Indigo success story in hindi : 15 लाख से 73000 करोड़ का बिजनेस ।

Indigo success story in hindi : 15 लाख से 73000 करोड़ का बिजनेस ।

Indigo success story in hindi

साल 1984 में  दिल्ली के रहने वाले राहुल भाटिया कनाडा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की पढ़ाई  कर भारत लौटे ।  वह कनाडा की  नॉर्टेल  कंपनी के साथ मिलकर भारत में टेलीकॉम बिजनेस शुरू करना चाहते थे ।  इसी सपने के साथ भारत लौटे थे । उस दौरान भारत सरकार विदेशी टेलीकॉम के पक्ष में नहीं था।  इसलिए उनका यह सपना अधूरा ही रह गया।

आज इंडिगो रोजाना करीब 2200 फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। भारतीय एविएशन मार्केट में आज इसकी  60%  से ज्यादा हिस्सेदारी है ।

राहुल भाटिया(rahul bhatiya):-

राहुल भाटिया का जन्म दिल्ली की एक बिजनेस फैमिली हुआ था। उनके पिता दिल्ली एक्सप्रेस नाम से एक एयरलाइन टिकट बुकिंग एजेंसी चलाते थे।  इस एजेंसी को उनके पिता ने 1964 में 9 पार्टनर के साथ मिलकर शुरू किया था ।

कनाडा में पढ़ाई के बाद उन्होंने 2 साल IBM में काम किया । इस दौरान वे  भारत लौटकर टेलीकॉम कंपनी शुरू करना चाहते थे।  लेकिन यह नहीं हो सका । इसी बीच उनका इंटरेस्ट टीचिंग में  बढ़ा  और उन्होंने टीचर बनने का फैसला किया । लेकिन इस बीच  दिल्ली  एक्सप्रेस में कुछ पार्टनरों ने धोखाधड़ी  की जिससे उनके पिता की तबीयत अचानक खराब होने लगी । इसलिए  राहुल को टीचिंग का सपना छोड़कर पिता का बिजनेस जॉइन करना पड़ा।

15 लाख  रुपए से शुरू की कंपनी

28 साल की उम्र में राहुल को उनको  फैमिली बिजनेस से  बाहर कर दिया गया।  लेकिन उन्होंने  हार नहीं मानी।  उन्होंने 15 लाख  रुपए की सीड  कैपिटल  से ” इंटर ग्लोब ” कंपनी शुरू की।  यह कंपनी  IT सर्विसेज ,BPO ,ट्रैवल, ट्रांसपोर्टेशन ,हॉस्पिटैलिटी का काम कर रही थी ।

मीडिया से दूर रहते हैं, राहुल भाटिया

दुनियाभर में कई अवार्ड जीतने और देश की सबसे बड़ी एयरलाइन चलाने वाले राहुल भाटिया मीडिया और लाइमलाइट से दूर रहते हैं ।

उनके करीबियों का  कहना है कि वह सिंपल शर्ट और पेट में अक्सर  दिखते  हैं । और इसी तरह मीटिंग में जाते हैं । फॉर्मल कोट पैंट या फैंसी कपड़ों में बहुत कमी देखा जाता है।  आज उनकी नेटवर्क 73000 करोड रुपए है । एयरलाइंस के अलावा  गुरुग्राम  में उनके तीन होटल भी है राहुल की एक बेटी अवंतिका और एक बेटा अरुणांशु है।

राहुल भाटिया की उपलब्धियां

2010 में EY का आंत्रप्रोनर ऑफ द ईयर अवॉर्ड मिला

2011 में आउटस्टैंडिंग स्टार्ट अप अवॉर्ड मिला

ब्लूमबर्ग अरबपति इंडेक्स के अनुसार भारत के 22 वे सबसे अमीर आदमी भी रहे है ।

2012 में इंडिगो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी बनी ।

इंडिगो एयरलाइंस की शुरुआत :-

Indigo success story in Hindi, 1952 में भारत सरकार ने एयरलाइंस के लिए प्राइवेट लाइसेंस देने की शुरुआत की । इसी वजह से कहीं प्राइवेट कंपनी एडमिशन इंडस्ट्री में आ रही थी । राहुल भी इस इंडस्ट्री में आना तो चाहते थे लेकिन उन्हें इसकी हड़बड़ी नहीं थी । राहुल ने वक्त लिया बेहतर रणनीति  बनाई , उसके बाद एविएशन  मार्केट में कदम रखा।  एयरलाइंस बिजनेस के लिए उन्हें एक पार्टनर की जरूरत थी,

2000 के दशक में राहुल भाटिया की मुलाकात IIT से पढ़ाई करने वाले राकेश गंगवाल से हुई।  2004 में दोनों ने मिलकर एयरलाइन शुरू करने के लिए लाइसेंस लिया।  2006 में इंडिगो की पहली फ्लाइट उड़ी । यह एक लोग कॉस्ट एयरलाइंस थी।  जो कम किराया और   हाई पंक्चुअलिटी का बादा करती थी।

