ज्यूस बेचने वाले ने शुरू किया था T-Series ,कैसे बना दुनिया का सबसे बड़ा म्यूजिक और YouTube चैनल – 4200 करोड़ का रेवेन्यू।
जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो करोड़ों लोगों में एक पंजाबी परिवार भी दिल्ली आ गया। घर चलाने के लिए परिवार के मुखिया ने फल और जूस का बिजनेस शुरू किया। काफी सालों बाद इस घर में जन्मे ने कैसेट्स बेचना शुरू किया । इस बच्चे की शुरू की कंपनी आज इंडिया का लीडिंग म्यूजिक लेवल टी सीरीज ” T- Series “है।
15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ तो बंटवारे का दंश सहन करते हुए भारत-पाकिस्तान में दंगे शुरू हो गए। और लोग इधर-उधर जान बचाने के लिए भागने लगते हैं। पाकिस्तान के बेस्ट पंजाबी के झां प्रोविंस में चल रहे हिंदू विरोधी दंगों की मार एक पंजाबी परिवार भी झेलता है। यह परिवार अपना घर कारोबार छोड़कर दिल्ली आ जाता है। परिवार के मुखिया का नाम चंद्रभान कुमार दुआ थ।
दिल्ली के दरियागंज इलाके में चंद्रभान सड़क पर चादर बिछाकर फल बेचना शुरू कर देते हैं । चंद्रभान दिन में जिस चादर को बेचकर दिन में फल भेजने उसी को रात में ओढ कर सोते थे ।
चंद्रभान के घर 5 मई 1956 को एक बच्चा का जन्म होता है और नाम रखा जाता है गुलशन कुमार दुआ ।
गुलशन भी आम छोटे व्यापारियों के बच्चों के जैसे ही बड़े होते हैं । 14 साल की उम्र में गुलशन अपने पिता की फल और जूस की दुकान में मदद करने लगते हैं ।
गुलशन को गाना सुनना बहुत पसंद था। वो अपने पैसे बचाकर कैसेट्स खरीदते थे। बाद में वो अपने इस शौक को व्यापार में बदलने की सोचने लगे। गुलशन के पिता चंद्रभान म्यूजिक कैसेटस के बिजनेस के लिए माने जाते थे।
इस काम में उनके छोटे भाई कृष्ण कुमार भी मदद करते थे। इस तरह 23 साल के गुलशन अपने पिता की मदद से दरियागंज में रिकॉर्ड और ऑडियो कैसेट की दुकान खोलते हैं । धीरे-धीरे व्यापार बढ़ने लगता है ।
इंपोर्ट पॉलिसी का बदलना ओर गुलशन के कारोबार में बढ़ोतरी
1970 के दशक में टेप रिकॉर्डर को विदेश से लाना पड़ता था। साथ ही रिकॉर्ड्स बहुत महंगे होते थे। इन दोनों ही कारणों से हिंदुस्तान में गानों का शौक लेवल अमीरों तक ही रहता था । लॉयर ओर मिडिल क्लास इस शौक को करने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। सरकार की ओर से इंपोर्ट एक्सपोर्ट के नियमों बदलाव हुए तो ।
इसके बाद भारत में टैप रिकॉर्डर भी आने लगते हैं । और आम आदमी के बीच डिमांड बढ़ने लग जाती है । अब जब टेप रिकॉर्डर देश में आ ही गया तो उसे चलाने के लिए कैसे की जरूरत तो होगी ही ।
गुलशन को यह बात समझ आ चुकी थी कैसेट्स को हर घर तक पहुंचाना फायदेमंद होगा । उन्होंने ग्राहक की डिमांड के मुताबिक गानों की कैसेट बेचना शुरू किया ।
1980 के दौर में देश में कॉपीराइट कानून में कुछ कमियां थी। इन खामियों का फायदा उठाते हुए गुलशन ने फिल्मी गानों और भजनों को भी शामिल कर किया । इसके लिए वह गानों को अपने लिए रिकॉर्डिंग करते थे। इस तरह वो एक कैसेट्स से कॉपी कर कहीं कैसेट बना लेते थे। इस काम में लगभग सात रुपए लागत आती थी। मार्केट में यह कैसेट्स ₹25 तक बिकते थे ।
1983 में 28 साल के यंग बिजनेसमैन गुलशन कुमार को लगने लगा कि अब कैसेट्स रिकॉर्ड कर बेचने से आगे का सोचना चाहिए। उन्होंने अपनी कंपनी शुरू करने की सोची। इस तरह 11 जुलाई 1983 को सुपर कैसेट इंडस्ट्री नाम से कंपनी शुरू कर दी ।
