Blinkit success story in hindi : –  1.8 लाख से 1 लाख करोड़ तक

Blinkit success story in hindi : – 1.8 लाख से 1 लाख करोड़ तक ।

Blinkit success story in hindi

Blinkit success story in hindi ,भारत में क्विक कॉमर्स की पहचान आज जिस नाम से होती है, वह है” Blinkit ” लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ब्लिंकिट की जड़ें Grofers में हैं—एक ऐसा स्टार्टअप जो कई  सालों तक घाटे में रहा,फिर बिज़नेस मॉडल बदलकर मुनाफे की राह पर आया ओर 1.8लाख से 11 साल में 1 लाख करोड़ का एंपायर बनाया ।

Blinkit Success Story in Hindi – आज कैसे Grofers घाटे से निकलकर 10 मिनट डिलीवरी मॉडल, डार्क स्टोर्स और एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू के दम पर ₹1 लाख करोड़ की कंपनी बनी।

ब्लिंकिट की शुरुआत

Blinkit success story in hindi, 2010 की बात है । पंजाब के रहने वाले अलविंदर ढीडसा अमेरिका में थे । वह एक लॉजिस्टिक कंपनी में जॉब कर रहे थे।  वहां उनकी मुलाकात आईआईटी मुंबई से पढ़ें सौरभ कुमार से हुई दोनों अपने काम से खुश नहीं थे।

एक रोज दोनों ने सोचा कि वापस भारत आकर कुछ किया जाए तब 2013 का साल बीत रहा था । अलविंदर और सौरभ भारत आ गए।  दोनों ने देखा कि लोग अपने घर तक रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर कर रहे हैं।  कहीं जाने के लिए कैब बुक  कर रहे है । लेकिन चावल ,आटा  दूध ,दही सब्जी जैसी रोजमर्रा की चीजों को पहुंचाने के लिए प्लेटफार्म ही नहीं है ।

इसी प्रॉब्लम से जन्म हुआ वन – नंबर का जो कुछ महीने बाद” ग्रोफर्स” और फिर “Blinkit”  बन गया । आज बिलिंकिट  अपनी क्विक सर्विस के लिए जाना जाता है । 10 से 15 मिनट में खाने पीने की चीज ,सब्जियां डेरी प्रोडक्ट, किचन आइटम से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स यानी हर तरह की चीजों की ऑन डिमांड डिलीवरी की वजह से फेमस है। 2023 – 24 में ब्लिंकिट  का  सालाना रेवेन्यू 769 करोड़ हो चुका था ।  आज कंपनी की वैल्यूएशन 13 बिलियन डॉलर  यानी 1 लाख करोड रुपए हैं ।

दो दोस्तो ने मिलकर शुरू की ब्लिंकिट

Blinkit success story in hindi , आज से 19 साल पहले की बात है।  अलविंदर ढींडसा आईआईटी दिल्ली से पास आउट हो चुके थे।  बैचलर की पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद उन्होंने इंजीनियर और डिजाइन फील्ड में काम कर रही  कैलिफोर्निया की कंपनी URS  कॉरपोरेशन  ज्वाइन कर लिया।

ठीक 2 साल बाद यानी 2007 में अलविंदर  ने इस कंपनी को छोड़कर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में काम करने वाली कंपनी कैंब्रिज सिस्टमैटिक्स मे बतौर सीनियर एसोसिएट ज्वाइन कर लिया।

इधर सौरभ कुमार ने ऑस्टिन के यूनिवर्सिटी आफ टैक्सास में एडमिशन ले लिया । अलविंदर जिस लॉजिस्टिक  सर्विस प्रोवाइड करने वाली कंपनी कैंब्रिज सिस्टमैटिक्स में काम कर रहे थे । कुछ समय बाद सौरभ ने भी यहीं पर सीनियर एनालिस्ट के तौर पर ज्वाइन किया।  दोनों की पहली मुलाकात यही हुई ।

इससे पहले तक अलविंदर और सौरभ एक दूसरे को नहीं जानते थे।  बाद में अरविंद ने जॉब  छोड़कर कोलंबिया बिजनेस स्कूल में MBA के लिए दाखिल ले  लिया । एमबीए कंप्लीट करते हीं अरविंद को लगा कि  भारत लौटकर कुछ बिजनेस किया जाए।  वह वापस इंडिया आ गए उस  वक्त इंडिया में ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो  की शुरुआत हो चुकी थी ।

