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अनिल अग्रवाल : कबाड़ से मेटल किंग तक का सफर

अनिल अग्रवाल : कबाड़ से मेटल किंग तक का सफर 

अनिल अग्रवाल : कबाड़ से मेटल किंग तक

 

जानिए कैसे बिहार के एक साधारण लड़के अनिल अग्रवाल ने कबाड़ बेचने से शुरुआत की और वेदांता ग्रुप को दुनिया की सबसे बड़ी मेटल कंपनी बना दिया। पढ़िए अनिल अग्रवाल की  सफलता की  कहानी।”

वेदांता जिंक,लेड ,एल्यूमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है।  इसके फाउंडर अनिल अग्रवाल इंडिया के मेटल मैन के नाम से जाने जाते हैं।  कंपनी का मार्केट कैप करीब 80,000 करोड रुपए हैं।  बही उनकी संपत्ति 35000 खरीद के ऊपर है । जिससे वे बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति भी है ।

अनिल अग्रवाल का जन्म ओर संघर्ष

अग्रवाल का जन्म 1954 में बिहार के पटना में हुआ । वे  चार भाई बहन थे ।उनके परिवार की जड़े राजस्थान में रही है । उनके पिता कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए । उनके पिता की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी।  वे  पटना में ही एक छोटी सी   एल्यूमिनियम  कंडक्टर की दुकान चलाते थे ।

अनिल अग्रवाल की शुरुआत पढ़ाई पटना  में हुई  थी । इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें पटना से बाहर जाना था ,लेकिन उन्होंने तय किया कि वे पिता के बिजनेस में हाथ बटाएंगे। इसके बाद वे  पिता के साथ काम करने लगे ।

हालांकि कुछ सालों बाद अनिल का मन फिर से बाहर जाने का करने लगा । 19 साल की उम्र में भी पटना से मुंबई आ गए । साथ में था एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर  था । अनिल ने पिता को बिजनेस  करते हुए देखा था।  इसलिए उन्हें नौकरी की दुनिया पसंद नहीं आई।

अनिल अग्रवाल : शुरुआती असफलताएं

मुंबई आने के बाद कुछ सालों तक अलग-अलग धंधे में हाथ आजमाते रहे।  कुछ साल तक कबाड़ी  का बिजनेस  भी किया किया । कैंब्रिज में एक बार बोलते हुए उन्होंने बताया था कि मेरे शुरुआती 30 साल संघर्ष में बीते सालों तक डिप्रेशन में रहा।  उसके बाद मुंबई में एक घर  लिया फिर पत्नी और बेटे को भी वहां बुला लिया।  कैंब्रिज में स्पीच के दौरान अनिल  पत्नी की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने एक  छोटे से मकान को घर बना दिया ।

एक बार सोशल मीडिया पर अनिल अग्रवाल  ने बताया था कि मैने  बहुत उम्मीद से पहली कंपनी खरीदी लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ । 10 साल बाद मुश्किल हालातो से गुजरे ।

इसके बाद 1976 में शमशेर स्टर्लिंग केवल कंपनी खरीदी तब मेरे पास वर्कर्स को सैलरी देने और रॉ मैटेरियल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे । दिन-दिन भर में पेमेंट क्लियर करने के लिए बैंकों के चक्कर काटता था ।इसके बाद में ने अलग-अलग फील्ड में 9 बिजनेस  शुरू किए । हर बिजनेस में असफलता मिली  लेकिन मैने  हार नहीं मानी।

वेदांता रिसोर्सेज की शुरुआत

इसके बाद 1976 में अनिल अग्रवाल  ने एक नई कंपनी शुरू की और नाम रखा “वेदांता रिसोर्सेज “। शुरुआत में ही इस बिजनेस में उन्हें फायदा होने लगा था।  इस प्रॉफिट का उन्होंने दूसरी कंपनियों को अधिकृत करने में  इस्तेमाल किया।  1993 उन्होंने औरंगाबाद में एल्युमिनियम सीट्स और फाइल्स बनाने का प्लांट लगाया।  इसके साथ यह भारत की पहली कॉपर रिफायनरी प्राइवेट कंपनी बन गई।

अनिल अग्रवाल का भारत का मेटल  किंग  बनना

2001 में भारत सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी का ऑफर  दिया । तब वेदांत रिसोर्सेज ने भारत अल्युमिनियम कंपनी में 51% शेयर खरीद लिया। यह सौदा 551 करोड़ रूपया हुआ । अगले साल वेदांत ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में 65% हिस्सेदारी खरीद ली।

इस तरह वेदांता रिसोर्सेज तो पब्लिक सेक्टर कंपनी में आधे से ज्यादा शेयर की हिस्सेदारी  बन गई । कहा जाता है कि जब इन दोनों कंपनियों में वेदांता ने हिस्सेदारी  खरीदी तब उनकी हालत अच्छी नहीं थी।

दोनों ही माइनिंग कंपनी थी वेदांत का इसी सेक्टर में बिजनेस था ऐसे में अनिल अग्रवाल के इस फैसले से वेदांत को खूब फायदा हुआ । यहीं से मेटल प्रोडक्शन सेक्टर में अनिल अग्रवाल स्थापित हो गए  उन्हें भारत का मेटल मैन कहा जाने लगा।

लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग

2001 में वेदांता को सिस्टर  कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज ब्रोकर हर्षद मेहता के साथ शेयर प्राइस के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में फंस गई थी । इसमें बीपीएल और वीडियोकोन जैसी कंपनियां भी शामिल थी । शेयर बाजार में नियम कानून को देखने वाली संस्था सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया यानी SEBI ने तब स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को कैपिटल मार्केट में बैन कर दिया था ।