वो अपने कैसेट्स को बड़े स्तर पर मार्केट में उतारते हैं जिस कैसेट्स नाम T-Series हो जाता है ।
म्यूजिक इंडिया और ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया जैसी कैसेट्स निर्माता कंपनियों के नियम का भी टी-सीरीज कंपनी को बहुत फायदा हुआ। नियम के मुताबिक यदि एक बार कैसेट्स को रिलेटर या दुकानदार को बेच दिया जाता है तो उसके बाद कंपनी का कोई नाता नहीं होता था। इस नियम के चलते दुकानदारों और रिटेलर कैसेट्स खरीदने से बचने लगे और कैसे रिकॉर्ड इंडस्ट्री को घाटा होने लगा।
दरअसल उस वक्त कैसेट्स को ट्रक और मैनुअल एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता था। इसके कारण कैसे खराब और टूट जाते थे। साथ ही रील उलझ जाती थी। इस वजह से टी-सीरीज ने रिलेटर और दुकानदार को ऑफर दिया कि आप हमसे कैसेट्स ले जाइए जितने बिकते है बेचिए यदि खराब हो जाए तो वापस हमारा पास ले आइए।
उसका फायदा नुकसान हमारा होगा । गुलशन की यह ट्रिक काम कर गई और कंपनी ने सस्ते कैसेट्स बनाना शुरू कर दिया। जिस कैसेट्स की कीमत उस वक्त 25 से 30 रुपए थी गुलशन कुमार की कंपनी उसे 15 से 18 रुपए में बेचती थी ।
T-Series के जीरो लायबिलिटी मॉडल ने मार्केट में क्रांति ला दी थी । अब कंपनी ने अपनी कैसेट्स किराने की दुकान से लेकर रेडी ठेले पर बेचना शुरू कर दिया । ट्रेन बस और सड़क किनारे भी कंपनी की कैसेट बिकने लगे थे ।
कैसेट्स के बाद T-Series म्यूजिक प्रोडक्शन और रिकॉर्डिंग के बिजनेस में उतरी । कंपनी ने सबसे पहले 1984 में लालू राम मूवी के लिए साउंड ट्रैक बनाएं । जिसमें रविंद्र जैन ने संगीत दिया ।
इसके बाद 1988 में आमिर खान और जूही चावला की कयामत से कयामत तक मूवी के लिए साउंडट्रैक रिकॉर्ड किया । इस साउंड ट्रैक के 80 लाख से ज्यादा कैसेट्स बिके जो उस वक्त रिकॉर्ड बना। 1990 में महेशभट्ट के डायरेशन में बनी “आशिकी” मूवी बनती है इसके लिए T-Series ने गाने रिकॉर्ड किए ।
फिल्म के गानों ने मार्केट मे धूम मचा दी और की 2 करोड़ से ज्यादा कैसेट्स बिक गए । कंपनी देश भर में सबसे ज्यादा साउंडट्रैक कैसेट्स का रिकॉर्ड बनाती है । इस समय के सबसे बड़े म्यूजिक लेवल सारेगामा को पीछे छोड़ आगे बढ़ जाती है।
इसके बाद गुलशन कुमार 1992 – 93 बॉलीवुड में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले व्यक्ति बन जाते हैं ।
अब तक म्यूजिक प्रोडक्शन हाउस इंडस्ट्री में बड़ा नाम बन चुका था। इसके बाद कंपनी ने फिल्म प्रोडक्शन में हाथ आजमाया। 1989 में अपने प्रोडक्शन हाउस की पहली फिल्म लाल दुपट्टा मलमल को प्रोड्यूस करती है। इसके बाद T- Series ने महेश भट्ट के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया । 1990 में आई फिल्म आशिक को T-Series को प्रोड्यूस करती है। जिसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की।
सफलता के साथ-साथ टी सीरीज को सफलता का मुंह देखना पड़ा। लगातार कंपनी दो फ्लॉप फिल्में प्रोड्यूस करती है। इसके बाद 1995 कंपनी एक और फ्लॉप फिल्म बेवफा सनम बनती है ।
गुलशन अपने छोटे भाई कृष्ण को इस फिल्म से लॉन्च करते हैं यह फिल्म फ्लॉप हो जाती है लेकिन इसका साउंड ट्रैक दर्शकों को पसंद आया ।