उन्होंने इंडिया आते ही  जोमैटो जॉन कर लिया, ताकि बिजनेस से जुड़े फंड को समझने में आसानी हो सके । कुछ समय बाद कैंब्रिज सिस्टमैटिक कि जॉब  छोड़कर  सौरभ भी इंडिया वापस आ गए । अब दोनों ने मिलकर कुछ करने की ठानी ।

Blinkit success story in hindi ,बात 2012-13 की इंडिया में हर बात स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ रही थी। कैब और फूड डिलीवरी सर्विस के अलावा अमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसी ईकॉमर्स कंपनियों भी आ चुकी थी।  हालांकि ग्रोसरी सेगमेंट में अभी तक कोई कंपनी नहीं थी । जब अलविंदर और सौरभ  ने देखा कि हर तरह की जरूरत को ऑनलाइन पूरा किया जा रहा है।  लेकिन ग्रोसरी सेगमेंट में कोई प्लेयर नहीं है । तब अलविंदर  ने जोमैटो की नौकरी छोड़ दी । और सौरभ के साथ मिलकर ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी करने की कंपनी के बारे में सोचना शुरू किया।

कुछ महीने बाद 2013 में दोनों ने ऑन डिमांड सर्विस प्रोवाइड करने  बाली  डिलीवरी कंपनी “वन – नंबर “की शुरुआत की।

कस्टमर अपनी रेंज के मुताबिक वन नंबर से ग्रोसरी कॉस्मेटिक रेस्टोरेंट और फार्मेसी के प्रोडक्ट आर्डर करते थे। चार  किलोमीटर की रेंज में डिलीवरी बॉय आसपास की दुकानों से प्रोडक्ट को लेकर डिलीवरी कर  देता था । कुछ महीने बाद सौरभ और अलविंदर  ने देखा की ग्रोसरी सेक्टर में कस्टमर की डिमांड सबसे ज्यादा है । जबकि इलेक्ट्रॉनिक और कॉस्मेटिक में कम ऑर्डर कर रहे हैं । दोनों ने बाकी सर्विसेज बंद करके ग्रोसरी और फार्मेसी पर फोकस करना शुरू कर दिया ।

कई सालों तक घाटे में रही  कंपनी

Blinkit success story in hindi ,वन नंबर को हाइपर लोकल लॉजिस्टिक्स कंपनी ग्रॉफर्स  के रूप में रीब्रांड किया । जो बाद में “ब्लिंकिट” (Blinkit ) बना।  शुरुआत में ग्रोफर्स ऑनलाइन ग्रॉसरी आइटम 90 मिनट में डिलीवर करने लगा पहले साल कंपनी का रेवेन्यू 1.8 लाख करोड रुपए था जबकि 2.8 लाख का नुकसान हुआ ।  अगले साल यानी 2014-15 में रेवेन्यू बढ़कर 86 लाख हो गया लेकिन  घाटा 4 करोड़  था ।microsoft success story in hindi  : – बिलगेट्स की कहानी 

नुकसान की भरपाई और कंपनी को चलाने के लिए अब ग्रोफर्स को फंड की जरूरत थी। अलविंदर  और सौरभ  ने पहले राउंड की  फंडिंग पर फोकस करना शुरू किया।  कंपनी को शुरू करने के 2 साल बाद 2015 में ग्रोफर्स को पहले राउंड  में 305 करोड़ की फंडिंग  मिली । उसी  साल नवंबर  में दूसरे राउंड के फंडिंग में 120 मिलियन डॉलर यानी आज की तारीख के हिसाब से 1000 करोड रुपए की फंडिंग मिली ।

फंड मिलते ही 2 साल के भीतर ग्रॉफर्स  का नेटबर्क  25 शहरों में फैल गया । 30 हजार  से अधिक ऑर्डर की डिलीवरी कर चुका था।  अपनी बढ़ती डिमांड को देखा कर ग्रॉफर्स ने  स्मार्टफोन बेस्ट ग्रोसरी  डिलीवरी प्लेटफार्म “MYgreen Box “ को 2014 में एक्वायर किया ।

हालांकि 2014 में कंपनी को जो 4 करोड़ का नुकसान हुआ था 2015 में यह बढ़कर  225 करोड़ हो गया ।