दो दोस्तो ने मिलकर शुरू कीअपनी एयरलाइन कंपनी।

Indigo success story in hindi, राहुल की राकेश से पहली मुलाकात काम के सिलसिले में हुई थी।  राकेश अमेरिका में यूनाइटेड एयरलाइन से जुड़े थे। राहुल की कंपनी इंटरग्लोब ग्रुप , इसी यूनाइटेड एयरलाइंस की भारत में जनरल सेल्स एजेंट थी । काम के चलते राहुल और राकेश के बीच दोस्ती बढ़ती गई।  एक दिन राहुल ने राकेश से अपनी एयरलाइन कंपनी खोलने की बात की।  और दोनों उसका प्लान बनाने में जुट गए।

राकेश गंगवाल पहले  से  ही एयरलाइंस में काम कर रहे थे । उन्होंने आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और व्हार्टन से एमबीए की पढ़ाई की थी । 1994 में राकेश एयर फ्रांस के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट बने । इसके 4 साल बाद 1998 उन्हें US एयरवेज का प्रेसिडेंट और सीईओ बनाया गया

2004 में हुई थी इंडिगो की मार्केट में एंट्री 

Indigo success story in hindi , काफी मशक्कत के बाद राहुल और राकेश को 2004 में इंडिगो एयरलाइंस के लिए लाइसेंस मिला । इसी साल दोनों ने इंटरग्लोब एवियशन लिमिटेड की नींव रखी ।  इस कंपनी में दोनों की हिस्सेदारी  बराबर की थी  । दिलचस्प है कि इंडिगो ने उस वक्त मार्केट में एंट्री ली जब फ्यूल की कीमत में उछाल रुपए में भारी गिरावट थी । इस समय भारतीय एयरलाइन इंडस्ट्री बुरे दौर से गुजर रही थी किंगफिशर और स्पाइसजेट जैसी कंपनी घाटे में चल रही थी ।

इंडिगो  ने उधार लिए 5 लाख करोड़ के 100 जहाज

Indigo success story in hindi

Indigo success story in hindi ,2005 में पेरिस में एक एयर शो हुआ ।  जिसमें इंडिगो ने एक साथ 5 लाख 43000 करोड़  यानी 6.5बिलियन  डॉलर के 100 एयरबस A 320 एयरक्राफ्ट का आर्डर देकर सबको चौंका दिया था । मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राकेश और राहुल ने सिर्फ 100 करोड़ लगाकर अपनी कंपनी शुरू की थी।  ऐसे में हैरानी थी आखिर इतने कम इन्वेस्टमेंट में 200 जहाज  कैसे लिया जा सकता है ।

पता चला कि इसके पीछे राकेश गंगवाल  का हाथ था ।  राकेश पिछले तीन दशक से एविएशन फील्ड में काम कर रहे थे । इसी वजह से एयरबस कंपनी में उनकी अच्छी जान पहचान थी।  एयरबस कंपनी उनके नाम पर उधर में जहाज देने  के राजी हो गई।  इंडिगो ने 4% डाउन पेमेंट पर 100 जहाज उठा लिए उन्हें इसके साथ 40% का डिस्काउंट कोई मिला ।

पहले जहाज उड़ाने  में 2 साल का वक्त लगा

कंपनी का अपना पहला जहाज  उड़ाने में 2 साल का वक्त लग गया । 28 जुलाई 2006 को इंडिगो को अपना पहला एयरबस मिला।  इसके इसके एक हफ्ते बाद 4 अगस्त 2006 को दिल्ली से गुवाहाटी के लिए इंडिगो की पहली फ्लाइट ने  उड़ान भरी । यहां से भारतीय एविएशन इंडस्ट्री की तस्वीर बदलनी शुरू हो गई।

पहली उड़ान भरने के लगभग 4 साल में इंडिगो में एयर इंडिया मार्केट शेयर का तीसरा स्थान हासिल कर लिया ।

इंडिगो की रणनीति 

Indigo success story in hindi ,इंडिगो ने पूरी तरह से मिडिल क्लास पर फोकस किया । कंपनी ने अपने जहाज में सिर्फ  इकोनॉमी क्लास ही सीट  लगाई । हर फ्लाइट में 180 लोगों के बैठने की जगह बनाई गई । कास्ट कटिंग के लिए सफर के दौरान फ्री का खाना हटा दिया गया ।

कंपनी ने अपने स्टाफ को भी अलग तरह से ट्रेन  किया।  सभी को खास इंस्ट्रक्शन दिया गया की 25 मिनट के अंदर जहाज फिर से उड़ने के लिए तैयार हो जाना चाहिए । ग्राउंड स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी गई की 6 मिनट के अंदर सभी पैसेंजर को जहाज से उतार दे । पैसेंजर के लगेज  को 10 मिनट के अंदर लोड या अनलोड कर दिया जाए ।