ग्राहकों की डिमांड में लगातार बदलाव आ रहा था। T- Series ने अलग-अलग आर्टिस्ट के कैसेट्स को मार्केट में उतारा । इस प्रयोग से कंपनी को फायदा हुआ सोनू निगम ,कुमार सानू ,उदित नारायण, अनुराधा पौडवाल जैसे एक्टर भी रातों रात सुपरस्टार बन गए । गुलशन कुमार का मानना था कि हर टेलेंट को मौका मिलना चाहिए। इस वजह से वह नए आर्टिस्ट को मौका देते थे जब उन्हें लगता था कि वह आर्टिस्ट सुपरस्टार बन गया तब उसे छोड़ नए टैलेंट को खोजने लगते थे ।
इसके पास T-Series ने सोचा कि आखिर कब तक फिल्मी गानों के कैसेट्स बिकेंगे । कभी ना कभी ग्राहक भी इससे ऊब जाएंगे। इस सोच के साथ गुलशन ने भजन चालीसा मंत्र धार्मिक पाठ जैसी चीजों की रिकॉर्डिंग शुरू की ।
12 अगस्त 1997 को गुलशन कुमार रोज की तरह मुंबई के जीतेश्वर मंदिर में पूजा कर घर की ओर जा रहे थे । तभी कुछ लोगों ने उन्हें रोका और उन पर गोलियां बरसाने लगे । गुलशन को 16 गोली लगी जिससे बही उनकी मौत हो जाती है । गुलशन की हत्या के पीछे उसे वक्त की मुंबई अंडरवर्ल्ड का नाम सामने आता है।
गुलशन की हत्या के बाद टी सीरीज को संभालने के लिए उनके बेटे भूषण कुमार आगे आते हैं हालांकि भूषण को बिजनेस में कोई दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन उन्होंने गाने पसंद आते थे। भूषण ने कंपनी की कमान संभाली । जिसमें उनके उनके चाचा कृष्ण कुमार भी ब बिजनेस में उनकी मदद करते थे । इस वक्त तक कंपनी की सालाना आय 500 करोड रुपए के पार हो गई ।
2006 में भूषण ने T-Series का यूट्यूब चैनल शुरू किया। इसके बाद 2010 में अपना पहला वीडियो अपलोड करते हैं । 10 सालों के अंदर T- Series का यूट्यूब चैनल दुनिया का सबसे ज्यादा बड़ा चैनल बन जाता है ।
T- Series सबसे बड़ा म्यूजिक लेवल बनने के साथ यूट्यूब पर सबसे बड़ा चैनल भी चलाते है । इस टैग को कायम रखने के लिए T- Series किसी भी गाने पर यूट्यूब पर लॉन्च करने से पहले और बाद में 4 कम जरूर करते है ।
1.टेस्टिंग – किसी भी गानों को लॉन्च करने से पहले हम उसकी टेस्टिंग करते है उसमें देखा जाता है कि क्या गाने को गुनगुनाया जा सकता है।
2.मेलोडी – हम टेस्टिंग के बाद यह चेक करते की क्या गाना लोगों को पसंद आएगा और उसकी धुन लोगों को याद रहेगी।
3.ट्रेंड ड्रेसिंग – किसी गानों को लॉन्च करने से पहले T- Series पिछले तीन महीना के ट्रेड का एनालिस्ट करती है । जो ट्रेंड उस वक्त चल रहा है उसी के जैसा गाना लॉन्च किया जाता है ।
4.फीडबैक – गाने के लांच होने के बाद कंपनी लोगों से फीडबैक लेती है। ओर फीडबैक के मुताबिक ही अगले प्रोडक्ट को इंप्रूव करती है।
T-Series का प्लांट 275 एकड़ में फेंका हुआ है । जिसमें 1482 आर्टिस्ट काम करते हैं। 6000 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं। 35000 ज्यादा ऑडियो टाइटल ,2000 से ज्यादा वीडियो टाइटल ,35% इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री में शेयर । 4 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। 24 से ज्यादा देश में बिजनेस है । 13 फिल्मफेयर अवार्ड 15 स्क्रीन अवार्ड ओर आज 4165 करोड रुपए की कंपनी है। https://en.wikipedia.org/wiki/T-Series_(company)
T-Series की कहानी हमे सिखाती है कि सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि सोच, जोखिम और सही समय पर सही फैसला ही इंसान की आगे बढ़ता है । जिसने गुलशन कुमार ने दुनिया का सबसे बड़ा म्यूजिक साम्राज्य बना दिया।
ऐसी ही कहानी के लिए आप हमारे टेलीग्राम से जुड़ सकते हो । Thanks..
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