ब्लिंकिट मुनाफे में कैसे आया 

Blinkit success story in hindi ,कंपनी को मात्र  86 लाख का रेवेन्यू हुआ । बढ़ते घाटों को देखकर कंपनी ने  मोबाइल  एप्लीकेशन लॉन्च किया जिसके बाद  2016 में कंपनी का रेवेन्यू 14 करोड़  करोड़ हुआ ।

फिर भी कंपनी घाटे में जा रही थी।  कंपनी का नुकसान हो रहा था।  अब अलविंदर और सौरभ के सामने ग्रोवर्स को आगे ले जाने की  चुनौती थी । दोनों का बैकग्राउंड लॉजिस्टिक का था ।  कुछ समय बाद उन्होंने सोचा कि यदि वेयरहाउस और सप्लाई चैन मैनेजमेंट को ठीक किया जाता है।  तो शायद घाटे को कम  किया जा सकता है । दरअसल ग्रोसरी कंपनी के सामने घाटे का सबसे बड़ा कारण यही होता है।

दोनों ने दिल्ली गुरुग्राम और बेंगलुरु में 60 हजार  स्क्वायर फीट का वेयरहाउस स्टेबल किय।  जबकि हैदराबाद चेन्नई जयपुर में 20 हजार  स्क्वायर फीट का वेयरहाउस  सेट किया।  यह बिजनेस फंडा ग्रोफर्स के लिए संजीवनी साबित हुआ 2017 में कंपनी का एवरेज  ऑर्डर वैल्यू ₹700 से बढ़कर ₹1300 हो गया रिवेन्यू 34 करोड रुपए पहुंच गया ।

जेप्टो के आने के बाद ब्लिंकिट को घाटा ओर सौरभ कुमार का इस्तीफा 

Blinkit success story in hindi, 2019 20  आते-आते ग्रोफर्स पेपर टैप  और लोकल बनिया जैसी ग्रॉसरी डिलीवरी करने वाली कंपनी से आगे निकल चुकी थी।  लेकिन जैसे ही एक और ग्रॉसरी डिलीवरी कंपनी वाली” बिग बॉस्केट “की मार्केट में एंट्री हुई ग्रोफर्स के बुरे दिन आ गए ।

इसी बीच 2020 में कोरोना महामारी ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी करने वाली कंपनियों के लिए वरदान  रहा।  बिग बॉस्केट का रेवेन्यू 8000 करोड रुपए तक पहुंच गया जबकि ग्रोफर्स अभी भी 27 करोड़ की रेवेन्यू पर अटका था। बिग बॉस्केट का रेवेन्यू  ग्रॉफर्स से तीन गुना हो चुका था।

जेप्टो का क्विक कॉमर्स कॉन्सेप्ट

Blinkit success story in hindi इस दौरान ग्रॉसरी मार्केट में एक और कंपनी की एंट्री “जेप्टो” ।  जेप्टो क्विक कॉमर्स का कॉन्सेप्ट लेकर आई । कोई भी ग्रोसरी आइटम सिर्फ 10 मिनट में । अब  यहां ग्रोफर्स के लिए मरने जैसी हालत हो गई क्योंकि वह 45 मिनट से 90 मिनट में प्रोडक्ट डिलीवरी कर रही थी। क्विक कॉमर्स मार्केट में उथल पुथल मच गया।  2021 आते – आते सौरभ कुमार ने अपनी कंपनी से इस्तीफा  दे दिया ।

अलविंदर ने रातों-रात एक डिसीजन लिया कि ग्रॉफर्स  भी  अब 10 मिनट की डिलीवरी मॉडल को अडॉप्ट करेगी । उन्होंने उन सभी लोकेशन पर सर्विस बंद कर दी जहां 10 मिनट में प्रोडक्ट डिलीवरी करना मुश्किल था।  अब कंपनी को रिब्रांड़ करने की जरूरत थी ।कंपनी ने ग्रोफर्स से नाम बदलकर” Blinkit ” कर दिया और टैगलाइन दिया “लेट्स ब्लैंकेट”

अब जाके ब्लिंकिट  के अच्छे दिन आने शुरू हुए।  पहले उसने 10 शहरों में 10 मिनट में ग्रोसरी प्रोडक्ट डिलीवरी करने की  सर्विस शुरू की।  फिर देखते देखते 2021 की आखिरी तक इस कंपनी ने 30 से ज्यादा शहरों में सर्विस देना शुरू की । हर रोज 1 लाख 25 हजार ऑर्डर  डिलीवरी करने लगा ।