2003 में अनिल अग्रवाल लंदन चले गए  यहां कंपनी को नए नाम वेदांत रिसोर्सेज नाम से खड़ा किया।  इसी साल उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया । यह पहली बार था कि जब कोई भारतीय कंपनी लंदन  स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी।  इसके बाद दूसरी और भारतीय कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई । अनिल  अग्रवाल को आफरिंग से करीब 7000 करोड रुपए का फायदा भी हुआ ।

अनिल अग्रवाल : विवाद ओर चुनौतियां

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता  के प्लांट को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा था   आसपास रहने वाले लोगों को पर्यावरण प्रेमियों का कहना था कि इस वजह से कहीं बीमारियां हो रही है।  लोगों का आरोप था की यहां के पानी में इसकी वजह से जहरीले तत्व घुल  गए हैं । 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर 1.21 करोड रुपए का जुर्माना भी लगाया था ।

2018 में स्थानीय लोगों और पर्यावरण वेदों ने इसके विस्तार को लेकर प्लांट के बाहर धरना देना शुरू किया । इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प  हुई और पुलिस फायरिंग में 13 लोग मारे गए । तब स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आर्डर पर इस प्लांट को बंद कर दिया गया।

2022 में वेदांता की रेटिंग का घटना

2022 में रेटिंग एजेंसी मूडीज  ने वेदांता रिसोर्सेज की रेटिंग को  घटा दिया था ।  रेटिंग एजेंसी ने कंपनी के लोन देने की क्षमता पर चिंता जताई । उधर  कंपनी ने मूडीज के रेटिंग को सिरे  से खारिज कर दिया । कंपनी एक बयान जारी करते हुए कहा कि फंड जुटाना में हमारे  ट्रैक रिकार्ड को कोई भी इग्नोर नहीं कर सकता।  हम अभी भी डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों ही मार्केट में फंड जुटाने में सक्षम है।

अनिल अग्रवाल ने 1979 में कंपनी की शुरुआत की थी 2024-25 में कंपनी का रेवेन्यू 1.5 लाख करोड़ रहा । माइनिंग , ऑयल,गैस और इलेक्ट्रिक यूटिलिटी सेक्टर में  कंपनी का कारोबार फैला है । भारत के अलावा साउथ अफ्रीका ,लाइबेरिया ओर नामीबिया में इसके ऑपरेशन है।

कबाड़ से मेटल किंग तक

1970 में अनिल अग्रवाल ने स्क्रैप मेटल (कबाड़) का बिजनेस शुरू किया । बे दूसरे राज्य से केवल कंपनियों का स्क्रैब खरीदते ओर मुंबई बेचते । Warren Buffett: 97 लाख करोड़ का साम्राज्य

1976 में बैंक लोन लेकर शमशेर स्ट्रलिंग कॉरपोरेशन कंपनी खरीदी जो इनएमेल्ड कॉपर प्रोडक्ट्स बनाती है ।

1986 में sterlite industries की स्थापना की । 

1995 मद्रास एल्यूमिनियम का अधिग्रहण किया 

2001 में भारत एल्यूमिनियम कंपनी (BALCO) में 51%हिस्सेदारी सरकार से खरीदी । 

2002 में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) में 65%हिस्सेदारी हासिल की ।

2003  वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया । 

2004 में ज़ामिब्यां में कोंकोला कॉपर माइंस का अधिग्रहण किया 

2011 में cairn india में हिस्सेदारी 

2012 में sesa Goa और sterlite को मर्ज किया 

2017 एंग्लो अमेरिकन 19%हिस्सेदारी की 

2022 में फॉक्सकॉन के साथ गुजरात में 20 बिलियन डॉलर सेमीकंडक्टर ओर डिसप्ले प्लांट के लिए पार्टनरशिप की ।

अनिल अग्रवाल : परिवार ओर व्यक्तिगत जीवन

अनिल अग्रवाल के दो बच्चे है । अग्निवेश अग्रवाल  ओर बेटी प्रिया अग्रवाल । अग्निवेश अग्रवाल वेदांता ग्रुप पावर लिमिटेड के बोर्ड सदस्य थे । प्रिया अग्रवाल वेदांता के बोर्ड में शामिल है। साथ ही वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरमैन भी है । 2013 में प्रिया की शादी बैंकर आकर्ष हेब्बर से हुई थी।

अनिल अग्रवाल अपने बेटे अग्निवेश के साथ

 

अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश  अग्रवाल का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था ।  जिनका  8 जनवरी 2026 को 49 साल की उम्र में निधन हो गया।  उन्हें अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए जिनको बाद में इलाज के लिए न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया । वहां उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था । जिससे उनकी मृत्यु हो गई । वर्तमान में वेदांता ग्रुप के सीईओ अनिल अग्रवाल ही  है । https://en.wikipedia.org/wiki/Vedanta_Limite

अनिल अग्रवाल की कहानी हमे सिखाती है कि असफलता कभी अंत नहीं होती है । बड़े फैसले ही जिंदगी में बड़ा बदलाव लाते है । संघर्ष ही सफलता की असली कुंजी है । 

अगर आपको ” बिहार के साधारण लड़के से लेकर भारत के मेटल किंग बनने तक” की कहानी पसंद आई हो तो आप अपना फीडबैक जरूर दे ।

safltakikhani@gmail.com

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