Haldiram success story in hindi : बीकानेर में एक छोटी सी दुकान से शुरुआत आज 80 देश में बिजनेस ओर 12000 करोड़ का रेवेन्यू ।
हल्दीराम ब्रांड अब नमकीन भुजिया और स्नैक्स की पहचान है। राजस्थान के बीकानेर में एक दुकान से शुरू हुई कंपनी का रेवेन्यू आज 12000 करोड रुपए से ज्यादा है
सफलता की कहानी में आज बम बात करेंगे हल्दीराम की कहानी के बारे में …
शुरुआत – 1937 में बीकानेर( राजस्थान )
संस्थापक – भीखाराम अग्रवाल (मारवाड़ी परिवार)
प्रोडक्ट – नमकीन ,भुजिया ,मिठाइयां और रेडी टू ईट फूड
रेवेन्यू – ₹ 12000 करोड़
Haldiram success story in hindi,राजस्थान में बीकानेर जिले के मारवाड़ी परिवार से आने वाले भीखाराम अग्रवाल ने 1937 में यहां एक छोटी सी चाय नाश्ते की दुकान खोली। भीकाराम के साथ उनके पोते गंगा बिसनजी अग्रवाल भी दुकान पर जाते थे ।
घर में गंगा बिसनजी को सब हल्दीराम कहते थे । इन्हीं के नाम पर दुकान का नाम भी हल्दीराम रख दिया गया । दुकान पर मिलने वाली भुजिया धीरे-धीरे लोगों की जवान पर चढ़ने लगी थी । कुछ सालों में हल्दीराम भुजिया की पहचान बन गई ।
कहां जाता है कि जब हल्दीराम सिर्फ 11 साल के थे, तब से ही वह एक कंपनी खोलना चाहते थे। इसी उम्मीद उन्होंने अपने दादा की दुकान में काम शुरू कर दिया ।
भुजिया बनाने के लिए अलग-अलग मसाले का इस्तेमाल करने लगे हल्दीराम
हल्दीराम का मन दुकान में नहीं लगता था, लेकिन जब भुजिया बनाया जा रहा होता ,तो वे फिर ध्यान से देखते और सीखने की कोशिश करते थे । तब उनकी दुकान पर भुजिया की खूब मांग होती थी। दुकान पर भुजिया का बिजनेस बढ़िया चल रहा था , लेकिन हल्दीराम इतने से संतुष्ट नहीं थे ।
वे बिजनेस को और बढ़ाना चाहते थे । भुजिया के टेस्ट में उन्हें खास पसंद नहीं आ रहा था । वे ऐसी भुजिया बनाना चाहते थे ,जिसका स्वाद बाकियों से अलग हो ।
वे अलग-अलग मसाले और इंग्रेडिएंट्स के साथ भुजिया बनाने लगे, लेकिन जैसा स्वाद में चाहते थे उसे पाना इतना आसान नहीं था । वे बार-बार इसमें फेल होते । आखिरकार कहीं कोशिशें के बाद उन्हें कामयाबी मिली उन्होंने खास तरह की भुजिया बनाई
हल्दीराम ने भुजिया तो बना लिया ,लेकिन अब उनके सामने चुनौती थी कि उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए । इसके लिए हल्दीराम ने मार्केटिंग पर ध्यान देना शुरू किया । उस वक्त पूरे इलाके में भुजिया ₹2 प्रति किलो बेची जा रही थी । हल्दीराम ने रेट ₹5 प्रति किलो रखा ऐसे में लोगों को लगने लगा हल्दीराम की भुजिया प्रीमियम क्वालिटी की है।
उन्होंने अपने बनाए भुजिया का नाम बीकानेर के राजा के नाम पर डोंगर सेव रखा । हालांकि, राजा का इस भुजिया से कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन यह नाम मार्केट में हिट रहा । इस प्रकार बिना एक पैसे खर्च किए बीकानेर के राजा हल्दीराम के अघोषित ब्रांड एंबेसडर बन गए। हल्दीराम का डोगरसेव लोगों के बीच में खूब पॉपुलर रहा । इस भुजिया की बिक्री ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए ।
Haldiram success story in hindi , हल्दीराम यानी गंगा विशनजी की बनाई भुजिया और मार्केटिंग स्ट्रेटजी दोनों ही सफल रही । 1960 के दशक में कंपनी नई ऊंचाईयों की तरफ बड़ी । इस समय कंपनी की बागडोर शिव किशन अग्रवाल के हाथ में आ गई थी यह हल्दीराम के पोते थे।
इसी दशक में अग्रवाल फैमिली तीन हिस्सों में बट गई । हल्दीराम के बेटे रामेश्वर लाल अग्रवाल अपने पिता और दो भाइयों से अलग हो गए । और हल्दीराम एड संस नाम से कोलकाता में अलग दुकान खोली । हालांकि वहां पहले से पिता हल्दीराम की हल्दीराम भुजिया वाला नाम से दुकान थी। हल्दीराम भुजिया की एक ब्रांच बीकानेर में पहले से थी। हल्दीराम के पोते शिव किशन अग्रवाल ने नागपुर में भुजिया का ब्रांच खोला। हालांकि यह बीकानेर और कोलकाता की तरह सफल नहीं हुआ ।