सभी क्विक सर्विस कंपनियां घाटे में फिर Blinkit कैसे फायदे में रहा

Blinkit success story in hindi,2022 में जब जोमैटो ने ब्लिंकिट को खरीदा तो  कंपनी प्रति ऑर्डर 84 रुपए का नुकसान कर रही थी।  सालाना रिवेन्यू 236 करोड रुपए का था।  जबकि 1 साल पहले उसका रिवेन्यू 2700 करोड़ के करीब पहुंच चुका था।  इधर फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो  का सालाना रेवेन्यू  47 हजार मिलियन यानी 4000 करोड रुपए हो चुका था।

बाद में जोमैटो ने   blinkit में 9.3 फ़ीसदी की  हिस्सेदारी  के बदले 839 करोड रुपए का इन्वेस्ट किया उसके बाद जोमैटो ने अपनी इन हाउस ग्रॉसरी डिलीवरी सर्विस बंद कर दी ।

Blinkit success story in hindi ,बाद में जोमैटो के MD दीपेंद्र गोयल ने ब्लिंकिट की हिस्सेदारी  बेचकर  दोनों कंपनी को मर्ज कर दिया ओर कंपनी को नए सिरे  से शुरू करने के लिए 1200 करोड़ का इन्वेस्ट किया और कंपनी को 4400 करोड़ में खरीद लिया ।

 Blinkit success story in hindi ।अलविंदर ढींडसा आज भी ब्लिंकिट से जुड़े हुए है

दरअसल ग्रोसरी इंडस्ट्री का मार्केट फूड इंडस्ट्री से बड़ा है । कुछ सालों में जोमैटो के शेयरों में गिरावट आ रही थी । ब्लिंकिट को टेकओवर करने के बाद दीपेंद्र गोयल ने दिमाग लगाया उन्होंने देखा कि कोई कॉमर्स मार्केट में सिर्फ ग्रोसरी यानी चावल, दाल ,दूध ,दही जैसी नों पेरिशेबल चीज ही नहीं है इसमें पंखा कूलर वाशिंग मशीन जैसे पेरिशेवल आइटम भी है जो किसी कस्टमर को यदि 10 मिनट के भीतर मिल जाता है तो यह रेवेन्यू का बड़ा मॉडल हो सकता है ।

Blinkit success story in hindi कंपनी ने यह देखा कि लोग पैसे खर्च करना चाहते हैं बस उन्हें प्रोडक्ट बिना  किसी देरी के प्रोडक्ट के साथ ज्यादा से ज्यादा कलेक्शन समय पर मिल जाए।  इसी के बाद ब्लिंकिट का  एवरेज ऑर्डर वैल्यू बढ़ने लगा। दरअसल तब तक किसी कंपनी का एवरेज ऑर्डर  वैल्यू ₹500 ज्यादा नहीं होता कंपनी का प्रॉफिट कमाना मुश्किल है। ब्लिंकिट का 2023 में ऑर्डर वैल्यू 635 पहुंच गया ।

क्विक कॉमर्स कंपनी स्टार्ट का बिजनेस मॉडल

Blinkit success story in hindi ,ग्रोसरी को स्टोर करने के लिए एक डार्क स्टोर का सेटअप करने में  25 से 40 लाख  रुपए खर्च  जाता है। https://en.wikipedia.org/wiki/Blinkit

एक डार्क स्टोर की साइज 2000 स्क्वायर फीट के 2500 स्क्वायर फीट तक होता है इसमें करीब 34 स्टाफ काम करते हैं। 2022 में क्विक कॉमर्स कंपनियों का एवरेज ऑर्डर वैल्यू 350 से ₹400 के बीच था इसमें ग्रॉस मार्जिन 15 से 20%  था।

मान लीजिए यदि किसी कंपनी ने ₹400 का सामान बेचा  और इस पर  20% यानी 80 रुपए का ग्रॉस मार्जिन हुआ तो कंपनी को गुड्स और सर्विस में ₹220 का खर्चा आया अब 80 रुपए जो ग्रॉस मार्जिन हुआ उनमें से डिलीवरी बॉय को देने के बाद सैलरी को निकाल दे तो वह मुश्किल कंपनी को ₹40 बचे ।