राकेश गंगवाल ने  इंडिगो की बोर्ड मेंबर पद से  इस्तीफा दिया 

Indigo success story in hindi, इंडिगो के  लगातार बढ़ते कद  को देखते हुए राकेश गंगवाल इसे  तेजी से आगे बढ़ना चाहते थे । उन्होंने फरवरी 2018 में बताया था कि वित्त वर्ष 2019 में उन्होंने अपनी क्षमता में 52% का इजाफा करेगी।  यानी 155 एयरक्राफ्ट वाली कंपनियां अपने बेड़े में  95  एयरक्राफ़्ट  और बढ़ाने जा रही है ।

इसको लेकर कंपनी के तत्कालीन प्रेसिडेंट आदित्य घोष ने सीधा  विरोध किया था।  राहुल  जल्दबाजी  न  दिखाते हुए सावधानी के साथ आगे बढ़ना चाहते थे । इसी कारण धीरे-धीरे दोनों के बीच  असहमति बढ़ती गई ।

राकेश इंडिगो के कॉरपोरेट गवर्नेंस से नाराज थे।  उन्होंने इंडिगो की तुलना पान की दुकान से कर दी थी।  इसके जवाब में राहुल ने कहा था कि राकेश ऐसा एक भी मामला पेश नहीं कर पाए जिससे इंडिगो को नुकसान का पता चलता हो । सच तो यह है कि मेरी पान की दुकान अच्छी चल रही है। ओर  राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच कंपनी को चलाने को लेकर  विवाद हो गया ।  विवाद इतना  बढ़ गया कि राकेश  गंगवाल ने 2022 में कंपनी के बोर्ड मेंबर पद से इस्तीफा दे दिया । 

आज हर दिन इंडिगो की 2200 से  ज्यादा उड़ाने

Indigo success story in hindi ,इंडिगो रोजाना 2200 से ज्यादा फ्लाइट ऑपरेट कर रही है।  देश के 90 से ज्यादा डोमेस्टिक और 40 से ज्यादा  इंटरनेशनल  उड़ाने भारती  है। कंपनी के बेड़े में 417 जहाज है।  भारत में इंडिगो का 61.4% मार्केट शेयर है । हर 10 में से 6 भारतीय इंडिगो की  फ्लाइट  से सफर कर रहा है । कंपनी का दावा है कि हर  6 साल में अपने जहाज को रिटायर करती है ।Mamaearth Success Story in hindi : 6 साल में यूनिकॉर्न बनी भारतीय कंपनी

दिसंबर 2025 में इंडिगो का कारोबार  हुआ ठप

दिसंबर 2025 में अचानक इंडिगो की 2500 से ज्यादा फ्लाइट रद्द हुई थी ।

2 दिसंबर को सबसे पहले दिल्ली ,मुंबई  बेंगलुरु के एयरपोर्ट पर इंडिगो  की 50- 70 घरेलू फ्लाइट्स प्रभावित हुई।  इस दौरान  इंडिगो का  ऑल टाइम परफॉर्मेंस कम हो गया । वह सिर्फ 35% रह गया

3दिसंबर को भी बेंगलुरु दिल्ली हैदराबाद से उड़ने वाली फ्लाइट के कैंसिलेशन शुरू हो गए । फ्लाइट में देरी के चलते लोग काउंटर पर घंटों   लाइन लगे हुए थे । पुणे और गोवा जैसे छोटे एयरपोर्ट का भी यही हाल होने लगा ऑल टाइम परफॉर्मेंस गिर  कर 19 % रह गई ।

4 दिसंबर को इंडिगो लगभग ठप हो गया करीब 800 फ्लाइट रद्द की गई।  दिल्ली में रात 12:00 बजे तक की सभी डोमेस्टिक फ्लाइट कैंसिल कर दी गई।  भोपाल पुणे और गोरखपुर से शहर में भी यात्री फंसे हुए थे ।  जिससे आलटाइम  परफॉर्मेंस गिरकर 8 % हो गई

5 दिसंबर को हालत  ओर बदतर हुए और  इंडिगो को 1000 से ज्यादा फ्लाइट  रद्द करनी  पड़ी । यात्री 24 घंटे  फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं।

यात्रियों को ऑप्शन फ्लाइट की तलाश में सामान्य  से 10 गुना कीमत पर टिकट खरीदने पड़ रहे हैं।

indigo success story in hindi , हमें सिखाती है कि सफलता किस्मत से नहीं बल्कि सही रणनीति ,अनुशासन ओर धैर्य से मिलती है । https://en.wikipedia.org/wiki/IndiGo

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