिस्तान) में खोली । घर में बने शुद्ध मसाले का स्वाद जल्दी इसके इलाके के लोगों को पसंद आने लगा था ।
1923 में उनके घर बेटे का जन्म हुआ था , जिनका नाम धर्मपाल
इसी बच्चे ने आगे चलकर दुनिया भर में MDH की पहचान बनाई। धर्मपाल को पढ़ने लिखने में कुछ ज्यादा रुचि नहीं थी ।उन्होंने पांचवी के बाद स्कूल जाना छोड़ दिया। उनकी रुचि बिजनेस में थी इसलिए 10-12 साल की उम्र में धर्मपाल ने घूम-घूम कर साबुन और आईना बेचने का काम किया।
उन्होंने और भी कामों में हाथ आजमाया, क्योंकि वह खुद को किसी भी तरह सफल बनाना चाहते थे । हर काम में असफल होने के बाद धर्मपाल ने अपने पिता के काम में हाथ बटाना शुरू किया। पिता का बिजनेस भी तेजी से बढ़ रहा था ।सियालकोट में लोग उन्हें “देगी मिर्च वाले” के नाम से जानने लगे थे ।
1947 में जब देश आजाद हुआ तो उनका बंटवारा हो गया। बंटवारे के बाद गुलाटी परिवार दिल्ली पहुंचा । बंटवारे ने गुलाटी के जीवन को बदल दिया । उन्हें उस बात का फैसला करना था ,कि पाकिस्तान में बना बनाया कारोबार छोड़कर भारत चले जाए या फिर सियालकोट में रहकर बिजनेस को आगे बढ़ाया जाए अंत में उन्होंने भारत आने का फैसला किया । इस तरह वे लोग सियालकोट छोड़कर अमृतसर पहुंच गए और वहां रहने लगे। MDH success story in hindi,
इसी बीच धर्मपाल को अंदर से कुछ कर गुजरने की इच्छा फिर से बेचैन करने लगी थी । उन्होंने पिता से ₹1500 लिया और छोटे भाई के साथ दिल्ली आ गए।
धर्मपाल दिल्ली में व्यापार की तलाश में आए थे ।उन्होंने ₹650 में तांगा खरीदा और सवारी उठाने लगे ,लेकिन उनकी कमाई अच्छी नहीं हो रही थी। घर का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा था तब धर्मपाल को लगा कि फिर से मसाले का कारोबार शुरू किया जाए । धर्मपाल ने अपने पिता चुन्नीलाल के साथ में मिलकर दिल्ली के अलग-अलग मार्केट से मसाले को खरीद कर बेचना शुरू किया । इससे उनकी दुकान चल पड़ी ।
1965 में एमडीएच प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी रजिस्टर कराई और इस तरह से एमडीएच की शुरुआत हुई ।
MDH के विज्ञापन ने मार्केट में जगह बनाई । उन्होंने दिल्ली में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए अखबार में विज्ञापन देना शुरू किया।
विज्ञापन में ब्रांड का नाम ” सियालकोट देगी मिर्च वाले की महाशियां दी हट्टी रखा गया ।
टीवी एड में धर्मपाल ख़ुद एक्टिंग करने लगे थे । एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि MDH के लिए एक विज्ञापन की शूटिंग चल रही थी,उसी दौरान दूल्हे के पिता की भूमिका निभाने वाले व्यक्ति सही से एक्टिंग नहीं कर पा रहे थे । तब धर्मपाल ने खुद ही यह भूमिका निभाने का फैसला किया और तब से हर विज्ञापन में दिखाई देने लगे थे ।तब से लोगों उन्हें एमडीएच वाले दादाजी के नाम से जाने लगे।https://en.wikipedia.org/wiki/MDH_(spice_company)
2021 में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले सीईओ बने धर्मपाल गुलाटी MDH के सीईओ धर्मपाल गुलाटी FMCG कंपनी के सीईओ में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले व्यक्ति बने ।उनकी सैलरी 25 करोड रुपए थी, लेकिन बे अपनी सैलरी का 90% दान कर दे देते थे ।
एक नजर इस पर भी
MDH success story, 1919 में सियालकोट में चुन्नीलाल गुलाटी ने महाशियां दी हट्टी नाम से दुकान खोली ।
1923 में बेटे का जन्म हुआ नाम था धर्मपाल ,जो बाद में MDH वाले दादा जी के नाम से फेमस हुआ ।
1947 में परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया।
1959 में बिजनेस रिस्पांस को देखते हुए दिल्ली के कीर्ति नगर में मसाले की पहली फैक्ट्री खोली ।
1975 में चैरिटी के मकसद से कीर्ति नगर में 10 सीट वाला अस्पताल गुलाटी परिवार ने खोला ।
1984 में एमडीएच में विज्ञापन लॉन्च किया।
चुन्नीलाल ट्रस्ट के तहत एमडीएच स्कूल की स्थापना भी की गई थी ।
2020 में धर्मपाल गुलाटी की मृत्यु के बाद बेटे राजीव गुलाटी ने कंपनी के सीईओ का पद संभाला।Amazon Success Story in Hindi |
MDH success story , हमे सिखाती है कि अगर कुछ बड़ा करने का जज्बा हो तो आदमी कुछ भी कर सकता है।
नोट – MDH success story ,ये कहानी किताबें एवं उनके दिए हुए इंटरव्यू ओर सार्वजनिक श्रोतों के आधार पर लिखी गई गई है ,धन्यबाद next story.
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