हर कोई कंपनी हर  महीने का 18000 ऑर्डर  डिलीवर कर रही है।  तब उसे 72 लख रुपए का रेवेन्यू होगा इसमें स्टाफ की सैलरी , करंट इलेक्ट्रिकल बिल से लेकर इन्वेंटरी  कॉस्ट तक  शामिल है जो रेवेन्यू से ज्यादा होगा इस वजह से कंपनी घाटे में रहती है ।

क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री में तीन बड़े चैलेंज

कंपनी का  एवरेज ऑर्डर वैल्यू ₹300 से ₹400 के बीच  होना।

ग्रॉस मार्जिन 20% से कम होना  होना।

ग्रॉस मार्जिन का आधा या तिहाई इससे डिलीवरी पर खर्च होना   इसलिए यदि एवरेज ऑर्डर वैल्यू बढ़ाते हैं या यह ₹500 से ऊपर जाता है।  तभी कंपनी प्रॉफिट में आ सकती है । ब्लिंकिट ने इसी  मॉडल को क्रैक किया आज उसका एवरेज वैल्यू 635 है।

ब्लिंकिट का डार्क स्पॉट्स को सेंट्रलाइज करने का कॉन्सेप्ट

Blinkit success story in hindi ,जब जोमैटो ने ब्लिंकिट  को टेकओवर किया तो उसने सबसे पहले डार्क स्टोर्स को सेंट्रलाइज करने से कॉन्सेप्ट पर काम किया।  यानी एक शहर में दो-तीन किलोमीटर की रेंज में एक डार्क स्टोर जहां हर तरह की ग्रोसरी आइटम स्टोर किया जाता है।

किसी शहर में यदि पांच डार्क स्टोर है तो सभी स्टोर एक दूसरे से कनेक्ट हो इसमें होता यह है कि यदि किसी कस्टमर को कूलर चाहिए तो आर्डर करते ही जिस स्टोर में अवेलेबल है वहां नोटिफिकेशन चला जाता है और प्रोडक्ट कस्टमर को डिलीवरी कर दिया जाता है।  इसमें ज्यादा नॉन पेरिशेबल आइटम होते हैं।

2022 के बाद में blinkit ने कॉस्मेटिक , इलेक्ट्रॉनिक ,गैजेट  समेत हर तरह के नॉन पेरिशेबल सेगमेंट में प्रोडक्ट को डिलीवरी करना शुरू किया ।  इससे  उनका रेवेन्यू बढ़ने लगा । क्योंकि इसमें नुकसान नहीं होता प्रोडक्ट के खराब होने की गुंजाइश न  होने के बराबर होती है ।कंपनी को  पेरिशेबल आइटम में नुकसान होता है । उसकी भरपाई नॉन पेरिशेबल आइटम की  सेल से की जा सकती है।

दूसरी ग्रॉसरी डिलीवरी करने की कंपनी के साथ-साथ यह सबसे बड़ी दिक्कत है।  जो पहले  ग्रोफर्स के साथ भी था। अधिकांश ग्रॉसरी डिलीवरी करने वाली कंपनी के वेयरहाउस सेंट्रलाइज्ड नहीं होते है। वह सिर्फ ग्रोसरी सेगमेंट को डिलीवर करते हैं।  इसमें नुकसान सबसे ज्यादा होता है ।

एडवरटाइजिंग रिवेन्यू

Blinkit success story in hindi,जब बिलिंकिट का ऑर्डर वैल्यू 625 रुपए तक पहुंचा तो ग्रोसरी समेत  दूसरी कंपनियों ने  इससे ज्यादा ऐड देना शुरू किया । दिसंबर 2023 तक  blinkit का एडवरटाइजिंग रिवेन्यू 220% बढ़कर 3542 करोड़ हो गया । ओर एड देने वाली कंपनियों की संख्या 550 हो गई ।

दरअसल बिलिंकिट एड  देने वाली कंपनी ओर प्रोडक्ट बेचने वाली कंपनियों को सब कैटिगरी के ऑप्शन देता है।  इससे कंपनी को केटेगरी के  हिसाब से अपने प्रोडक्ट से रिलेटेड एड देने मेंआसानी होती है । और यूजर तक पहुंच पता है । अभी बिलिंकिट  हर रोज 7000 से अधिक प्रोडक्ट बेच रही है।