Haldiram success story in hindi,हालांकि शिव किशन ने हार नहीं मानी । नागपुर में स्नेक्स में लोगों को क्या पसंद आया और क्या नहीं, इसको लेकर उन्होंने मार्केट रिसर्च कराई। इससे जो नतीजे आए उन्होंने वहां के मार्केट में नए मौके देखे।
इससे पता चला कि महाराष्ट्र के लोग अलग-अलग तरह के स्नेक्स को नहीं जानते । ऐसे में वो मार्केट में नए स्नेक्स उतार सकते थे । इसी तरह बाजार में मिठाइयों के भी ज्यादा ऑप्शन मौजूद नहीं थे। तो हल्दीराम ने यह पर नई मिठाइयां लॉन्च की ।
शिव किशन ने अपनी फेवरेट मिठाई काजू कतली यहां लांच की। उस वक्त महाराष्ट्र के लोगों के लिए यह मिठाई एकदम नई थी । ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसका स्वाद पहुंचाने के लिए शुरूआत में उन्होंने फ्री में बांटा । https://en.wikipedia.org/wiki/Haldiram%27s
उनकी यह स्ट्रेटजी काम आई । धीरे-धीरे काजू कतली नागपुर में फेमस होने लगी। उसकी बिक्री भी बढ़ने लगी । सिर्फ 3 साल में नागपुर में हल्दीराम के सेल्स में 400 % का ग्रोथ देखने को मिला । सर्वे में अभी पता चला कि नागपुर के लोगों को साउथ इंडियन इडली और डोसा पसंद है। ऐसे में नागपुर में ब्रांड ने पहले साउथ इंडियन रेस्टोरेंट की शुरुआत की ।
हल्दीराम के पोते मनोहर लाल अग्रवाल ने ब्रांड को देश के कोने-कोने तक पहुंचा।
Haldiram success story in hindi ,1973 में हल्दीराम के पोते मनोहर लाल अग्रवाल ने फैमिली बिजनेस जॉइन किया। उसे समय तक पूरे देश में हल्दीराम ब्रांड की सिर्फ तीन दुकान थी । बीकानेर, कोलकाता ओर नागपुर में ।
मनोहर लाल ने दिल्ली के चांदनी चौक में एक और दुकान खोली। लेकिन उनका रोल सिर्फ यही तक सीमित नहीं था । उन्होंने हल्दीराम के प्रोडक्ट की पैकिंग और ऑल इंडिया उनके स्टोर खोलने पर काम किया।
1990 से पहले तक हल्दीराम अपने प्रोडक्ट बिना किसी स्टैंडर्ड पैकेजिंग के बेचा करता था। मनोहर लाल ने इसे बदला । इसके अलावा उन्होंने हल्दीराम के स्टोर देश भर में खोले । सबसे पहले बड़े शहरों में स्टोर खोले । फिर छोटे शहरों की तरफ बड़े ।
इस तरह तीन शहरों से ननिकल कर हल्दीराम पूरे देश के लोगों की जुबान पर चढ़ गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक आज कंपनी का रेवेन्यू
प्रोडक्ट की पैकिंग और ऑल इंडिया उनके स्टोर खोलने पर काम किया।
1990 से पहले तक हल्दीराम अपने प्रोडक्ट बिना किसी स्टैंडर्ड पैकेजिंग के बेचा करता था। मनोहर लाल ने इसे बदला । इसके अलावा उन्होंने हल्दीराम के स्टोर देश भर में खोले । सबसे पहले बड़े शहरों में स्टोर खोले । फिर छोटे शहरों की तरफ बड़े ।
Haldiram success story in hindi , इस तरह तीन शहरों से निकलकर कर हल्दीराम पूरे देश के लोगों की जुबान पर चढ़ गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक आज कंपनी का रेवेन्यू करीब 12000 करोड रुपए हैं।
साल 2021-22 में कंपनी का सालाना रिवेन्यू 8100 करोड रुपए था। फिलहाल 80 से ज्यादा देशों में कंपनी का बिजनेस है। इसी के साथ 38.5% मार्केट शेयर के साथ स्नैक्स के बाजार में मार्केट लीडर है । बर्तमान में देश भर में 410 से ज्यादा हल्दीराम के स्टोर है।
आज कंपनी ब्रांड नमकीन से लेकर मिठाइयां, कुकीज ओर वेस्टर्न स्नेक्स बनाती है।
Haldiram sussess story in hindi , हमे सिखाती है कि अगर कुछ करने का जज्बा ओर मेहनत लगातार हो तो छोटा बिजनेस भी बड़ा साम्राज्य बन सकता है ।Dettol success story in hindi : 1 लाख करोड़ रेवेन्यू
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