मार्जिन फार्म ब्रांड

बिलिंकिट ने अपने प्लेटफार्म पर सबसे अधिक सब कैटिगरी बना कर रखी  हुई है।  जैसे ब्यूटी, कॉस्मेटिक ,इलेक्ट्रॉनिक – गैजेट्स ,ग्रोसरी ,गिफ्ट ..ब्रांड इसके हिसाब से क्विक कॉमर्स कंपनी को पैसा देता है । ब्लिंकिट के साथ-साथ नए ब्रांड जुड़ते रहते हैं जिससे  उनका रेवेन्यू जेनरेट होता है ।

डिलीवरी फीस

दूसरे प्लेटफॉर्म यूजर को लुभाने के लिए फ्री डिलीवरी का आर्डर देते हैं।  ताकि यूजर ज्यादा से ज्यादा उनके प्लेटफार्म पर आए । फ्री डिलीवरी या कैश कूपन के चक्कर में आर्डर प्लेस करें इस कंपनी का नुकसान होता है।  उन्हें पैसा बर्न  करना पड़ता है । लेकिन ब्लिंकिट ऐसा नहीं करता है । वह कोई ऑफर  नहीं  देती है । इसके साथ उसका कैश बर्न नहीं होता है ।

ब्लिंकिट का टारगेट 2000 डार्क स्टोर 

Blinkit success story in hindi ,ब्लिंकिट  2026 तक 2000 डार्क स्टोर बनाने पर काम कर रही है । पिछले क्वार्टर में कंपनी ने 313 नए डार्क स्टोर जोड़े है ।  इसके साथ ही मौजूद समय में कंपनी के डार्क  स्टोर 700  हो गए  । अब ब्लिंकिट   हर दिन 6 लाख से ज्यादा ऑर्डर की डिलीवरी कर रही है

ब्लिंकिट का सालाना रेवेन्यू  (2014- 2025)

2014  –  1.8 लाख रुपए

2015  –    86 लाख रुपये 

2016  –    4 करोड रुपए

 2017  –    34 करोड रुपए

 2018  –   53 करोड रुपए 

2019  –    1280 करोड रुपए 

2020  –    2160 करोड रुपए

 2021  –  2725 करोड रुपए 

2022  –   236 करोड रुपए 

2023  –    724 करोड़ रुपए 

Blinkit success story in hindi, आज क्विक कॉमर्स  मार्केट में ब्लिंकिट  की  हिस्सेदारी 33% है। ओर Swiggy इन्स्टामार्ट की 31% ,जेप्टो 24 % , बिग बॉस्केट की 11% और dunzo (दुन्जो) की 1% है ।

ब्लिंकिट का सफर 

Blinkit success story in hindi: 2013 में सौरभ कुमार और एलबिंदर ढींडसा ने ऑन डिमांड डिलीवरी सर्विस” वन – नंबर” शुरू किया ।

2014 में वन नंबर का नाम बदलकर ग्रॉसरी डिलीवरी कंपनी ग्रोफर्स के रूप में री- ब्रांड किया गया ।

2015 ग्रोफर्स के घाटे को देख कंपनी ने पहले राउंड की फंडिंग शुरू की ओर 305 करोड रुपए की फंडिंग मिली ।

2021 ग्रोफर्स ने खुद को रीब्रांड करके ब्लिंकिट नाम रखा और क्विक कॉमर्स सर्विस में कदम रखा।  10 शहरों में 10 मिनट के अंदर ग्रॉसरी डिलीवरी करने की सर्विस शुरू की।

2022 में जोमैटो ने ब्लिंकिट  के 9.3% की हिस्सेदारी  के बदले 839 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया । बाद में ब्लिंकिट ने 4400 करोड़ में खरीदा।ओर 1200 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया।

Blinkit success story in hindi, हमे सिखाती है कि अगर सही स्ट्रेजी के साथ ओर बदलते वक्त के हिसाब से कम किया जाए तो  घाटे में रही कंपनी भी 1 लाख करोड़ का एंपायर बना सकती है।

ऐसी ही सक्सेस स्टोरी के लिए जुड़े रहे SafltaKiKahani के साथ ।Thanks…

1 thought on “Blinkit success story in hindi : –  1.8 लाख से 1 लाख करोड़ तक”

Leave a Comment